ऊना में 9,647 राजस्व मामलों पर कार्रवाई, रिकॉर्ड दुरुस्ती के लिए 15 दिसंबर की समयसीमा
ऊना जिले में वर्ष 2025 और 2026 में अब तक इंतकाल, तकसीम, निशानदेही और राजस्व रिकॉर्ड दुरुस्ती से जुड़े कुल 9,647 मामलों में कार्रवाई दर्ज की गई है। जिला प्रशासन ने लंबित राजस्व मामलों का समयबद्ध निपटारा करने के लिए विशेष अदालतों और नियमित समीक्षा की व्यवस्था की है। उपायुक्त जतिन लाल ने रिकॉर्ड दुरुस्ती के सभी लंबित मामलों को 15 दिसंबर तक निपटाने के निर्देश दिए हैं।
ऊना/वीरेंद्र बन्याल
प्रदेश सरकार के विशेष अभियान के तहत ऊना जिले में भूमि संबंधी मामलों के निपटारे पर जोर दिया जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, दो वर्षों की इस अवधि में इंतकाल के 7,265, निशानदेही के 1,597, तकसीम के 590 और राजस्व रिकॉर्ड दुरुस्ती के 195 मामलों में कार्रवाई हुई है। जिला प्रशासन लंबित मामलों की नियमित समीक्षा के साथ राजस्व सेवाओं को सरल और समयबद्ध बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
सप्ताह में तीन दिन विशेष तकसीम अदालतें
जिला राजस्व अधिकारी विपिन कुमार के अनुसार, राजस्व मामलों की सुनवाई और निपटारे में तेजी लाने के लिए प्रत्येक सप्ताह मंगलवार, बुधवार और वीरवार को विशेष तकसीम अदालतें लगाई जा रही हैं। इसके अतिरिक्त हर महीने के अंतिम दो दिनों में भी राजस्व अदालतों का आयोजन किया जा रहा है। इस व्यवस्था का उद्देश्य लंबित भूमि मामलों पर कार्रवाई के अतिरिक्त अवसर उपलब्ध करवाना और लोगों को राजस्व सेवाएं निर्धारित समय में प्रदान करना है।
रिकॉर्ड दुरुस्ती की लंबितता खत्म करने का लक्ष्य
उपायुक्त जतिन लाल ने राजस्व अधिकारियों के साथ हुई बैठक में रिकॉर्ड दुरुस्ती से संबंधित सभी लंबित मामलों का निपटारा 15 दिसंबर तक सुनिश्चित करने को कहा है। उन्होंने निशानदेही और तकसीम के मामलों को शीघ्र निपटाने के साथ इंतकाल और जमाबंदी से जुड़े मामलों की लंबितता कम करने के निर्देश भी दिए। प्रशासन का जोर ऐसी व्यवस्था बनाने पर है, जिसमें भूमि संबंधी कार्यों के लिए लोगों को अनावश्यक प्रतीक्षा न करनी पड़े।
भूमि हस्तांतरण और स्वामित्व योजना की समीक्षा
जिला प्रशासन ने विभिन्न विभागों की विकास परियोजनाओं और निर्माण कार्यों से जुड़े भूमि हस्तांतरण मामलों की भी उपमंडलवार समीक्षा की है। उपायुक्त ने लंबित प्रकरणों को आगे बढ़ाने के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय बैठकें करने के निर्देश दिए। स्वामित्व योजना के अंतर्गत लंबित महालों के मानचित्र अपलोड करने, पटवारियों को प्रशिक्षण देने और ड्रोन मैपिंग के बाद की प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी करने पर भी जोर दिया गया है।