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मेले में लगने वाले अस्थायी झूलों पर उठे सुरक्षा के सवाल, बंद करने की उठी मांग

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 1 Hour Ago • 1 Min Read

नाहन सहित हिमाचल प्रदेश के विभिन्न मेलों में लगाए जाने वाले अस्थायी झूलों की सुरक्षा को लेकर युवाओं ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने प्रशासन से बच्चों और परिवारों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ऐसे झूलों की व्यवस्था पर पुनर्विचार करने तथा उनकी जगह सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की मांग की है। युवाओं का कहना है कि मेले की सांस्कृतिक गरिमा और जनसुरक्षा दोनों को साथ लेकर चलने की आवश्यकता है।

नाहन

नाहन सहित हिमाचल प्रदेश के विभिन्न मेलों में लगाए जाने वाले अस्थायी मनोरंजन झूलों को लेकर शहर के जागरूक युवाओं ने सुरक्षा संबंधी गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मेलों में लगाए जाने वाले ऐसे झूलों की व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाए, क्योंकि अस्थायी रूप से स्थापित इन झूलों में सुरक्षा मानकों को लेकर हमेशा आशंकाएं बनी रहती हैं। उनका कहना है कि किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय समय रहते ठोस निर्णय लिया जाना चाहिए।जागरूक युवा अखिलेश ठाकुर, पंकज पठानिया, डॉ. नागेश, इमरान खान सहित अन्य युवाओं ने कहा कि मेलों में सबसे अधिक संख्या बच्चों और परिवारों की होती है। ऐसे में प्रशासन का पहला दायित्व उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजस्व से अधिक महत्व जनसुरक्षा को दिया जाना चाहिए।

युवाओं का कहना है कि मेलों की पहचान उनकी सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत से होती है, लेकिन वर्तमान में अस्थायी झूलों और व्यावसायिक गतिविधियों के कारण उनका मूल स्वरूप प्रभावित हो रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि झूलों के स्थान पर बच्चों के लिए खेल एवं शैक्षणिक गतिविधियां, विज्ञान एवं पुस्तक प्रदर्शनी, स्थानीय कला एवं हस्तशिल्प प्रदर्शन, सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं तथा मेले के इतिहास और परंपरा पर आधारित प्रकाश एवं ध्वनि कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।

उन्होंने कहा कि इससे एक ओर बच्चों और युवाओं को सुरक्षित वातावरण में मनोरंजन मिलेगा, वहीं दूसरी ओर नई पीढ़ी को स्थानीय इतिहास, संस्कृति और परंपराओं से भी जोड़ने का अवसर प्राप्त होगा।युवाओं ने प्रशासन से आग्रह किया है कि प्रदेश के सभी मेलों, विशेषकर नाहन में आयोजित होने वाले मेलों में अस्थायी झूलों की अनुमति देने से पहले सुरक्षा मानकों की कड़ाई से समीक्षा की जाए। साथ ही भविष्य में ऐसे विकल्प विकसित किए जाएं, जिनसे मेले की सांस्कृतिक गरिमा भी बनी रहे और लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके।