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शिमला हाईकोर्ट ने नौ याचिकाएं खारिज कर लगाए 90 हजार रुपये जुर्माने, अवमानना कार्रवाई के निर्देश

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 1 Hour Ago • 1 Min Read

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक याचिकाकर्ता द्वारा दायर नौ अलग-अलग याचिकाओं को खारिज करते हुए कुल 90 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। न्यायालय ने मामले में न्यायिक अधिकारियों के संबंध में लगाए गए आरोपों पर आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के निर्देश भी दिए हैं।

शिमला

नौ याचिकाओं पर अलग-अलग जुर्माना

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश राकेश कैंथला की अदालत ने याचिकाकर्ता द्वारा दायर नौ अलग-अलग याचिकाओं को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया। अदालत ने प्रत्येक याचिका पर 10 हजार रुपये के हिसाब से कुल 90 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। न्यायालय ने आदेश दिया कि यह राशि चार सप्ताह के भीतर चीफ जस्टिस डिजास्टर रिलीफ फंड में जमा करवाई जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाओं में उठाए गए तथ्यों और आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सामग्री प्रस्तुत नहीं की गई थी।

सेवा विवाद से जुड़ा है मामला

अदालती रिकॉर्ड के अनुसार यह मामला शिमला के एक निजी विद्यालय में शिक्षण पद से जुड़े सेवा विवाद और उससे संबंधित अन्य कार्यवाहियों से जुड़ा है। याचिकाकर्ता को दिसंबर 2019 में निलंबित किया गया था और बाद में दिसंबर 2021 में सेवा से पृथक कर दिया गया। इसके बाद विभिन्न स्तरों पर कई शिकायतें और याचिकाएं दायर की गईं। रिकॉर्ड के अनुसार इन मामलों में अलग-अलग मंचों पर राहत मांगी गई, लेकिन अदालत ने उपलब्ध तथ्यों के आधार पर याचिकाओं को स्वीकार करने योग्य नहीं माना।

अदालत ने कानूनी प्रक्रिया पर दिया जोर

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि मजिस्ट्रेट से प्राथमिकी दर्ज करने संबंधी आदेश मांगने से पहले संबंधित थाना प्रभारी और उसके बाद पुलिस अधीक्षक के समक्ष शिकायत प्रस्तुत करना आवश्यक कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। अदालत ने अपने आदेश में इस क्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना सीधे मजिस्ट्रेट के समक्ष जाना विधिसम्मत नहीं माना जा सकता। न्यायालय ने यह भी कहा कि आपराधिक प्रक्रिया से जुड़े मामलों में उपलब्ध वैधानिक उपायों का पालन करना आवश्यक है।

न्यायिक अधिकारियों से जुड़े आरोपों पर टिप्पणी

अदालत ने पाया कि कुछ याचिकाओं में निचली अदालतों के न्यायिक अधिकारियों को भी पक्षकार बनाया गया था तथा उनके संबंध में आरोप लगाए गए थे। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि न्यायिक अधिकारियों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों के समर्थन में पर्याप्त आधार प्रस्तुत नहीं किया गया। अदालत ने यह भी दर्ज किया कि ऐसे आरोपों के लिए ठोस तथ्य, दस्तावेज और कानूनी आधार आवश्यक होते हैं, जिनका अभाव इस मामले में दिखाई दिया। न्यायालय ने इस पहलू को गंभीरता से लेते हुए याचिकाओं की सामग्री का परीक्षण किया।

अवमानना कार्यवाही शुरू करने के निर्देश

हाईकोर्ट ने मामले के तथ्यों पर विचार करते हुए इसे प्रथम दृष्टया आपराधिक अवमानना से संबंधित विषय माना। अदालत ने संबंधित रिकॉर्ड को आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए मुख्य रोस्टर पीठ के समक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों के संबंध में बिना पर्याप्त आधार के लगाए गए आरोप न्यायिक प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं, इसलिए इस पहलू पर अलग से विचार किया जाएगा।

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