शिमला के गुड़िया दुष्कर्म और निर्मम हत्या मामले में 2017 में पुलिस हिरासत के दौरान आरोपी सूरज की मौत के लिए दोषी ठहराए गए आठ पुलिस अधिकारियों को आज चंडीगढ़ स्थित सीबीआई अदालत सजा सुनाने जा रही है।
दोषी ठहराए गए अधिकारी:
- तत्कालीन आईजी जहूर हैदर जैदी
- डीएसपी मनोज जोशी
- एएसआई राजेंद्र सिंह और दीपचंद शर्मा
- ऑनरेरी हेड कांस्टेबल मोहन लाल, सूरज सिंह, रफी मोहम्मद
- कांस्टेबल रत स्टेटा
हालांकि, शिमला के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक डीडब्ल्यू नेगी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया था।
घटना का विवरण:
- 4 जुलाई 2017 को, शिमला जिले के कोटखाई में 16 वर्षीय छात्रा का शव महासू के दादी जंगल में संदिग्ध परिस्थितियों में मिला।
- जनता के भारी दबाव और प्रदर्शनों के कारण तत्कालीन आईजी जहूर जैदी के नेतृत्व में एसआईटी गठित की गई।
- एसआईटी ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें नेपाल मूल का युवक सूरज भी शामिल था।
- 18 जुलाई 2017 को आरोपी सूरज की कोटखाई थाने में पुलिस हिरासत में मौत हो गई।
सीबीआई की जांच और खुलासे:
- हिमाचल प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने के बाद मामला सीबीआई को सौंपा गया।
- जांच में यह सामने आया कि सूरज की मौत पुलिस प्रताड़ना के कारण हुई थी।
- मार्च 2018 में सीबीआई ने मामले के दूसरे आरोपी नीलू चिरानी को गिरफ्तार किया, जिसे 2021 में अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई।
अनसुलझे सवाल:
हालांकि, सूरज को आरोपी बताया गया था, लेकिन साक्ष्यों की कमी के कारण यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि असल दोषी वही था या अपराध में अन्य दरिंदे आज भी बेखौफ घूम रहे हैं।
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घटना का असर:
इस मामले ने हिमाचल प्रदेश और पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। पुलिस की कार्यप्रणाली और मामले की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हुए। अब, सीबीआई अदालत के फैसले पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
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