JNV : जवाहर नवोदय विद्यालय रिकांग पिओ में शैक्षणिक सत्र 2025 के लिए ग्यारहवीं कक्षा (कला) में एक रिक्त स्थान हेतु मेरिट के आधार पर ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन मांगे गए हैं । आवेदन की अंतिम तिथि 10 अगस्त 2025 निर्धारित की गई है।
रिकांग पिओ
आवेदन पात्रता और योग्यता प्रभारी प्राचार्य शशी कांता कुमारी ने बताया कि इस रिक्त स्थान के लिए सभी वर्गों के अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने वाले विद्यार्थियों की जन्मतिथि 01 जून 2008 से 31 जुलाई 2010 के बीच होनी चाहिए। दसवीं कक्षा में कम से कम 60 प्रतिशत अंक प्राप्त करना और 2025 में कक्षा दसवीं उत्तीर्ण करना अनिवार्य है।
चयन प्रक्रिया और प्राथमिकता चयन प्रक्रिया में सीबीएसई बोर्ड के विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी। मेरिट सूची दसवीं कक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर तैयार होगी।
आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन आवेदन पत्र विद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट www.navodya.gov.in से डाउनलोड किए जा सकते हैं। ऑफलाइन आवेदन पत्र जवाहर नवोदय विद्यालय रिकांग पिओ से भी प्राप्त किए जा सकते हैं।
करियर अकादमी के छात्रों ने JEE MAINS में सफलता का परचम लहराया
JEE MAINS जनवरी सत्र-01 का परिणाम 11 फरवरी 2025 को घोषित किया गया। करियर अकादमी के 30 छात्रों ने 80%ile से अधिक अंक प्राप्त कर अकादमी का नाम रोशन किया।
उच्चतम प्रतिशत स्कोर करने वाले छात्र
प्रणव तोमर ने 98.60%ile, अभ्युदय बंसल 98.29%ile, शौर्य राघव 98.17%ile, दिव्यांश अग्रवाल 98.04%ile प्राप्त किए।
अन्य सफल छात्र
इसके अलावा अनुभव 97.82%, अयान चौहान 97.03%, यशवर्धन सोलंकी 96.6%, अक्षज गर्ग 95.24%, नव्या 94.53%, काजल शर्मा 93.20%, लिबा अंसारी 93.11%, केशव गुप्ता 92.62%, नंदिनी ठाकुर 90.64%, अर्पित प्राशर 88.04%, रक्षिता 87.60%, आयुष भारद्वाज 86.83%, विनायक तोमर 85.48%, अभिनव 85.48% आदि छात्रों ने करियर अकादमी नाहन का नाम गौरवान्वित किया।
करियर अकादमी का योगदान
करियर अकादमी पिछले 22 वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान प्रदान कर रही है। छात्रों ने अपनी सफलता का श्रेय करियर अकादमी के मनोज राठी और अध्यापकों को तथा अपने माता-पिता को दिया।
शिक्षा संस्थान के नेतृत्व की शुभकामनाएँ
करियर अकादमी की निदेशक मधुलिका राठी, चेयरमैन एस.एस. राठी, प्रधानाचार्य राजेश सोलंकी और मनोज राठी ने सभी सफल विद्यार्थियों को बधाई दी और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।
21 और 27 जनवरी को आयोजित होगी स्थगित परीक्षा , नोटिस जारी
राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने 15 जनवरी 2025 को स्थगित हुई UGC-NET परीक्षा के लिए नई तिथियों की घोषणा कर दी है। यह परीक्षा अब 21 और 27 जनवरी 2025 को आयोजित की जाएगी। परीक्षा को पहले पोंगल, मकर संक्रांति और अन्य प्रमुख त्योहारों के कारण स्थगित करना पड़ा था। उम्मीदवार अब संशोधित शेड्यूल के अनुसार परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। संशोधित एडमिट कार्ड जल्द ही आधिकारिक वेबसाइट ugcnet.nta.ac.in पर उपलब्ध होंगे।
परीक्षा स्थगित होने का कारण
15 जनवरी 2025 को होने वाली परीक्षा को स्थगित करने का निर्णय त्योहारों के कारण लिया गया। 13 जनवरी 2025 को NTA ने एक आधिकारिक नोटिस जारी किया था, जिसमें पोंगल, मकर संक्रांति और अन्य त्योहारों के चलते विद्यार्थियों की व्यस्तता को देखते हुए परीक्षा स्थगित करने की जानकारी दी गई थी।
नई तिथियां और समय
नई तिथियों के अनुसार:
21 जनवरी 2025: सुबह की पाली (9:00 AM से 12:00 PM)
भारतीय ज्ञान प्रणाली
मलयालम
उर्दू
श्रम कल्याण/मानव संसाधन प्रबंधन
अपराध विज्ञान
आदिवासी और क्षेत्रीय भाषा/साहित्य
लोक साहित्य
कोंकणी
पर्यावरण विज्ञान
27 जनवरी 2025: शाम की पाली (3:00 PM से 6:00 PM)
संस्कृत
जनसंचार और पत्रकारिता
जापानी
प्रदर्शन कला (नृत्य/नाटक/रंगमंच)
इलेक्ट्रॉनिक विज्ञान
महिला अध्ययन
कानून
नेपाली
एडमिट कार्ड कैसे डाउनलोड करें
NTA जल्द ही नए एडमिट कार्ड जारी करेगा। उम्मीदवार इन्हें आधिकारिक वेबसाइट ugcnet.nta.ac.in से डाउनलोड कर सकते हैं। इसके लिए:
वेबसाइट पर जाएं।
“UGC NET Admit Card” लिंक पर क्लिक करें।
अपने लॉगिन क्रेडेंशियल्स दर्ज करें।
एडमिट कार्ड डाउनलोड करें और सभी जानकारी ध्यानपूर्वक जांचें।
हिमाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार आगामी वर्ष से उत्कृष्ट स्कूली विद्यार्थियों को एक्सपोजर विजिट के लिए विदेश भेजेगी। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश में गुणात्मक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए निरंतर सुधारात्मक कदम उठा रही है। शिक्षकों के साथ-साथ विद्यार्थियों के लिए भी एक्सपोजर विजिट को प्राथमिकता दी जा रही है।
शिक्षा मंत्री मंगलवार को ऊना जिले के अंब उपमंडल के तहत राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला भरवाईं में आयोजित वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। इस अवसर पर चिंतपूर्णी के विधायक सुदर्शन सिंह बबलू और हिमाचल सरकार के महाधिवक्ता अनूप रत्न विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि वर्तमान में 200 से अधिक शिक्षकों को एक्सपोजर विजिट के लिए विदेश भेजा गया है। अब यह सुविधा विद्यार्थियों को भी प्रदान की जाएगी ताकि उन्हें वैश्विक स्तर पर बेहतर शिक्षा और अनुभव प्राप्त हो सके। उन्होंने महाधिवक्ता अनूप रत्न द्वारा अपने गृह क्षेत्र के स्कूल भरवाईं को हिमाचल सरकार के अपना विद्यालय – हिमाचल स्कूल अडॉप्शन कार्यक्रम के तहत गोद लेने की पहल की खुले मन से तारीफ की। उन्होंने कहा कि रत्न का अपने क्षेत्र के लिए भावनात्मक जुड़ाव सबके लिए एक प्रेरणा है।
शिक्षा मंत्री ने भरवाईं स्कूल के खेल मैदान के शेष कार्य के लिए 25 लाख रुपये देने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि इसके लिए पहले भी 47 लाख रुपये दिए जा चुके हैं, लेकिन कार्य पूरा करने के लिए 25 लाख रुपये की अतिरिक्त धनराशि मुहैया कराई जाएगी। उन्होंने इसके अलावा स्कूल में स्नानागार निर्माण के लिए 5 लाख तथा स्कूल के पुराने भवन के रखरखाव व मरम्मत कार्यों के लिए 10 लाख रुपये देने की घोषणा की तथा स्कूल में जिम निर्माण को लेकर जिला प्रशासन को निर्देश दिए। उन्होंने स्कूल में अतिरिक्त कमरे व परीक्षा हॉल के निर्माण के लिए आगामी बजट में प्रावधान करने का आश्वासन दिया।
रोहित ठाकुर ने कहा कि चिंतपूर्णी क्षेत्र में शिक्षा क्षेत्र की मजबूती के लिए हर मांग को प्राथमिकता पर पूरा किया जाएगा। उन्होंने चिंतपूर्णी कॉलेज के लिए जमीन की औपचारिकताएं पूर्ण होते ही पैसे का प्रावधान करने का भरोसा दिलाया। शिक्षा मंत्री ने युवा मन के निर्माण के साथ देश को दिशा देने में अध्यापकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने सभी शिक्षकों से अपनी जिम्मेदारी समझने तथा उसे तत्परता से निभाने का आह्वान किया। उन्होंने अकादमिक क्षेत्र तथा खेलों व अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों में अव्वल रहे प्रतिभावान बच्चों को पुरस्कृत किया।
महाधिवक्ता अनूप रत्न ने भरवाईं स्कूल को गोद लिया, प्रदान की 5 लाख की सहयोग राशि
इस मौके पर अपने संबोधन में हिमाचल सरकार के महाधिवक्ता अनूप रत्न ने भरवाईं स्कूल को गोद लेने की घोषणा की। वे इसी स्कूल के छात्र रहे हैं। रत्न ने अपने माता-पिता के नाम पर तथा मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू की प्रेरणा से भरवाईं स्कूल के लिए अपनी ओर से 5 लाख रुपये की सहयोग राशि प्रदान की। उन्होंने शिक्षा मंत्री के माध्यम से उक्त धनराशि का चेक स्कूल प्रबंधन को सौंपा।
रत्न ने बताया कि 80 के दशक में उन्होंने इसी स्कूल से प्राथमिक से लेकर हाई स्कूल तक की पढ़ाई की थी। उन्होंने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू की सोच के अनुरूप, सरकार द्वारा आरंभ किए गए अपना विद्यालय – हिमाचल स्कूल अडॉप्शन कार्यक्रम के तहत भरवाईं स्कूल को गोद लिया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे हर तरह से स्कूल की मदद के लिए तत्पर रहेंगे। उन्होंने कहा कि अकादमिक क्षेत्र के साथ-साथ खेल गतिविधियों में भी भरवाईं स्कूल का हमेशा दबदबा रहा है। उन्होंने इसे और ऊंचे मुकाम पर ले जाने का आह्वान किया।
उन्होंने अभिभावकों को अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल की बजाय सरकारी स्कूल में पढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूल बच्चों के शैक्षणिक और सर्वांगीण विकास में सक्षम हैं।
उन्होंने कहा कि बच्चों के भविष्य निर्माण में अध्यापकों और अभिभावकों का मार्गदर्शन जीवनोपयोगी होता है। उन्होंने बच्चों से माता-पिता और शिक्षकों के निर्देशों का सम्मान करने और मोबाइल की लत व नशे से दूर रहने का आह्वान किया। समारोह में प्रधानाचार्य सुरिंद्र कुमार ने स्कूल की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने अकादमिक क्षेत्र तथा खेलों व अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों में स्कूल के शानदार प्रदर्शन से अवगत कराने के साथ ही स्कूल में ढांचागत सुधार व स्मार्ट कक्षाओं को लेकर किए कार्यों की जानकारी भी दी। वहीं, इस मौके समारोह में स्कूली बच्चों ने अपनी शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सबका मन मोह लिया।
समारोह में उपायुक्त जतिन लाल, एसडीएम अंब सचिन शर्मा, उप निदेशक उच्च शिक्षा राजेंद्र कौशल, उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा सोमपाल धीमान, कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता, पंचायती राज संस्थानों के प्रतिनिधि समेत, बच्चों के अभिभावक, स्थानीय लोग उपस्थित थे।
माता श्री चिंतपूर्णी जी मंदिर में नवाया शीश
इससे पहले शिक्षा मंत्री ने श्री छिन्नमस्तिका धाम माता श्री चिंतपूर्णी जी मंदिर में शीश नवाया। उन्होंने मंदिर में विधिवत पूजा अर्चना की और प्रदेश वासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। सुदर्शन सिंह बबलू, अनूप रत्न, जतिन लाल तथा सचिन शर्मा उनके साथ रहे। मंदिर प्रशासन ने मंत्री समेत सभी मेहमानों को माता की फोटो फ्रेम और प्रसादी चुनरी देकर सम्मानित किया।
हिमाचल प्रदेश में व्यावसायिक शिक्षा को एक नई ऊंचाई देने के लिए समग्र शिक्षा हिमाचल और डॉ. वाईएस परमार बागवानी और वानिकी विश्वविद्यालय ने एक ऐतिहासिक करार (एमओयू) किया है। इस साझेदारी के तहत, विश्वविद्यालय कृषि और संबंधित क्षेत्रों में व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त करने वाले स्कूली विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करेगा।
एमओयू के प्रमुख बिंदु:
कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में प्रशिक्षण।
व्यावहारिक शिक्षा के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग।
समग्र शिक्षा और नौणी विश्वविद्यालय के बीच करार (एमओयू)।
शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार और कौशल वृद्धि
इस अवसर पर राज्य परियोजना निदेशक राजेश शर्मा ने कहा कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप है। इस योजना का उद्देश्य शैक्षिक संस्थानों और उद्योगों के बीच समन्वय स्थापित करना और व्यावसायिक कौशल को बढ़ावा देना है।
योजना के लाभ:
व्यावहारिक कौशल को बढ़ावा मिलेगा।
कृषि और संबंधित क्षेत्रों में कॅरियर के अवसर खुलेंगे।
छात्रों को नवीनतम तकनीकों से सशक्त किया जाएगा।
कृषि को सम्मानजनक कॅरियर विकल्प के रूप में बढ़ावा देना
डॉ. राजेश्वर सिंह चंदेल, कुलपति, डॉ. वाईएस परमार विश्वविद्यालय ने इस पहल को कृषि क्षेत्र में एक सम्मानजनक कॅरियर के रूप में बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि हमारे समाज में कृषि को अक्सर निम्न समझा जाता है, लेकिन इस पहल से यह मानसिकता बदलने की कोशिश की जाएगी।
कृषि उद्यमिता के अवसर:
अधिकारियों ने कृषि क्षेत्र में अपार अवसरों की पहचान की।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कृषि में कॅरियर की संभावना को उजागर किया जाएगा।
नौणी विश्वविद्यालय द्वारा प्रशिक्षण और सुविधाएं
इस परियोजना के तहत, समग्र शिक्षा ने नौणी विश्वविद्यालय को 2.8 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की है। इस राशि से विश्वविद्यालय में 1800-2400 वर्ग फुट क्षेत्र में एक अत्याधुनिक इं incubator केंद्र स्थापित किया जाएगा।
इं incubator केंद्र में सुविधाएं:
आधुनिक कृषि उपकरण।
स्मार्ट क्लासरूम और प्रयोगशालाएं।
इंटर्नशिप कार्यक्रम और फील्ड विजिट्स।
विस्तार में प्रशिक्षण और वर्चुअल कार्यक्रम
इसके अतिरिक्त, नौणी विश्वविद्यालय 5000 स्कूली विद्यार्थियों को कृषि आधारित व्यावसायिक शिक्षा देगा, जो नौवीं से 12वीं कक्षा तक के छात्र होंगे। विद्यार्थियों को वर्चुअल प्रशिक्षण और कृषि विज्ञान केंद्रों में फील्ड विजिट भी कराई जाएगी।
समग्र शिक्षा की योजना का विस्तार:
स्कूलों में कृषि प्रशिक्षण के विस्तार की योजना।
हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों में फील्ड विजिट्स और वर्चुअल सत्र।
निष्कर्ष
यह पहल हिमाचल प्रदेश में व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव लाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी। इसके तहत, छात्र न केवल आधुनिक तकनीकों से सशक्त होंगे, बल्कि कृषि को एक सशक्त कॅरियर विकल्प के रूप में देखेंगे।
हिमाचल प्रदेश में पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को अंकों के आधार पर पास करने की योजना बनाई जा रही है। यह कदम शिक्षा गुणवत्ता में सुधार के लिए उठाया जा रहा है। आइए जानते हैं इस बदलाव के कारण और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
अंकों के आधार पर पास होने की नई नीति
हिमाचल प्रदेश सरकार अब पहली से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को अंकों के आधार पर पास करने की तैयारी कर रही है। शिक्षा विभाग ने इस दिशा में प्रस्ताव तैयार किया है, जिसका उद्देश्य शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों की जवाबदेही तय करना है। प्रस्ताव में यह भी सिफारिश की गई है कि वार्षिक असेसमेंट में पास नहीं होने वाले विद्यार्थियों को दो अतिरिक्त मौके दिए जाएं। यदि इसके बाद भी वे पास नहीं होते, तो उन्हें पुरानी कक्षा में ही पढ़ाने का निर्णय लिया जा सकता है।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम और इसकी चुनौतियां
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (Right to Education Act) के तहत, पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को फेल नहीं किया जाता था। हालांकि, हिमाचल सरकार इस अधिनियम के इस प्रावधान का विरोध करती रही है। सरकार का मानना है कि यह नीति शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट का कारण बन रही है। अब प्रदेश सरकार ने इसे बदलने का निर्णय लिया है और नो रिटेंशन पॉलिसी को समाप्त करने के लिए कदम उठाए हैं।
प्रस्ताव का उद्देश्य और विचार
समग्र शिक्षा अभियान के परियोजना निदेशक, राजेश शर्मा ने बताया कि यह प्रस्ताव प्राथमिक स्तर पर बच्चों की नींव को मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। उनका कहना है कि बिना पास और फेल के मूल्यांकन से बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि में कमी आ रही है और शिक्षकों की जवाबदेही भी कम हो गई है। इस व्यवस्था को सुधारने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। यदि कोई बच्चा पास होने योग्य अंक प्राप्त नहीं करता है, तो उसे दो और मौके देने का प्रस्ताव है। इसके बाद भी अगर वह परीक्षा में फेल होता है, तो उसे पुरानी कक्षा में पढ़ाया जाएगा।
विदेशों में प्राथमिक शिक्षा का अध्ययन
निदेशक राजेश शर्मा ने यह भी बताया कि विदेशों में प्राथमिक शिक्षा की प्रणाली का अध्ययन किया जा रहा है, ताकि हिमाचल प्रदेश के शिक्षा तंत्र को और बेहतर बनाया जा सके। उनका मानना है कि नो रिटेंशन पॉलिसी के कारण नवीं कक्षा में पहुंचने पर विद्यार्थियों के परिणाम खराब हो रहे हैं, जिससे बोर्ड कक्षाओं के परिणाम भी प्रभावित हो रहे हैं।
प्रस्ताव को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा
इस बदलाव को लेकर शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने समग्र शिक्षा अभियान के परियोजना निदेशक राजेश शर्मा को प्रस्ताव तैयार करने का कार्य सौंपा है। यह प्रस्ताव जल्द ही सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
हिमाचल प्रदेश सरकार अब शैक्षणिक संस्थाओं की रैंकिंग करेगी, जिससे उनके आत्म निरीक्षण और अंकेक्षण को सुनिश्चित किया जा सके। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस नई पहल की जानकारी दी और बताया कि बेहतर प्रदर्शन करने वाली संस्थाओं को परफॉर्मेंस बेस्ड ग्रांट मिलेगा।
रैंकिंग और ग्रांट की व्यवस्था
रैंकिंग का उद्देश्य: हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है, जो शैक्षणिक संस्थाओं की रैंकिंग करेगा। इस पहल का उद्देश्य शैक्षणिक संस्थाओं का आत्म निरीक्षण और अंकेक्षण करना है, जिससे उनकी कार्यप्रणाली और गुणवत्ता में सुधार हो सके।
परफॉर्मेंस आधारित ग्रांट: जिन शैक्षणिक संस्थाओं को बेहतर रैंकिंग प्राप्त होगी, उन्हें परफॉर्मेंस बेस्ड ग्रांट दी जाएगी। इससे इन संस्थाओं को अपने कार्यों को और प्रभावी तरीके से करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
शैक्षिक सुधार और नई पहल
ग्रेडिंग प्रणाली और पुस्तकालय: मुख्यमंत्री ने राजकीय स्नातक महाविद्यालयों और संस्कृत महाविद्यालयों के पुस्तकालयों की ग्रेडिंग जारी की। इस पहल से शैक्षिक संस्थाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और छात्रों को बेहतर अध्ययन सामग्री उपलब्ध होगी।
न्यूमेरिकल आधारित प्रणाली: सीएम सुक्खू ने बताया कि सभी सरकारी विभागों में अब वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) दर्ज करने के लिए न्यूमेरिकल आधारित प्रणाली अपनाई जाएगी। यह ऑनलाइन प्रणाली को सक्षम करने के लिए काम जारी है, जो कार्यक्षमता में वृद्धि करेगी।
बीते कल शिमला के पीटरहॉफ में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित प्रधानाचार्य सम्मेलन की अध्यक्षता की।
हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य है, जो विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं की रैंकिंग कर रहा है। इससे शैक्षणिक संस्थाओं का आत्म-निरीक्षण और अंकेक्षण सुनिश्चित होगा।
आधिकारिक शक्तियों का विकेंद्रीकरण: शिक्षा विभाग में डीसेंट्रलाइजेशन ऑफ पावर की योजना है, जिससे महाविद्यालयों के प्रधानाचार्य को वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियां दी जाएंगी। इसका उद्देश्य सुशासन और कार्यों की समयबद्धता सुनिश्चित करना है।
आर्थिक सहायता: महाविद्यालयों के प्रधानाचार्य को गरीब और जरूरतमंद छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करने की वित्तीय शक्तियां दी जाएंगी। इससे छात्रों को उनकी पढ़ाई में किसी प्रकार की आर्थिक कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
महत्वपूर्ण विकास योजनाएं
सशक्त महाविद्यालय और खेल परिसर: जिला मुख्यालय स्थित महाविद्यालयों को और सशक्त किया जाएगा, जबकि दूरदराज के महाविद्यालयों को आवश्यक सहायता दी जाएगी। इसके अलावा, प्रदेश सरकार सभी विधानसभा क्षेत्रों में एकीकृत खेल परिसर विकसित करेगी, ताकि छात्रों को खेल के क्षेत्र में भी समान अवसर मिले।
बीएड पाठ्यक्रम का विस्तार: प्रदेश सरकार उन महाविद्यालयों में बीएड पाठ्यक्रम शुरू करेगी, जहां आधारभूत ढांचा मौजूद है। इस पहल से छात्रों को शिक्षक प्रशिक्षण प्राप्त करने का और अधिक अवसर मिलेगा।
नई शिक्षा नीतियां और लाइब्रेरी का विकास
लाइब्रेरी खोलने की योजना: प्रदेश में पहले चरण में 493 लाइब्रेरी खोली जाएंगी, जिसमें 88 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह कदम छात्रों को गुणात्मक शिक्षा और नई तकनीक से अवगत कराने के लिए उठाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री का संकल्प: मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार गुणात्मक और तकनीकी शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है और छात्रों को बेहतर भविष्य के लिए तैयार करेगी।
शिक्षा क्षेत्र में सुधार और रिक्त पदों पर नियुक्तियां
टीचर्स के पदों पर नियुक्तियां: प्रदेश सरकार शिक्षा विभाग में टीचर्स के करीब 15,000 पद सृजित कर चुकी है, और इन्हें चरणबद्ध तरीके से भरा जा रहा है। यह पहला मौका है जब मंत्रिमंडल की बैठक में शिक्षा विभाग में 5800 पदों को भरने की स्वीकृति दी गई है।
शिक्षा मंत्री का बयान: शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने शिक्षा क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया और मुख्यमंत्री सुक्खू के नेतृत्व में किए गए सुधारों की सराहना की।
निष्कर्ष:
हिमाचल प्रदेश सरकार ने शैक्षणिक संस्थाओं की रैंकिंग और परफॉर्मेंस बेस्ड ग्रांट की योजना को लागू करके शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार लाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसके साथ ही राज्य में शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने के लिए कई नई योजनाओं और सुधारों की शुरुआत की गई है।
हिमाचल प्रदेश में 4 दिसंबर को परख सर्वे-24 का आयोजन किया जाएगा, जिसमें 1215 स्कूलों में बच्चों की सीखने की क्षमता का मूल्यांकन किया जाएगा। यह सर्वे समग्र शिक्षा द्वारा आयोजित किया जाएगा, और इसकी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा ने बताया कि यह सर्वे प्रदेश के विभिन्न स्कूलों में पारदर्शी तरीके से किया जाएगा, जिसमें रैंडम सैंपलिंग के माध्यम से 1215 स्कूलों का चयन किया गया है।
1215 स्कूलों में होगा सर्वे, शिक्षक नहीं होंगे उपस्थित
सर्वे में शिक्षकों की अनुपस्थिति
राजेश शर्मा ने बताया कि परख सर्वे स्कूलों के शिक्षकों के सामने नहीं किया जाएगा। इस सर्वे को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए 1367 डीएलएड प्रशिक्षु इनविजिलेटर के रूप में तैनात किए जाएंगे। इसके अलावा, सीबीएसई के 1215 सुपरवाइजर भी सर्वे के दौरान स्कूलों में तैनात रहेंगे। हर स्कूल में एक सुपरवाइजर होगा, जो सर्वे की प्रक्रिया की निगरानी करेगा।
बच्चों के लिए अलग-अलग विषयों में किया जाएगा मूल्यांकन
परख सर्वे में शामिल विषय
इस सर्वे में विभिन्न कक्षाओं के बच्चों का ज्ञान मूल्यांकन किया जाएगा। तीसरी से छठी कक्षा के बच्चों के लिए भाषा, गणित और विज्ञान (EVS) का मूल्यांकन होगा। वहीं, नौवीं कक्षा के छात्रों का भाषा, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों पर टेस्ट लिया जाएगा। यह सर्वे OMR शीट के माध्यम से किया जाएगा, और प्रत्येक क्लास से अधिकतम 30 बच्चों को इसमें शामिल किया जाएगा।
कम छात्रसंख्या वाली कक्षाओं को छोड़ा जाएगा
जिन कक्षाओं में बच्चों की संख्या 5 से कम होगी, उनका सर्वे नहीं किया जाएगा।
शिक्षा मंत्री द्वारा सर्वे की मॉनिटरिंग
शिक्षा मंत्री की निरंतर निगरानी
राजेश शर्मा ने बताया कि शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर परख सर्वे की तैयारियों की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। उन्होंने सरकारी और निजी स्कूलों के शिक्षकों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से इस सर्वे के बारे में चर्चा की है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि बच्चों की तैयारी को लेकर जीरो आवर भी लगाए जा रहे हैं, और विद्या समीक्षा केंद्र के पोर्टल पर सर्वे से संबंधित प्रश्नपत्र डाले गए हैं, जिनका अभ्यास स्कूलों में बच्चों को कराया जा रहा है।
मॉक टेस्ट से बच्चों की तैयारी
मॉक टेस्ट का आयोजन
समग्र शिक्षा निदेशक ने बताया कि बच्चों की तैयारी को लेकर तीन मॉक टेस्ट पहले ही आयोजित किए जा चुके हैं। पहले मॉक टेस्ट में 1.60 लाख छात्र शामिल हुए थे, दूसरे में 1.76 लाख और तीसरे टेस्ट में सरकारी और निजी स्कूलों के मिलाकर 3 लाख छात्रों ने भाग लिया। ये मॉक टेस्ट OMR शीट पर कराए गए थे, ताकि बच्चों की तैयारी और सटीकता को माप सकें।
बेहतर परिणाम की उम्मीद
शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार
राजेश शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार का ध्यान शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर केंद्रित है। पिछले दो वर्षों में प्रदेश में शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए बड़े कदम उठाए गए हैं, और इस बार इन प्रयासों का असर परख सर्वे-24 में दिखाई देगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि हिमाचल प्रदेश इस बार परख सर्वे में बेहतर प्रदर्शन करेगा, और बच्चों की सीखने की क्षमता में सुधार देखने को मिलेगा।
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने घोषणा की कि राज्य के कॉलेजों में अब शिक्षकों की नियुक्ति पीरियड आधार पर की जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी शिक्षक के अवकाश पर जाने पर भी पढ़ाई का कार्य सुचारू रूप से जारी रहे। इस प्रणाली से कॉलेजों में शिक्षण कार्य को निरंतर बनाए रखने में मदद मिलेगी।
उच्च शिक्षा के छात्रों का होगा डाटा संग्रहण
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य में कॉलेज स्तर पर उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं का डाटा संग्रहित किया जाएगा। कॉलेज प्रिंसिपल्स आवश्यकता पड़ने पर इन युवाओं से संपर्क कर उनके द्वारा पीरियड आधार पर शिक्षण सेवाएं ले सकेंगे। शिक्षा विभाग जल्द ही इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी करेगा।
नए शैक्षणिक सत्र में होंगे सकारात्मक बदलाव
सीएम ने यह कहा कि नए शैक्षणिक सत्र से स्कूलों में किए गए पढ़ाई के तरीकों में बदलाव के सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। अब यह बदलाव कॉलेजों में भी लागू किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, नए सत्र से कई कॉलेजों में बीएड कोर्स की शुरुआत की जाएगी।
कॉलेजों में पुस्तकालय, खेलकूद और अन्य गतिविधियों पर जोर
कॉलेजों के पुस्तकालयों की रैंकिंग
मुख्यमंत्री ने बताया कि कॉलेजों के पुस्तकालयों की रैंकिंग वहां पढ़ने वाले छात्रों की संख्या के आधार पर तय की जाएगी। इससे छात्रों को बेहतर संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।
खेलकूद और अतिरिक्त पाठ्यक्रम गतिविधियों पर ध्यान
सीएम ने यह भी कहा कि कॉलेजों में खेलकूद और अन्य अतिरिक्त पाठ्यक्रम गतिविधियों पर अधिक ध्यान दिया जाएगा, ताकि छात्रों का सर्वांगीण विकास हो सके।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने शिमला के डिग्री और संस्कृत कॉलेजों के प्रिंसिपल्स से बातचीत में कहा कि सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर दे रही है। शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई का माहौल बनाए रखने के लिए शिक्षकों के साल भर होने वाले तबादलों पर रोक लगा दी गई है।
रोहड़ू का कॉलेज अब वीरभद्र सिंह के नाम पर
रोहड़ू कॉलेज का नामकरण
मुख्यमंत्री सुक्खू ने घोषणा की कि रोहड़ू के राजकीय महाविद्यालय सीमा का नाम अब पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के नाम पर रखा जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि अगले साल से इस कॉलेज में बीएड कोर्स की शुरुआत होगी।
छात्रावास निर्माण के लिए वित्तीय सहायता
सीएम ने छात्रावास के निर्माण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने का आश्वासन भी दिया। यह कदम कॉलेज के इन्फ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए उठाया गया है।
100 करोड़ की योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास
सीएम ने रोहड़ू में 100 करोड़ रुपये की विभिन्न योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इनमें एचपीएमसी के सीए स्टोर का लोकार्पण भी शामिल है, जो 29.22 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है।
पूर्व सरकार की शिक्षा नीतियों की आलोचना
पूर्व सरकार पर शिक्षा स्तर को गिराने का आरोप
मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर सरकार पर राज्य में शिक्षा के स्तर को गिराने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार ने चुनावी लाभ के लिए बिना बजट के 900 शिक्षण और स्वास्थ्य संस्थान खोल दिए, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता पर नकारात्मक असर पड़ा।
जनहित में सरकार के कड़े निर्णय
मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि वर्तमान सरकार जनहित में कड़े फैसले ले रही है, जिनके सकारात्मक परिणाम आने वाले समय में दिखाई देंगे। इसके साथ ही उन्होंने राजनीति की राह को चुनौतीपूर्ण बताया और कहा कि यह रास्ता कांटों से भरा होता है।
प्रधानमंत्री Vidyalaxmi Scheme को मोदी सरकार से मंजूरी केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में प्रधानमंत्री Vidyalaxmi Scheme को मंजूरी देने की घोषणा की। इस योजना का उद्देश्य गरीब और मेधावी छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है। यह योजना विशेष रूप से उन छात्रों के लिए है जिनके परिवार की वार्षिक आय 8 लाख रुपये से कम है।
Vidyalaxmi Scheme की प्रमुख विशेषताएँ:
10 लाख रुपये तक का शिक्षा लोन: प्रधानमंत्री Vidyalaxmi Scheme के तहत, 3% ब्याज सब्सिडी के साथ 10 लाख रुपये तक का लोन दिया जाएगा। यह लोन बिना जमानत और गारंटर के प्राप्त किया जा सकता है।
बैंक लोन पर विशेष छूट: छात्रों को बैंक और वित्तीय संस्थानों से लोन मिलेगा, जो उनकी ट्यूशन फीस और अन्य शैक्षिक खर्चों को कवर करेगा।
75% क्रेडिट गारंटी: 7.5 लाख रुपये तक के लोनके लिए भारत सरकार की तरफ से 75% क्रेडिट गारंटी दी जाएगी, जिससे बैंकों को जोखिम कम होगा और वे छात्रों को अधिक लोन देने के लिए प्रोत्साहित होंगे।
860 प्रमुख शिक्षण संस्थानों से जोड़ने का प्रयास: योजना में उन छात्रों को प्राथमिकता दी जाएगी जो भारत के शीर्ष 860 गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश प्राप्त करते हैं। इसके तहत हर साल लगभग 22 लाख छात्रों को एजुकेशन लोन मिलेगा।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने क्या कहा? मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “Vidyalaxmi Scheme का मुख्य उद्देश्य मेधावी छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है, ताकि किसी भी वित्तीय बाधा के कारण छात्रों का उच्च शिक्षा प्राप्त करने का सपना न टूटे।”
साथ ही, FCI को और मजबूत करने का निर्णय केंद्रीय मंत्री ने बताया कि कैबिनेट बैठक में FCI (फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया) को और मजबूत करने का भी फैसला लिया गया। इसके तहत 10000 करोड़ रुपये की फ्रेश इक्विटी कैपिटल दी जाएगी।
PM Vidyalaxmi Scheme के प्रभाव और महत्व Vidyalaxmi Scheme के तहत गरीब परिवारों के बच्चों को शिक्षा के लिए बेहतर वित्तीय विकल्प मिलेंगे, जो उनकी शिक्षा को आसान और सुलभ बनाएंगे। इस योजना से नौजवानों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री विद्या लक्ष्मी योजना भारतीय युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान करने में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है। यह योजना गरीब छात्रों के लिए आर्थिक स्वतंत्रता लाने और शिक्षा को सुलभ बनाने में मदद करेगी।