अंतरराष्ट्रीय श्री रेणुका जी मेला धार्मिक या कमर्शियल, उठे सवाल
कुब्जा पवेलियन में कारोबार, डेल्टा में क्यों नहीं हो सकता मेला बाजार; पार्किंग से लेकर झील की सेहत तक व्यवस्था पर सवाल
श्री रेणुका जी
अंतरराष्ट्रीय धार्मिक मेले के नाम से आयोजित होने वाले श्री रेणुका जी मेले के स्वरूप को लेकर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। धार्मिक आयोजन के लिए प्रसिद्ध यह मेला कहीं कमर्शियल गतिविधियों तक सिमटकर तो नहीं रह गया? स्थानीय प्रबुद्ध लोगों और देव परंपरा से जुड़े लोगों का सुझाव है कि कुब्जा पवेलियन में लगने वाला मेला बाजार गिरी-जालाल नदी के डेल्टा में शिफ्ट किया जाए और कुब्जा पवेलियन को प्रदेशभर के देवी-देवताओं की पालकियों तथा धार्मिक आयोजनों का केंद्र बनाया जाए।
डेल्टा क्षेत्र में मेले के दौरान नदी का बड़ा हिस्सा खाली रहता है। यहां हजारों दुकानें, झूले और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां व्यवस्थित की जा सकती हैं। करीब 2000 वाहनों की पार्किंग भी विकसित होने से मेला स्थल से कई किलोमीटर पहले वाहन खड़े करने की समस्या खत्म हो सकती है। इससे पुलिस-प्रशासन का बड़ा दबाव भी ट्रैफिक व्यवस्था से हटेगा।

वहीं कुब्जा पवेलियन वेटलैंड और रिजर्व फॉरेस्ट के समीप है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में हजारों लोगों की आवाजाही, कचरा और अन्य कमर्शियल गतिविधियां पर्यावरणीय चिंता बढ़ाती हैं। श्री रेणुका जी झील की पारिस्थितिकी को लेकर वैज्ञानिक स्तर पर पहले भी चिंता जताई जा चुकी है। झील में पोषक तत्वों की बढ़ती मात्रा और जलीय वनस्पति के फैलाव को इसकी सेहत के लिए चुनौती माना गया है।
धार्मिक विद्वानों का कहना है कि कुब्जा पवेलियन में कुल्लू दशहरा की तर्ज पर प्रदेशभर के देवी-देवताओं को आमंत्रित कर देव संस्कृति को केंद्र में लाया जाए। पंडित नितीश भारद्वाज, पंडित गणेश दत्त और पंडित हरिदास भारद्वाज सहित कई प्रबुद्ध लोग मेले के स्वरूप में बदलाव की मांग उठा चुके हैं।
सवाल अब यह है कि श्री रेणुका जी का अंतरराष्ट्रीय धार्मिक मेला आस्था का केंद्र बनेगा या कमर्शियल गतिविधियों और वीआईपी व्यवस्था की पहचान से बाहर निकल पाएगा।