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NH-707 / 1352 करोड़ का पांवटा साहिब-शिलाई-गुम्मा एनएच-707 लोक निर्माण विभाग के हवाले

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 1 Hour Ago • 1 Min Read

NH-707 / 1352 करोड़ का पांवटा-शिलाई-गुम्मा एनएच 707 अब लोक निर्माण विभाग के हवाले , निर्माण पूरा होने के बाद मोर्थ ने हिमाचल लोक निर्माण विभाग के नेशनल हाईवे नाहन मंडल को सौंपी 103 किलोमीटर सड़क, निर्माण के दौरान सामने आई सैकड़ों खामियां

नाहन

प्रदेश के पहले ग्रीन कॉरिडोर के तहत करीब 1352 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित पांवटा साहिब-शिलाई-गुम्मा नेशनल हाईवे-707 का 103 किलोमीटर हिस्सा अब हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग के नेशनल हाईवे नाहन मंडल के हवाले हो गया है। मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवे ने निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इस राष्ट्रीय राजमार्ग को हाल ही में लोक निर्माण विभाग को सौंप दिया है। अब सड़क के रखरखाव और आगामी मरम्मत कार्य की जिम्मेदारी नेशनल हाईवे नाहन मंडल की होगी।

पांवटा साहिब से सिरमौर-शिमला सीमा पर स्थित फ्रेंडिस पुल तक इस ग्रीन कॉरिडोर का निर्माण पांच अलग-अलग कंपनियों ने किया। वर्ष 2021 में शुरू हुआ निर्माण कार्य वर्ष 2023 के अंत तक पूरा किया जाना प्रस्तावित था, लेकिन विभिन्न कारणों से यह कार्य मार्च 2026 में पूरा हो पाया। परियोजना के अलग-अलग हिस्सों के लिए पांच कंपनियों को करीब 10 से 30 किलोमीटर तक के अलग-अलग टेंडर आवंटित किए गए थे।

शुरुआत में इस परियोजना की डीपीआर करीब 1150 करोड़ रुपये की तैयार की गई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर करीब 1350 करोड़ रुपये किया गया। वर्ष 2020 में करीब 900 करोड़ रुपये के टेंडर अवार्ड किए गए, जबकि वर्ष 2021 में 200 करोड़ और 252 करोड़ रुपये के अतिरिक्त टेंडर भी जारी किए गए।

हालांकि, निर्माण पूरा होने के साथ ही इस ग्रीन कॉरिडोर को लेकर सवाल भी खड़े होते रहे हैं। निर्माण के दौरान अवैज्ञानिक पहाड़ कटिंग, कथित अवैध खनन, पर्यावरण को नुकसान, सड़क की चौड़ाई और सुरक्षा मानकों को लेकर स्थानीय स्तर पर लगातार शिकायतें सामने आती रहीं। निर्माण अवधि में विभिन्न हादसों में करीब नौ लोगों की जान जाने का भी दावा किया गया है।

शिलाई विधानसभा क्षेत्र के समाजसेवी नाथूराम चौहान ने निर्माण कार्य के दौरान पर्यावरण को हुए नुकसान और कथित अनियमितताओं का मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, नई दिल्ली के समक्ष उठाया था। मामले में निर्माण कंपनियों और जिला प्रशासन को लेकर एनजीटी में सुनवाई हुई और कई मौकों पर संबंधित पक्षों को फटकार भी लगी। यह मामला अभी भी एनजीटी में विचाराधीन है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई स्थानों पर डीपीआर के मुताबिक पहाड़ की कटिंग और सड़क की चौड़ाई नहीं की गई। यही वजह है कि कुछ स्थानों पर नई सड़क पहले की तुलना में भी संकरी दिखाई दे रही है। बरसात शुरू होते ही कई हिस्सों में भूस्खलन और सड़क उखड़ने की शिकायतें भी सामने आने लगी हैं। ऐसे में करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार किए गए इस ग्रीन कॉरिडोर की गुणवत्ता और स्थायित्व पर सवाल उठ रहे हैं।

अब निर्माण कार्य पूरा होने के बाद सड़क लोक निर्माण विभाग के नेशनल हाईवे नाहन मंडल को सौंपे जाने से विभाग के सामने इसकी सुरक्षा, रखरखाव और निर्माण संबंधी खामियों को दूर करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।

नेशनल हाईवे नाहन मंडल के अधिशासी अभियंता राकेश खंडूजा ने पुष्टि करते हुए बताया कि मोर्थ ने हाल ही में पांवटा साहिब-शिलाई-गुम्मा नेशनल हाईवे को नेशनल हाईवे नाहन मंडल को सौंप दिया है।

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