Iran-US Conflict के बीच नया मोड़ / अमेरिका के हमले से नाराज हुए खाड़ी देश, पहले सूचना न देने पर बढ़ी नाराजगी
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक नया कूटनीतिक मोड़ सामने आया है। खाड़ी क्षेत्र के कई देश अमेरिकी प्रशासन के रवैये से नाखुश बताए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले अमेरिकी प्रशासन ने ईरान पर हमला करने से पहले उन्हें इसकी जानकारी नहीं दी, जिससे क्षेत्रीय सहयोगियों में असंतोष बढ़ गया है।
खाड़ी देशों को नहीं दी गई थी पहले सूचना
खाड़ी क्षेत्र के दो अधिकारियों ने बताया कि उनकी सरकारें अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए शुरुआती हमले के तरीके से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि इस सैन्य कार्रवाई की जानकारी पहले से साझा नहीं की गई, जिससे वे संभावित जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार नहीं हो सके।
अधिकारियों के मुताबिक, खाड़ी देशों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि ईरान के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर और विनाशकारी परिणाम ला सकती है। बावजूद इसके उनकी चिंताओं को नजरअंदाज किया गया।
सुरक्षा को लेकर भी जताई नाराजगी
अधिकारियों ने यह भी कहा कि अमेरिका ने खाड़ी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए। उनका आरोप है कि ऑपरेशन का मुख्य फोकस इजरायल और अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा पर था, जबकि खाड़ी देशों को अपनी सुरक्षा के लिए लगभग अकेला छोड़ दिया गया।
ईरान के हमलों पर अमेरिका का दावा
इस बीच व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली ने दावा किया कि ईरान की ओर से किए जा रहे बैलिस्टिक मिसाइल हमलों में लगभग 90 प्रतिशत की कमी आई है। उन्होंने कहा कि “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के जरिए ईरान के मिसाइल और ड्रोन लॉन्चर तथा हथियार निर्माण क्षमता को काफी हद तक नुकसान पहुंचाया गया है।
व्हाइट हाउस के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन लगातार क्षेत्रीय साझेदार देशों के संपर्क में है। अधिकारियों का कहना है कि ईरान द्वारा पड़ोसी देशों को निशाना बनाए जाने से यह स्पष्ट हो गया है कि इस खतरे को खत्म करना क्यों जरूरी था।
हालांकि कुवैत, बहरीन और सऊदी अरब की सरकारों ने इस मुद्दे पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।