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4 अगस्त को सजेगा प्रसिद्ध स्त्रोण (शनोल) देवता मेला, कुश्ती दंगल रहेगा मुख्य आकर्षण

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 44 Mins Ago • 1 Min Read

4 अगस्त को कुप्फर-जोहड़ (शनोल) में प्रसिद्ध स्त्रोण (शनोल) देवता मेले का आयोजन धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ किया जाएगा। मेले में पारंपरिक पूजा-अर्चना, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और कुश्ती दंगल का आयोजन होगा। आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं, खिलाड़ियों और व्यापारियों से निर्धारित समय पर मेले में भाग लेने की अपील की है।

राजगढ़

चूड़ेश्वर पर्वत की तलहटी में स्थित कुप्फर-जोहड़ (शनोल) में क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्त्रोण (शनोल) देवता मेले का आयोजन इस वर्ष 4 अगस्त को श्रद्धा एवं उत्साह के साथ किया जाएगा। मेले की तैयारियां अंतिम चरण में हैं और आयोजन समिति ने क्षेत्रवासियों व श्रद्धालुओं से बड़ी संख्या में मेले में पहुंचने की अपील की है।मेला समिति के अनुसार कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 11 बजे मुख्य अतिथि द्वारा किया जाएगा। दिनभर धार्मिक अनुष्ठानों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तथा पारंपरिक गतिविधियों का आयोजन होगा।

कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 8:30 बजे स्त्रोण देवता की पारंपरिक पूजा-अर्चना से होगी। इसके बाद 9:30 बजे ब्राह्मणों द्वारा हवन-पूजन कराया जाएगा, जिसमें श्रद्धालु भी भाग ले सकेंगे। 10 बजे देवता का भव्य स्वागत किया जाएगा, जबकि 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक स्थानीय कलाकार सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे।मेले का प्रमुख आकर्षण पारंपरिक कुश्ती दंगल रहेगा। आयोजन समिति के अनुसार हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश के नामी पहलवान दंगल में भाग लेंगे। सायं 5:30 बजे होने वाली अंतिम (माली) कुश्ती के विजेता को 51 हजार रुपये की सम्मान राशि प्रदान की जाएगी।
मेला समिति ने आयोजन को स्वच्छ एवं शांतिपूर्ण बनाए रखने की अपील करते हुए बताया कि मेले में शराब पीने और बेचने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। सभी दुकानदारों के लिए अपने साथ कूड़ादान लाना अनिवार्य किया गया है, ताकि मेले की स्वच्छता बनी रहे।

समिति ने दुकान लगाने के इच्छुक व्यापारियों से 2 अगस्त प्रातः 10 बजे तक मेला समिति से संपर्क करने का आग्रह किया है। प्लॉटों का आवंटन ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर किया जाएगा। वहीं पहलवानों को दोपहर 12 बजे तक अपनी एंट्री सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, अन्यथा उन्हें क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल में प्रवेश नहीं मिलेगा।मेला आयोजन समिति ने क्षेत्र के श्रद्धालुओं, खेल प्रेमियों और आसपास के ग्रामीणों से इस ऐतिहासिक एवं धार्मिक मेले में पहुंचकर आयोजन की गरिमा बढ़ाने तथा स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को सहेजने की अपील की है।