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प्राइवेट स्कूलों में महंगी किताबों पर सख्ती, मानवाधिकार आयोग ने ऑडिट और एनसीईआरटी सिलेबस के निर्देश दिए

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन2 • 4 Hours Ago • 1 Min Read

Himachalnow / शिमला

मानवाधिकार आयोग ने प्राइवेट स्कूलों में किताबों की कीमत और फीस संरचना की जांच के लिए सभी राज्यों को निर्देश जारी किए हैं। हिमाचल सरकार से 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है और एनसीईआरटी सिलेबस लागू करने पर जोर दिया गया है।

शिमला

मानवाधिकार आयोग के निर्देश और ऑडिट प्रक्रिया

मानवाधिकार आयोग ने प्राइवेट स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा के लिए सभी राज्य सरकारों को निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने विशेष रूप से किताबों की कीमत, फीस संरचना और शैक्षणिक स्तर का ऑडिट कराने को कहा है। हिमाचल प्रदेश सरकार को भी इस संबंध में पत्र प्राप्त हुआ है, जिसमें 30 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि सभी स्कूलों में शिक्षा से संबंधित प्रक्रियाएं निर्धारित मानकों के अनुसार संचालित की जानी चाहिए।

किताबों की कीमत और सिलेबस को लेकर दिशा-निर्देश

आयोग ने पाया है कि कुछ प्राइवेट स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबें निर्धारित कराई जाती हैं, जिनकी कीमतें अपेक्षाकृत अधिक होती हैं। इस संदर्भ में निर्देश दिए गए हैं कि कक्षा 8 तक एनसीईआरटी और एससीईआरटी की किताबें ही पढ़ाई जाएं। साथ ही पहली से बारहवीं कक्षा तक एनसीईआरटी सिलेबस लागू करने की बात कही गई है, ताकि शैक्षणिक सामग्री एकरूप और निर्धारित मानकों के अनुरूप रहे।

शिक्षा नीति और बैग के वजन पर फोकस

आयोग ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों को लागू करने पर भी जोर दिया है। इसके तहत छात्रों के स्कूल बैग का वजन कम करने और अनावश्यक किताबों से बचने के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम की संबंधित धाराओं का उल्लेख करते हुए आयोग ने कहा है कि स्कूलों में छात्रों पर अतिरिक्त शैक्षणिक भार नहीं डाला जाना चाहिए और सभी संस्थानों को निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करना आवश्यक होगा।

रिपोर्ट, निरीक्षण और संभावित कार्रवाई

आयोग के निर्देशानुसार राज्य के शिक्षा अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर स्कूलों का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार करनी होगी। इसमें यह जानकारी शामिल होगी कि किन स्कूलों में एनसीईआरटी या एससीईआरटी की किताबें लागू हैं और किन स्कूलों में अन्य सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा 2026-27 शैक्षणिक सत्र में छात्रों के नामांकन और खरीदी गई किताबों से संबंधित आंकड़े भी प्रस्तुत करने होंगे। यदि किसी स्कूल में निर्धारित मानकों का पालन नहीं पाया जाता है, तो संबंधित संस्थानों से जवाब मांगा जाएगा और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।