ऊना में मानसून से पहले स्वां नदी और नालों की सफाई के एडीसी महेंद्र पाल गुर्जर ने दिए निर्देश
Himachalnow / ऊना / वीरेंद्र बन्याल
ऊना में एडीसी महेंद्र पाल गुर्जर ने नगर निगम क्षेत्र में मानसून से पहले स्वां नदी, खड्डों और नालों की सफाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य पूरा करने और जलभराव रोकने के उपाय सुनिश्चित करने को कहा है।
ऊना
मानसून से पहले सफाई कार्यों पर विशेष निर्देश
अतिरिक्त उपायुक्त महेंद्र पाल गुर्जर ने नगर निगम ऊना क्षेत्र में मानसून सीजन से पहले व्यापक स्तर पर सफाई कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि स्वां नदी, खड्डों और नालों में जमा गाद और कचरे को प्राथमिकता के आधार पर हटाया जाए, क्योंकि इससे पानी का प्राकृतिक बहाव बाधित होता है और बारिश के दौरान जलभराव की स्थिति उत्पन्न होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समय पर सफाई नहीं होने पर सड़कों, खेतों और रिहायशी क्षेत्रों में पानी घुसने से आमजन को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
आपदा प्रबंधन बैठक में तैयारियों की समीक्षा
एडीसी गुरुवार को जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के तहत आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे, जिसमें नगर निगम ऊना क्षेत्र में मानसून पूर्व तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक के दौरान संभावित जलभराव वाले क्षेत्रों की पहचान, सफाई कार्यों की वर्तमान स्थिति और आगामी योजनाओं पर चर्चा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो और सभी तैयारियां तय समय सीमा के भीतर पूरी की जाएं।
विभागों को समन्वय के साथ कार्य पूरा करने के निर्देश
बैठक में एडीसी ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जहां-जहां वन विभाग की भूमि आती है, वहां आवश्यक अनुमति पहले से ली जाए, जबकि निजी भूमि के मामलों में स्थानीय लोगों के साथ संवाद स्थापित कर कार्य को आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सभी विभाग मिलकर कार्य करें ताकि किसी प्रकार की प्रशासनिक या तकनीकी बाधा उत्पन्न न हो और कार्य सुचारू रूप से पूरा किया जा सके।
मानसून से पहले कार्य पूर्ण करने पर जोर
एडीसी ने कहा कि मानसून शुरू होने से पहले सभी सफाई कार्य और आवश्यक तैयारियां हर हाल में पूरी कर ली जाएं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्य की नियमित निगरानी की जाए और जहां भी अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता हो, उसकी समय पर व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उद्देश्य यह है कि बारिश के दौरान जलभराव जैसी स्थिति उत्पन्न न हो और नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।