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ऋषि पंचमी 2026: सुबह 10:50 बजे शुरू होगा पूजा मुहूर्त, जानें सप्तऋषि पूजन की संपूर्ण विधि

हिमाचलनाउ डेस्क • 4 Hours Ago • 1 Min Read

ऋषि पंचमी का व्रत 15 सितंबर 2026 को रखा जाएगा। इस दिन सप्तऋषियों और देवी अरुंधती की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 10:50 बजे से दोपहर 1:18 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महिलाएं आत्म-शुद्धि, भूल-चूक से जुड़े दोषों की निवृत्ति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से यह व्रत रखती हैं। यह पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है।

ऋषि पंचमी 2026

पंचमी तिथि 15 सितंबर को सुबह 7:44 बजे शुरू होगी और 16 सितंबर को सुबह 8:59 बजे समाप्त होगी। ऋषि पंचमी पर गंगा स्नान का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, इस दिन कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ ऋषि की पूजा की जाती है। इनके साथ देवी अरुंधती का पूजन भी किया जाता है।

ऋषि पंचमी की पूजा विधि

व्रत के दिन सुबह शीघ्र उठकर स्नान करने के बाद व्रत और पूजन का संकल्प लें। घर के किसी स्वच्छ स्थान पर हल्दी, कुमकुम और रोली से चौकोर मंडल बनाएं। इस मंडल पर सप्तऋषियों और देवी अरुंधती की प्रतिमा स्थापित करें। कुछ स्थानों पर दीवार या भूमि पर हल्दी से तारों के साथ सप्तऋषियों की आकृति बनाने की परंपरा भी है। इसके बाद गंध, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित कर विधिपूर्वक पूजन करें।

पूजा के दौरान मंत्रोच्चार के साथ सप्तऋषियों को अर्घ्य, फल, फूल और अन्य नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद अनजाने में हुई भूल या गलती के लिए क्षमा प्रार्थना की जाती है। पूजन पूरा होने पर ऋषि पंचमी की आरती करें और प्रसाद वितरित करें। धार्मिक परंपरा के अनुसार, इस व्रत में हल से जोते गए खेत का अन्न ग्रहण नहीं किया जाता। व्रती बिना बोई भूमि से उत्पन्न शाक, नीवार या समां के चावल का सेवन करते हैं।

व्रत से जुड़े नियम और उद्यापन

देश के कई क्षेत्रों में महिलाएं भाई की ओर से दिए गए चावल कौवों आदि को अर्पित करने के बाद व्रत खोलती हैं। इस परंपरा को पंचताड़ी तृण कहा जाता है। मान्यता के अनुसार, ऋषि पंचमी का व्रत लगातार सात वर्षों तक रखने के बाद आठवें वर्ष में इसका उद्यापन किया जाता है। यहां दी गई जानकारी धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित है।

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