मौसम साफ होते ही गेहूं की कटाई जोरों पर, खिलती धूप का फायदा उठा रहे किसान
Himachalnow / ऊना / वीरेंद्र बन्याल
ऊना के उपमंडल बंगाणा के छतैहड़ गांव में मौसम साफ होते ही गेहूं की कटाई का कार्य तेजी से शुरू हो गया है। खेतों में किसान सुबह से शाम तक फसल काटने में जुटे हुए हैं और अजय ठाकुर भी खेतों में उतरकर किसानों का हौसला बढ़ाते नजर आए। इस दौरान उन्होंने प्राकृतिक खेती अपनाने का संदेश भी दिया और समय पर कटाई के महत्व पर जोर दिया।
ऊना
उपमंडल बंगाणा के अजय ठाकुर ने पैतृक गांव छतैहड में मौसम साफ होते ही गेहूं की कटाई का कार्य जोरों पर शुरू कर दिया है। पिछले कुछ दिनों तक मौसम में आई अनिश्चितता और बादलों के कारण किसानों को कटाई कार्य में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन अब खिलती धूप निकलने से किसानों के चेहरे पर खुशी लौट आई है। किसान सुबह से लेकर शाम तक अपने खेतों में जुटकर गेहूं की फसल काटने में व्यस्त नजर आ रहे हैं, ताकि समय रहते फसल सुरक्षित घर पहुंचाई जा सके। इसी कड़ी में राष्ट्रीय ह्यूमन राइट युवा विंग के प्रदेश चेयरमैन एवं भाजयुमो के राज्य कार्यकारिणी सदस्य अजय ठाकुर भी अपने पैतृक गांव छतैहड़ में खेतों में गेहूं की कटाई करते नजर आए। उन्होंने स्वयं खेत में उतरकर दरांती से गेहूं काटते हुए किसानों का हौसला बढ़ाया और कहा कि किसान अपनी फसल की बुआई से लेकर कटाई तक खुद देखरेख करें, जिससे उन्हें खेती की पूरी जानकारी रहती है और फसल की गुणवत्ता भी बेहतर बनी रहती है।
अजय ठाकुर ने कहा कि इस समय मौसम साफ रहने से किसानों को कटाई का सुनहरा अवसर मिला है और सभी किसान इसका पूरा लाभ उठाते हुए तेजी से गेहूं की कटाई में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि समय पर कटाई होने से फसल खराब होने का खतरा कम रहता है और किसानों की मेहनत सुरक्षित रहती है। गांवों में इस समय खेतों में रौनक देखने को मिल रही है और हर तरफ गेहूं की पक चुकी फसल की कटाई का कार्य जारी है।इस दौरान अजय ठाकुर ने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए भी प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आज के समय में रासायनिक खाद और जहरीले कीटनाशक अत्यधिक प्रयोग से जमीन की उर्वरता प्रभावित हो रही है और लोगों के स्वास्थ्य पर भी इसका बुरा असर पड़ रहा है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दें, ताकि जहरीली खेती से छुटकारा मिल सके और आने वाली पीढ़ियों को शुद्ध एवं पौष्टिक अनाज उपलब्ध हो सके। अजय ठाकुर ने कहा कि खेतों में स्वयं काम करने से शरीर को भी लाभ मिलता है।
उन्होंने कहा कि घर पर फसल का कार्य करने से शरीर से निकलने वाला पसीना शरीर को लंबे समय तक तंदुरुस्त रखने में काफी सहायक होता है। उन्होंने बताया कि वे स्वयं भी अपने खेतों में फसल की बुआई, देखरेख और कटाई का कार्य करते हैं और इससे उन्हें शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे खेती को केवल व्यवसाय ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और प्रकृति से जुड़ने का माध्यम भी समझें। प्राकृतिक खेती अपनाकर जहां एक ओर मिट्टी की गुणवत्ता को बचाया जा सकता है, वहीं दूसरी ओर लोगों को स्वस्थ जीवन भी मिल सकता है। गांव छतैहड़ में खेतों में गेहूं की कटाई के दौरान अजय ठाकुर का यह संदेश किसानों के बीच चर्चा का विषय बना रहा और किसानों ने भी प्राकृतिक खेती को अपनाने की आवश्यकता पर सहमति जताई।