Loading...

डोनाल्ड ट्रंप 2.0 / नए आदेशों से बदलेगी अमेरिका की इमिग्रेशन, ऊर्जा और सामाजिक नीतियां

हिमाचलनाउ डेस्क • 21 Jan 2025 • 1 Min Read

अमेरिका फर्स्ट एजेंडा के तहत नई नीतियों से घरेलू और वैश्विक समीकरण बदलने की तैयारी।

वॉशिंगटन – 20 जनवरी 2025 को डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की धमाकेदार शुरुआत की। ट्रंप ने कई बड़े कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किए, जिनसे न केवल अमेरिका बल्कि दुनियाभर में बड़ा प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। “अमेरिका फर्स्ट” एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने पिछली सरकार की कई नीतियों को पलट दिया है। आइए जानते हैं उनके फैसले और उनके असर:


1. इमिग्रेशन पर सख्त फैसले

  • जन्मसिद्ध नागरिकता खत्म:
    अवैध प्रवासियों के बच्चों को अमेरिकी नागरिकता नहीं दी जाएगी। यह फैसला कानूनी विवादों का कारण बन सकता है, क्योंकि यह सीधे 14वें संशोधन को चुनौती देता है।
  • साउथ बॉर्डर पर आपातकाल:
    ट्रंप ने दक्षिणी सीमा पर राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया है। इसके तहत दीवार निर्माण को तेज किया जाएगा और सीमा पर सेना की तैनाती की जाएगी।
  • ‘रिमेन इन मैक्सिको’ नीति की वापसी:
    शरणार्थियों को अमेरिका में प्रवेश से पहले मैक्सिको में रुकने की पुरानी नीति फिर से लागू कर दी गई है।

2. पर्यावरण और ऊर्जा में बड़ा कदम

  • पेरिस समझौते से दोबारा बाहर:
    ट्रंप ने अमेरिका को पेरिस जलवायु समझौते से बाहर कर दिया है, जिससे पर्यावरण पर चर्चा और विवाद बढ़ने की संभावना है।
  • ऊर्जा क्षेत्र में आपातकाल:
    देश में तेल और गैस के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए ऊर्जा आपातकाल घोषित किया गया है। इसके तहत तेल और गैस खोज पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएंगे।

3. सामाजिक और कानूनी बदलाव

  • कैपिटल हिंसा के आरोपियों को माफी:
    ट्रंप ने 6 जनवरी 2021 के कैपिटल हमले में शामिल 1,500 से अधिक लोगों को माफ कर दिया और कई राजनीतिक विरोधियों पर दर्ज मुकदमे वापस ले लिए।
  • डाइवर्सिटी प्रोग्राम्स खत्म:
    संघीय सरकार में चल रहे विविधता और समावेश कार्यक्रमों को बंद कर दिया गया है।
  • लैंगिक परिभाषाओं में बदलाव:
    केवल “पुरुष” और “महिला” को मान्यता दी जाएगी। इससे लैंगिक समानता के कई मौजूदा नियमों में बदलाव होगा।

क्या होगा इन फैसलों का असर?

ट्रंप के इन आदेशों से अमेरिका की नीतियों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। उनके समर्थकों ने इसे “अमेरिका की जीत” बताया है, जबकि विरोधी इसे “समाज और संविधान पर हमला” कह रहे हैं। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इन फैसलों का असर पड़ेगा, खासकर पर्यावरण और वैश्विक व्यापार पर।