बीमारी और ऑपरेशन का मजाक उड़ाना कांग्रेस की राजनीतिक संस्कृति और संवेदनहीनता का प्रमाण: विनय शर्मा
भारतीय जनता पार्टी के जिला प्रवक्ता विनय शर्मा ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो को लेकर कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधायक सतपाल रायजादा पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वीडियो में भाजपा के वरिष्ठ नेता, ऊना सदर के विधायक एवं पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती के ऑपरेशन को लेकर कथित तौर पर उपहास किया जा रहा है। विनय शर्मा ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की बीमारी और स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का मजाक उड़ाना राजनीतिक संवेदनहीनता को दर्शाता है।
ऊना/वीरेंद्र बन्याल/हिमाचल नाऊ न्यूज।
विनय शर्मा ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक विरोध, वैचारिक मतभेद और एक-दूसरे की नीतियों की आलोचना स्वाभाविक है, लेकिन इन सबके बीच मानवीय मर्यादाओं का सम्मान बनाए रखना आवश्यक है। किसी की बीमारी या ऑपरेशन को मजाक का विषय बनाना न तो राजनीतिक परिपक्वता का परिचायक है और न ही सभ्य समाज की परंपराओं के अनुरूप। उन्होंने कहा कि राजनीति में आलोचना का अधिकार सभी को है, लेकिन व्यक्तिगत स्वास्थ्य और शारीरिक पीड़ा को निशाना बनाना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि सतपाल सिंह सत्ती हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक अनुभवी जनप्रतिनिधि और भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं। उनके स्वास्थ्य को लेकर इस तरह की टिप्पणी, यदि वायरल वीडियो में दिखाई दे रही बातों के अनुरूप है, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। विनय शर्मा ने कहा कि किसी की बीमारी पर व्यंग्य करने से राजनीतिक कद ऊंचा नहीं होता, बल्कि व्यक्ति की सोच, संस्कार और संवेदनशीलता पर सवाल खड़े होते हैं।
विरोधियों के कठिन समय में भी इंसानियत जरूरी
विनय शर्मा ने कहा कि सतपाल रायजादा को यह भी याद रखना चाहिए कि राजनीति से ऊपर इंसानियत होती है। उनके अनुसार, जब सतपाल रायजादा स्वयं अस्वस्थ थे, तब भाजपा नेताओं ने राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार कर उनके स्वास्थ्य की चिंता की, उनका हालचाल जाना और पीजीआई पहुंचकर भी उनकी कुशलक्षेम पूछी। उन्होंने कहा कि यही भारतीय राजनीति की स्वस्थ परंपरा है, जिसमें राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बावजूद मानवीय संवेदनाओं को सर्वोपरि रखा जाता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब भाजपा के नेता विपक्षी दल के नेता की बीमारी के समय उनके साथ खड़े हो सकते हैं, तो भाजपा के किसी वरिष्ठ नेता के ऑपरेशन को लेकर उपहास करने की आवश्यकता क्यों पड़ी? क्या राजनीतिक विरोध इतना बढ़ जाना चाहिए कि किसी व्यक्ति की पीड़ा भी मजाक का विषय बन जाए?
पीड़ित परिवारों के दुख के प्रति संवेदनशीलता भी जरूरी
विनय शर्मा ने कहा कि करवा चौथ पर सखी मिलन समारोह आयोजित करना और महिलाओं के सम्मान की बात करना अच्छी पहल है, लेकिन समाज में संवेदनशीलता का वास्तविक परिचय दूसरों के दुख-दर्द के प्रति व्यवहार से भी मिलता है। उन्होंने ऊना में गोलीबारी और एक कार्यकर्ता की मौत से जुड़े घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना, न्याय और जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। किसी भी परिवार का दुख राजनीतिक बयानबाजी का विषय नहीं, बल्कि मानवीय चिंता और संवेदना का विषय होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सत्ता, पद और राजनीतिक प्रतिष्ठा स्थायी नहीं होते, लेकिन व्यक्ति के शब्द और उसका व्यवहार लोगों की स्मृति में लंबे समय तक बने रहते हैं। एक जनप्रतिनिधि की वास्तविक पहचान इस बात से होती है कि वह अपने राजनीतिक विरोधियों के साथ कठिन परिस्थितियों में कैसा व्यवहार करता है और मानवीय मूल्यों के प्रति कितना संवेदनशील रहता है।
कथित टिप्पणी पर सार्वजनिक रूप से खेद जताने की अपील
विनय शर्मा ने सतपाल रायजादा से अपील की कि वह वायरल वीडियो में दिखाई दे रही कथित टिप्पणी पर आत्ममंथन करें। उन्होंने कहा कि यदि यह टिप्पणी सतपाल रायजादा ने की है, तो उन्हें सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त करते हुए माफी मांगनी चाहिए। ऐसा करना कमजोरी नहीं, बल्कि राजनीतिक जिम्मेदारी, परिपक्वता और मानवीय संवेदनशीलता का परिचायक होगा।
अंत में विनय शर्मा ने कहा कि भाजपा कांग्रेस के साथ राजनीतिक और वैचारिक मुद्दों पर लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करती रहेगी, लेकिन बीमारी, परिवार और व्यक्तिगत पीड़ा का उपहास करने वाली राजनीति को उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बदल सकते हैं और विचारों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इंसानियत, संवेदनशीलता और आपसी सम्मान जैसे मूल्यों को कभी नहीं खोना चाहिए।