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शिमला में हाईकोर्ट के फर्जी आदेश से धोखाधड़ी की कोशिश, दो के खिलाफ केस दर्ज, जांच जारी

PRIYANKA THAKUR • 1 Hour Ago • 1 Min Read

Himachalnow / शिमला

शिमला में उच्च न्यायालय के फर्जी आदेश तैयार कर धोखाधड़ी करने के प्रयास का मामला सामने आया है, जिसमें प्रारंभिक जांच के दौरान दस्तावेजों में कई विसंगतियां पाई गई हैं। शिकायत के आधार पर पुलिस ने बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और संभावित आरोपियों की भूमिका तथा उद्देश्य की पड़ताल की जा रही है।

शिमला

मामले का खुलासा कैसे हुआ
यह मामला उस समय सामने आया जब सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत उत्तराखंड निवासी एक व्यक्ति द्वारा उच्च न्यायालय से एक निर्णय की सत्यता को लेकर जानकारी मांगी गई। संबंधित पत्र में 15 दिसंबर 2025 के एक निर्णय का उल्लेख किया गया था, जिसे सिविल रिट याचिका संख्या 147/2025 में पारित बताया गया था, जिसके बाद न्यायालय स्तर पर अभिलेखों की जांच की गई।

रिकॉर्ड जांच में सामने आई विसंगतियां
अभिलेखों के अवलोकन के दौरान पाया गया कि उक्त सिविल रिट याचिका वास्तव में अन्य पक्षकारों के बीच थी और इसका निर्णय 4 जनवरी 2025 को अलग पीठ द्वारा किया गया था। प्रस्तुत दस्तावेजों में दी गई जानकारी वास्तविक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती थी, वहीं दस्तावेज का प्रारूप भी न्यायालय में प्रचलित प्रारूप से भिन्न पाया गया, जिससे दस्तावेज की सत्यता पर संदेह हुआ।

शिकायत और पुलिस कार्रवाई
मामले की पुष्टि होने के बाद प्रदेश उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल की ओर से एसपी शिमला को लिखित शिकायत दी गई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने थाना सदर में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(2), 336(3), 336(4), 340(2) और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया और जांच प्रक्रिया शुरू की।

जांच की स्थिति
एसएसपी शिमला गौरव सिंह ने बताया कि मामले में दो व्यक्तियों की संलिप्तता की आशंका है और इसको लेकर सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से किस प्रकार का लाभ लेने का प्रयास किया गया था और इसके पीछे किन-किन व्यक्तियों की भूमिका हो सकती है।