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सराहां में मेले के नाम पर बस अड्डा ही झूलों के हवाले, यात्री परेशान

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 59 Mins Ago • 1 Min Read

कमर्शियल गतिविधि के लिए बस अड्डा देने पर उठे सवाल, एचआरटीसी को नहीं मिला किराया; यात्रियों को 1 से 2 किलोमीटर पैदल चलकर पकड़नी पड़ रही बस

सराहां

सराहां के ऐतिहासिक वामन द्वादशी मेले में इस बार भी व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। जनसुविधा के लिए बनाए गए एकमात्र बस अड्डे को ही मेले में झूले लगाने के लिए दिए जाने से यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। आलम यह है कि बस पकड़ने के लिए लोगों को एक से दो किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ रहा है। बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और सामान लेकर सफर करने वाले यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है।

मेले में झूले लगे, लेकिन बस अड्डा यात्रियों से दूर हो गया

स्थानीय लोगों का आरोप है कि मेला प्रबंधन ने बस अड्डे की जगह को व्यावसायिक गतिविधि के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी, जबकि इसी स्थान पर हर वर्ष बसों का संचालन होता है। बस अड्डा खाली होने के कारण यात्रियों को अलग-अलग स्थानों से बसें पकड़नी पड़ रही हैं। इससे न केवल यात्रियों को परेशानी हो रही है, बल्कि बस चालकों को भी संचालन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बस अड्डे की जमीन का इस्तेमाल कमर्शियल गतिविधि के लिए किया जा रहा है तो इसकी एवज में एचआरटीसी को कितना पैसा मिला? स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें जानकारी के अनुसार एचआरटीसी को इस व्यावसायिक इस्तेमाल के बदले कोई राशि नहीं दी गई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर सार्वजनिक सुविधा की इस संपत्ति को किस आधार पर और किन शर्तों पर झूलों के लिए दिया गया?

पिछले साल विरोध के बावजूद फिर वही व्यवस्था

हैरानी की बात यह है कि पिछले वर्ष भी मेले के दौरान बस अड्डे को व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किए जाने का विरोध हुआ था। लोगों ने यात्रियों की परेशानी का हवाला देते हुए प्रशासन से व्यवस्था बदलने की मांग की थी। इसके बावजूद इस वर्ष फिर वही स्थिति पैदा हो गई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मेला कुछ दिनों का आयोजन है, लेकिन बस अड्डा पूरे क्षेत्र के लोगों की रोजमर्रा की सार्वजनिक सुविधा से जुड़ा है। ऐसे में मेले के दौरान अस्थायी कमर्शियल गतिविधि को प्राथमिकता देकर यात्रियों की सुविधा को पीछे रखना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

90 हजार की जलेबियों के विवाद के बाद अब बस अड्डे पर सवाल

सराहां मेले की व्यवस्थाओं को लेकर विवाद कोई नया नहीं है। पूर्व में मेले में करीब 90 हजार रुपये की जलेबियां खिलाने का मामला भी सदन में चर्चा और विवाद का विषय बन चुका है। अब बस अड्डे को झूलों के लिए दिए जाने से मेला प्रबंधन की व्यवस्थाओं को लेकर एक और सवाल खड़ा हो गया है।

स्थानीय लोगों का सीधा सवाल है कि क्या मेले में कमर्शियल गतिविधियों और ठेकेदार के हितों को यात्रियों की सुविधा से ऊपर रखा गया है? यदि बस अड्डा किसी ठेकेदार को व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए दिया गया है तो इसकी प्रक्रिया, अनुमति और शुल्क की जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही?

लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि बस अड्डे को तत्काल यात्रियों और बसों के लिए बहाल किया जाए तथा यह भी स्पष्ट किया जाए कि सार्वजनिक बस अड्डे को व्यावसायिक गतिविधि के लिए किस नियम के तहत दिया गया और इसके बदले एचआरटीसी अथवा संबंधित विभाग को कितनी राशि प्राप्त हुई।

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