HNN/ नाहन
शक्ति साधना का सबसे महत्वपूर्ण पर्व नवरात्रि को सनातन धर्म में बेहद पवित्र पर्व माना गया है। हिंदू धर्म में वैसे तो सालभर में चार बार नवरात्रि मनाई जाती है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि के अलावा दो गुप्त नवरात्रि भी पड़ती हैं। लेकिन शारदीय नवरात्रि का अलग ही महत्व होता है। पंचांग के अनुसार, अश्विन मास में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शारदीय नवरात्रि आरंभ हो जाती हैं।
नवरात्रि के पूरे नौ दिनों तक मां आदिशक्ति के नौ स्वरूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री देवी की पूजा की जाती है। मान्यता है कि नवरात्रि के नौ दिनों में माता रानी धरती लोक पर विचरण करती हैं। साथ ही अपने भक्तों के कष्टों को हरकर उनकी मनोकामनाओं को पूर्ण करती हैं। मनोकामना पूर्ति के लिए नवरात्रि के दिन बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
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कब से शुरू हो रही शारदीय नवरात्रि ?
इस साल शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 26 सितंबर से हो रही है जो कि 05 अक्टूबर 2022 तक मनाई जाएगी। शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिन घरों में कलश स्थापित किए जाते हैं। लोग व्रत रखते हैं और माता रानी की विधि पूर्वक पूजा करते हैं।
कलश स्थापना विधि
शारदीय नवरात्रि के पहले दिन सुबह उठकर स्नान आदि करके साफ वस्त्र पहनें। फिर मंदिर की साफ-सफाई करके गंगाजल छिड़कें। इसके बाद लाल कपड़ा बिछाकर उस पर थोड़े चावल रखें। मिट्टी के एक पात्र में जौ बो दें। साथ ही इस पात्र पर जल से भरा हुआ कलश स्थापित करें। कलश में चारों ओर आम या अशोक के पत्ते लगाएं और स्वास्तिक बनाएं। फिर इसमें साबुत सुपारी, सिक्का और अक्षत डालें। फिर एक नारियल पर चुनरी लपेटकर कलावा से बांधें और इस नारियल को कलश के ऊपर पर रखते हुए मां जगदंबे का आहवाहन करें। फिर दीप जलाकर कलश की पूजा करें।
शारदीय नवरात्रि पूजा का समय
प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ- सितम्बर 26, 2022 को सुबह 03 बजकर 23 मिनट से शुरू
प्रतिपदा तिथि समाप्त – सितम्बर 27, 2022 को सुबह 03 बजकर 08 मिनट पर खत्म
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