श्रावण के पहले सोमवार पर पौड़ीवाला महादेव में उमड़ा आस्था का सैलाब, जलाभिषेक के लिए दिनभर लगी श्रद्धालुओं की कतारें
श्रावण के पहले सोमवार पर सिरमौर जिला मुख्यालय नाहन से लगभग सात किलोमीटर दूर स्थित ऐतिहासिक पौड़ीवाला महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। तड़के से ही श्रद्धालु भगवान शिव के जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचने लगे। दिनभर मंदिर परिसर हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजता रहा तथा श्रद्धालुओं ने सुख-समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना की।
नाहन
लोक संपर्क विभाग से सेवानिवृत्त पंडित सुभाष चंद्र शर्मा के अनुसार पौड़ीवाला महादेव मंदिर का इतिहास त्रेता युग से जुड़ा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लंकापति रावण ने अमरता का वरदान प्राप्त करने के लिए भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी। भगवान शिव के निर्देश पर एक ही दिन में पांच शिवलिंग स्थापित करने के संकल्प के तहत रावण ने पहला शिवलिंग हर की पौड़ी, दूसरा पौड़ीवाला, तीसरा चूड़ेश्वर महादेव और चौथा किन्नर कैलाश में स्थापित किया। किंतु भगवान विष्णु की लीला से रावण को निद्रा आने के कारण उसका संकल्प अधूरा रह गया और वह अमरता का वरदान प्राप्त नहीं कर सका।
उन्होंने बताया कि द्वापर युग में पांडवों के वनवास के दौरान अर्जुन ने दिव्य अस्त्रों की प्राप्ति के लिए भी इसी स्थान पर तपस्या की थी। वहीं महर्षि मार्कण्डेय सहित अनेक ऋषि-मुनियों और संतों की तपस्थली के रूप में भी इस मंदिर का उल्लेख मिलता है। मंदिर परिसर में शिव परिवार, नंदी महाराज, बजरंगबली, शीतला माता, बांके बिहारी मंदिर, प्राचीन धूना तथा संत-महात्माओं की समाधियां भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं।
पंडित सुभाष चंद्र शर्मा ने बताया कि वर्तमान में पौड़ीवाला महादेव केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि उत्तर भारत के प्रमुख शिव तीर्थों में अपनी विशेष पहचान बना चुका है। प्रत्येक सोमवार, महाशिवरात्रि, श्रावण और माघ मास में यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। मंदिर समिति श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाएं संभालती है तथा विशेष अवसरों पर भंडारों का आयोजन भी किया जाता है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार की ‘नई मंजिलें-नई राहें’ योजना के तहत मंदिर के जीर्णोद्धार और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार के लिए लगभग 85 लाख रुपये व्यय किए जा रहे हैं। इसके अलावा श्रद्धालुओं के सहयोग से भी समय-समय पर मंदिर परिसर में विभिन्न सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
पंडित सुभाष चंद्र शर्मा ने बताया कि अंबाला सहित हरियाणा, हिमाचल और अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां नियमित रूप से दर्शन के लिए पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि पौड़ीवाला महादेव में जलाभिषेक और दर्शन से उन्हें अद्भुत आध्यात्मिक शांति, मनोकामनाओं की पूर्ति और आत्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है।