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सिरमौर में 1000 पुरुषों पर 923 महिलाएं, पीसी-पीएनडीटी अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर

PRIYANKA THAKUR • 3 Apr 2026 • 1 Min Read

Himachalnow / नाहन

जिला सिरमौर में लिंग अनुपात को लेकर आयोजित बैठक में पीसी-पीएनडीटी अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने लिंग चयन पर रोक और अल्ट्रासाउंड केंद्रों की निगरानी को लेकर विस्तृत समीक्षा की।

नाहन

जिला सिरमौर में व्यस्क लिंग अनुपात 1000 पुरुषों के मुकाबले 923 महिलाएं दर्ज किया गया है, जबकि जन्म के समय लिंग अनुपात 925 है। यह जानकारी वीरवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय नाहन में आयोजित गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम (पीसी-पीएनडीटी) के सफल क्रियान्वयन के लिए गठित जिला सलाहकार समिति की बैठक में दी गई।बैठक की अध्यक्षता मुख्य चिकित्सा अधिकारी सिरमौर डॉ. राकेश प्रताप ने की। इस दौरान अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन, अल्ट्रासाउंड केंद्रों की निगरानी तथा लिंग चयन रोकने से जुड़े प्रावधानों की विस्तार से समीक्षा की गई।

डॉ. राकेश प्रताप ने बताया कि पीसी-पीएनडीटी अधिनियम का मुख्य उद्देश्य गर्भधारण से पहले या बाद में लिंग चयन तकनीकों के दुरुपयोग को रोकना तथा कन्या भ्रूण हत्या पर प्रभावी अंकुश लगाना है। उन्होंने कहा कि अल्ट्रासाउंड या किसी भी अन्य तकनीक के माध्यम से भ्रूण के लिंग की पहचान करना पूरी तरह प्रतिबंधित है और इस प्रकार की गतिविधियों पर अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।उन्होंने बताया कि जिला सिरमौर में वर्तमान में 24 अल्ट्रासाउंड क्लीनिक क्रियाशील हैं, जिनमें 8 सरकारी और 16 निजी क्षेत्र में संचालित हो रहे हैं। वर्ष 2025 के दौरान जिला में 42 बार अल्ट्रासाउंड केंद्रों का निरीक्षण किया गया, जहां अधिनियम के तहत निर्धारित मानकों की जांच की गई।

बैठक में अधिकारियों और कर्मचारियों को अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी भी दी गई। साथ ही यह भी बताया गया कि सभी अल्ट्रासाउंड केंद्रों के लिए इस अधिनियम के तहत पंजीकरण करवाना अनिवार्य है और नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।बैठक के दौरान सरकार की विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं की भी जानकारी साझा की गई। बताया गया कि जिन पंचायतों में लिंग अनुपात बेहतर रहता है, उन्हें सरकार की ओर से 5 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसके अलावा इंदिरा गांधी बालिका सुरक्षा योजना के तहत एक बेटी के जन्म के बाद स्थायी परिवार नियोजन अपनाने पर 35 हजार रुपये तथा दो बेटियों के जन्म के बाद स्थायी परिवार नियोजन करने पर 25 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है।बैठक में जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. निसार अहमद, जिला न्यायवादी चंपा सुरिल, डॉ. अमोद, डॉ. दिनेश, डॉ. ईशान शर्मा सहित समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।