सोलन में पत्नी हत्या मामले में अदालत का फैसला, आरोपी पति को उम्रकैद और जुर्माना
Himachalnow / सोलन
सोलन की अदालत ने पत्नी की हत्या के मामले में आरोपी पति को दोषी करार देते हुए आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है और जुर्माना अदा न करने की स्थिति में अतिरिक्त साधारण कारावास का प्रावधान भी निर्धारित किया है।
सोलन
अदालत का फैसला
जिला सोलन की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश-द्वितीय, विवेक खनाल की अदालत ने पत्नी की हत्या के मामले में आरोपी संदीप कुमार को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी ठहराया है। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपी को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही आरोपी पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जिसे निर्धारित समय में जमा न करने पर एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
मामले का विवरण
लोक अभियोजक चंद्र सागर नेगी के अनुसार, आरोपी संदीप कुमार का विवाह वर्ष 2021 में शिकायतकर्ता देव नाथ की पुत्री काजल के साथ हुआ था। विवाह के बाद से ही आरोपी द्वारा शराब के प्रभाव में पत्नी के साथ मारपीट करने की घटनाएं सामने आती रहीं। जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि आरोपी के पड़ोस में रहने वाली एक अन्य युवती से संबंधों के चलते दंपत्ति के बीच विवाद बढ़ गया था। 3/4 दिसंबर 2021 की मध्यरात्रि को आरोपी ने अपनी पत्नी के साथ गंभीर मारपीट की और बाद में गला दबाकर उसकी हत्या कर दी, जिसके पश्चात वह मौके से फरार हो गया।
शिकायत और पुलिस कार्रवाई
घटना के अगले दिन मृतका के पिता द्वारा थाना परवाणू में शिकायत दर्ज करवाई गई, जिसके आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच प्रक्रिया शुरू की। जांच के दौरान घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र किए गए, संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज किए गए और मामले की कड़ियों को जोड़ते हुए आरोपी के खिलाफ पर्याप्त प्रमाण जुटाए गए। इस पूरी जांच प्रक्रिया का नेतृत्व सब-इंस्पेक्टर भगत राम द्वारा किया गया, जिन्होंने मामले का आरोप पत्र तैयार कर अदालत में प्रस्तुत किया।
सुनवाई और साक्ष्य
अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा कुल 19 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए, जिनमें घटनाक्रम से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों और परिस्थितियों को प्रस्तुत किया गया। दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी पाया। न्यायालय ने साक्ष्यों की पुष्टि के आधार पर सजा निर्धारित करते हुए मामले का निर्णय सुनाया।