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हिमाचल प्रदेश में अब आठवीं कक्षा तक के बच्चों को अंकों के आधार पर पास करने की तैयारी

हिमाचलनाउ डेस्क • 2 Dec 2024 • 1 Min Read

Himachalnow / शिमला

हिमाचल प्रदेश में पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को अंकों के आधार पर पास करने की योजना बनाई जा रही है। यह कदम शिक्षा गुणवत्ता में सुधार के लिए उठाया जा रहा है। आइए जानते हैं इस बदलाव के कारण और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।

अंकों के आधार पर पास होने की नई नीति

हिमाचल प्रदेश सरकार अब पहली से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को अंकों के आधार पर पास करने की तैयारी कर रही है। शिक्षा विभाग ने इस दिशा में प्रस्ताव तैयार किया है, जिसका उद्देश्य शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों की जवाबदेही तय करना है। प्रस्ताव में यह भी सिफारिश की गई है कि वार्षिक असेसमेंट में पास नहीं होने वाले विद्यार्थियों को दो अतिरिक्त मौके दिए जाएं। यदि इसके बाद भी वे पास नहीं होते, तो उन्हें पुरानी कक्षा में ही पढ़ाने का निर्णय लिया जा सकता है।

शिक्षा का अधिकार अधिनियम और इसकी चुनौतियां

शिक्षा का अधिकार अधिनियम (Right to Education Act) के तहत, पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को फेल नहीं किया जाता था। हालांकि, हिमाचल सरकार इस अधिनियम के इस प्रावधान का विरोध करती रही है। सरकार का मानना है कि यह नीति शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट का कारण बन रही है। अब प्रदेश सरकार ने इसे बदलने का निर्णय लिया है और नो रिटेंशन पॉलिसी को समाप्त करने के लिए कदम उठाए हैं।

प्रस्ताव का उद्देश्य और विचार

समग्र शिक्षा अभियान के परियोजना निदेशक, राजेश शर्मा ने बताया कि यह प्रस्ताव प्राथमिक स्तर पर बच्चों की नींव को मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। उनका कहना है कि बिना पास और फेल के मूल्यांकन से बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि में कमी आ रही है और शिक्षकों की जवाबदेही भी कम हो गई है। इस व्यवस्था को सुधारने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। यदि कोई बच्चा पास होने योग्य अंक प्राप्त नहीं करता है, तो उसे दो और मौके देने का प्रस्ताव है। इसके बाद भी अगर वह परीक्षा में फेल होता है, तो उसे पुरानी कक्षा में पढ़ाया जाएगा

विदेशों में प्राथमिक शिक्षा का अध्ययन

निदेशक राजेश शर्मा ने यह भी बताया कि विदेशों में प्राथमिक शिक्षा की प्रणाली का अध्ययन किया जा रहा है, ताकि हिमाचल प्रदेश के शिक्षा तंत्र को और बेहतर बनाया जा सके। उनका मानना है कि नो रिटेंशन पॉलिसी के कारण नवीं कक्षा में पहुंचने पर विद्यार्थियों के परिणाम खराब हो रहे हैं, जिससे बोर्ड कक्षाओं के परिणाम भी प्रभावित हो रहे हैं।

प्रस्ताव को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा

इस बदलाव को लेकर शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने समग्र शिक्षा अभियान के परियोजना निदेशक राजेश शर्मा को प्रस्ताव तैयार करने का कार्य सौंपा है। यह प्रस्ताव जल्द ही सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा