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इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान की उच्च स्तरीय वार्ता विफल, 21 घंटे की मैराथन चर्चा के बाद भी नहीं बनी सहमति

Shailesh Saini • 4 Hours Ago • 1 Min Read

हिमाचल नाऊ न्यूज इस्लामाबाद

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई ऐतिहासिक सीधी वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई है। करीब 21 घंटे तक चली लंबी और मैराथन बातचीत के बाद दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल किसी ठोस नतीजे पर पहुंचने में नाकाम रहे। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने वार्ता विफल होने की पुष्टि करते हुए इसे ईरान के लिए एक बड़ा नुकसान बताया है।

परमाणु कार्यक्रम और समुद्री सुरक्षा पर अटका पेंच

सूत्रों के अनुसार, वार्ता के दौरान सबसे बड़ा गतिरोध ईरान के परमाणु कार्यक्रम और ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ पर नियंत्रण को लेकर रहा। अमेरिका ने मांग रखी थी कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर दीर्घकालिक और स्पष्ट प्रतिबद्धता जताए, जिसे ईरान ने संप्रभुता का हवाला देते हुए स्वीकार नहीं किया। इसके अलावा, ईरान द्वारा विदेशों में फ्रीज की गई अपनी संपत्तियों को बहाल करने और लेबनान में संघर्ष विराम की मांगों पर भी सहमति नहीं बन पाई।

जेडी वेंस ने ईरान के रुख को बताया जिम्मेदार

वार्ता के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका ने अपना सबसे बेहतर और अंतिम प्रस्ताव ईरान के सामने रख दिया था, लेकिन ईरान ने इन शर्तों को मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने लचीला रुख अपनाते हुए पूरी ईमानदारी से कोशिश की, लेकिन अब गेंद ईरान के पाले में है। जेडी वेंस इस बैठक के तुरंत बाद इस्लामाबाद से अमेरिका के लिए रवाना हो गए।

ईरान ने अमेरिकी मांगों को बताया अनुचित

दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्रालय और सरकारी मीडिया ने वार्ता के विफल होने के लिए अमेरिका की ‘अत्यधिक मांगों’ को जिम्मेदार ठहराया है। ईरानी प्रतिनिधियों का कहना है कि दो-तीन महत्वपूर्ण मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच गहरी खाई है। ईरान ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी आर्थिक और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान नहीं होता, तब तक किसी भी समझौते पर पहुंचना मुश्किल है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई थी पहली सीधी मुलाकात

1979 की इस्लामी क्रांति के बाद यह पहला मौका था जब दोनों देशों के इतने उच्च स्तरीय नेता आमने-सामने बैठकर बात कर रहे थे। पाकिस्तान ने इस वार्ता के लिए इस्लामाबाद में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने व्यक्तिगत रूप से दोनों पक्षों से मुलाकात कर तनाव कम करने की कोशिश की थी। हालांकि, फिलहाल इस वार्ता के विफल होने से मध्य पूर्व में चल रहा तनाव और गहराने की आशंका जताई जा रही है।

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