रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण का असर नहीं, जानें राखी बांधने के शुभ मुहूर्त और नियम
रक्षाबंधन का पर्व देशभर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। पंचांग के अनुसार राखी बांधने के लिए दिन में कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं और भद्रा काल पहले ही समाप्त हो चुका है। चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देने के कारण सूतक काल मान्य नहीं होगा। ऐसे में राखी बांधने, पूजा-पाठ करने और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों पर ग्रहण का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
रक्षाबंधन पर बहनें भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उसके अच्छे स्वास्थ्य, लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। भाई भी जीवनभर बहन की रक्षा करने और उसका साथ निभाने का संकल्प लेते हैं। पंचांग के अनुसार राखी बांधने का पहला शुभ समय सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक है। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:56 बजे से दोपहर 12:48 बजे तक और शुभ चौघड़िया दोपहर 12:28 बजे से 2:03 बजे तक बताया गया है।
अपराह्न और चर चौघड़िया का समय
राखी बांधने के लिए अपराह्न काल दोपहर 1:44 बजे से शाम 4:16 बजे तक रहेगा। इसके बाद चर चौघड़िया शाम 5:13 बजे से 6:48 बजे तक बताया गया है। चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल लागू नहीं होगा और मंदिरों के कपाट भी बंद नहीं किए जाएंगे। रक्षाबंधन से जुड़े धार्मिक कार्यक्रम, पूजा-पाठ और अन्य अनुष्ठान सामान्य रूप से किए जा सकेंगे।
राखी बांधने की धार्मिक विधि
धार्मिक परंपरा के अनुसार राखी बांधने से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। पूजा की थाली में रोली, अक्षत, चंदन, राखी, मिठाई और दीपक रखें। भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर बैठाकर तिलक करें, अक्षत लगाएं और उसकी कलाई पर राखी बांधने के बाद आरती उतारें। इसके बाद भाई-बहन एक-दूसरे को मिठाई खिलाएं और परिवार के बड़े-बुजुर्गों से आशीर्वाद लें।