Loading...

ईरान में फंसे पायलटों को बचाने के लिए अमेरिका ने उड़ाए अपने ही विमान, हाई-रिस्क मिशन की बड़ी कीमत

हिमाचलनाउ डेस्क • 2 Hours Ago • 1 Min Read

अमेरिका ने अपने ही विमान उड़ाए: ईरान में फंसे अपने फाइटर पायलटों को बचाने के लिए अमेरिका ने एक बेहद जोखिम भरा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया, जो सफल तो रहा लेकिन इसके लिए उसे बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। इस मिशन के दौरान अमेरिकी सेना को अपने ही हाई-टेक विमानों को नष्ट करना पड़ा, ताकि संवेदनशील तकनीक दुश्मन के हाथ न लग सके।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी पायलट उस समय ईरान के अंदर फंस गए थे जब उनका F-15E स्ट्राइक ईगल विमान मार गिराया गया। इसके बाद उन्हें निकालने के लिए स्पेशल फोर्सेस ने एक सीक्रेट ऑपरेशन शुरू किया, जिसमें रेगिस्तान के बीच एक अस्थायी एयरफील्ड तैयार किया गया।

लैंडिंग के बाद बेकार हुए विमान

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रेस्क्यू मिशन के दौरान स्पेशल ऑपरेशंस ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट को उस अस्थायी एयरफील्ड पर उतारा गया था। लेकिन हालात तब बिगड़ गए जब इनमें से कम से कम एक और संभवतः दो विमान लैंडिंग के बाद काम करने लायक नहीं रहे। बताया जा रहा है कि या तो तकनीकी खराबी आई या फिर रेगिस्तान की नरम जमीन में फंसने के कारण वे उड़ान नहीं भर सके।

मजबूरी में उड़ाने पड़े अपने ही विमान

जैसे-जैसे ईरानी सेना उस इलाके के करीब पहुंचने लगी, अमेरिकी सेना के सामने समय कम होता जा रहा था। ऐसे में अतिरिक्त सहायता बुलाने के साथ-साथ एक बड़ा फैसला लिया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, जिन विमानों को वापस ले जाना संभव नहीं था, उन्हें वहीं बम से उड़ा दिया गया।

क्यों लिया गया इतना बड़ा फैसला

सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक, दुश्मन के इलाके में चलाए जाने वाले ऐसे ऑपरेशंस में यह एक तय प्रोटोकॉल होता है। विमानों में मौजूद अत्याधुनिक तकनीक, जैसे एडवांस कम्युनिकेशन सिस्टम, नेविगेशन और स्पेशल ऑपरेशन उपकरण, अगर दुश्मन के हाथ लग जाएं तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

ऐसे ही प्रोटोकॉल का पालन पहले भी किया गया था, जब Osama bin Laden के खिलाफ ऑपरेशन में अमेरिका ने एबटाबाद में अपने हेलीकॉप्टर को नष्ट कर दिया था।

सामने आए मलबे के वीडियो

ईरान के सरकारी मीडिया द्वारा जारी तस्वीरों और वीडियो में एक जले हुए ट्रांसपोर्ट विमान के अवशेष दिखाई दिए हैं। ये मलबा एक रेगिस्तानी इलाके में फैला हुआ था, जिसे देखकर विशेषज्ञों ने इसे Lockheed Martin C-130 Hercules श्रेणी का विमान बताया है। इस तरह के विमान की कीमत 100 मिलियन डॉलर से अधिक होती है और इन्हें खासतौर पर स्पेशल ऑपरेशंस मिशनों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

हेलीकॉप्टर के भी मिले संकेत

रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि मलबे में रोटरक्राफ्ट के अवशेष भी मिले हैं, जो संभवतः Boeing MH-6 Little Bird हेलीकॉप्टर हो सकते हैं। इन छोटे हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल आमतौर पर गुप्त मिशनों में सैनिकों की तैनाती और निकासी के लिए किया जाता है।

हालांकि, ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने दावा किया है कि अमेरिका ने अपने विमानों को इसलिए नष्ट किया ताकि इस पूरे ऑपरेशन को लेकर किसी तरह की अंतरराष्ट्रीय शर्मिंदगी से बचा जा सके।


यह पूरी घटना दिखाती है कि आधुनिक युद्ध में सिर्फ मिशन की सफलता ही नहीं, बल्कि तकनीक की सुरक्षा भी उतनी ही अहम होती है — अगर इसके लिए अपने ही करोड़ों डॉलर के सैन्य संसाधनों को नष्ट क्यों न करना पड़े।

Related Topics: