बसें बढ़ाओ या सब डिपो का बोर्ड हटाओ, राजगढ़ में भड़का गुस्सा
Himachalnow / रराजगढ़
राजगढ़ में एचआरटीसी सब डिपो की बदहाल व्यवस्था को लेकर स्थानीय लोगों में गुस्सा भड़क गया है और उन्होंने बसों की संख्या बढ़ाने या सब डिपो का बोर्ड हटाने की मांग की है। लोगों का आरोप है कि सब डिपो बनने के बाद बसें और रूट दोनों में भारी कमी आई है जबकि लंबी दूरी की सेवाएं अब तक शुरू नहीं हो पाई हैं।
राजगढ़
एचआरटीसी सब डिपो राजगढ़ की बदहाल व्यवस्था को लेकर स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। लोगों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार बसों के बेड़े में बढ़ोतरी और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं करवा सकती, तो सब डिपो का बोर्ड हटाया जाए।स्थानीय लोगों रामकुमार शर्मा, देसराज ठाकुर, रविन्द्र सिंह चौहान और लेखराम शर्मा सहित अन्य ने कहा कि सब डिपो बनने से पहले राजगढ़ में 13 बसें और 30 से अधिक रूट संचालित होते थे। लेकिन हैरानी की बात यह है कि सब डिपो बनने के बाद सुधार होने के बजाय स्थिति और खराब हो गई। अब बसों की संख्या घटकर मात्र 10 रह गई है, जबकि रूट भी घटकर करीब 20 ही रह गए हैं।
लोगों ने आरोप लगाया कि वर्ष 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर द्वारा सब डिपो की घोषणा की गई और 2019 में इसका उद्घाटन भी कर दिया गया, लेकिन करीब आठ साल बाद भी यह सब डिपो नाम मात्र का ही रह गया है। यहां स्टाफ के नाम पर केवल एक अड्डा इंचार्ज तैनात है, जबकि मरम्मत के लिए कोई मैकेनिक तक उपलब्ध नहीं है। बसों की छोटी-मोटी मरम्मत भी निजी वर्कशॉप में करवाई जा रही है।सबसे गंभीर बात यह है कि इस सब डिपो से आज तक कोई भी लंबी दूरी की बस सेवा शुरू नहीं हो पाई है। लोग लगातार हरिद्वार, दिल्ली, चंडीगढ़ और शिमला के लिए सीधी बस सेवा की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार और विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहे।
स्थानीय लोगों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जहां एक ओर निजी बसों की संख्या लगातार बढ़ रही है, वहीं एचआरटीसी की सेवाएं सिमटती जा रही हैं। इससे साफ है कि सरकारी परिवहन व्यवस्था पूरी तरह से उपेक्षित हो चुकी है।लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व सरकार के समय की गई कई बड़ी घोषणाएं आज तक धरातल पर नहीं उतर पाई हैं, जिससे क्षेत्र के लोगों में भारी असंतोष है।
उधर एचआरटीसी सोलन के क्षेत्रीय प्रबंधक सुरेंद्र राजपूत ने बताया कि राजगढ़ से संचालित कई रूट घाटे में चल रहे हैं और बसों में अधिकतर स्कूली बच्चे ही सफर करते हैं। उन्होंने कहा कि मांग के आधार पर लंबी दूरी की बस सेवाएं शुरू करने पर विचार किया जा सकता है।फिलहाल सवाल यही उठ रहा है कि जब सब डिपो बनने के बाद भी सुविधाएं घट रही हैं, तो ऐसे “कागजी” सब डिपो का औचित्य क्या रह जाता है।