लेटेस्ट हिमाचल प्रदेश न्यूज़ हेडलाइंस

Vision Based Flood Warning Sensor / IIT Mandi छात्रों का यह प्रयास बाढ़ से निपटने के लिए एक उम्मीद की किरण बन सकता है

हिमाचलनाउ डेस्क | 26 दिसंबर 2024 at 1:32 pm

Share On WhatsApp Share On Facebook Share On Twitter

Himachalnow / मंडी

हिमाचल प्रदेश में बाढ़ का खतरा

हिमाचल प्रदेश में हर साल मानसून के दौरान बाढ़ और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाएं आती हैं, जिनसे भारी जान-माल का नुकसान होता है। पिछले दो सालों में इस क्षेत्र में बाढ़ और लैंडस्लाइड की घटनाएं कई बार देखने को मिली हैं, जिससे कई लोगों की जान चली गई और बुनियादी ढांचे को भी नुकसान हुआ। इन घटनाओं के बीच, समस्या का समाधान खोजने के लिए आईआईटी मंडी के छात्रों ने एक खास यंत्र तैयार किया है, जो भविष्य में बाढ़ के खतरे को कम कर सकता है।

IIT मंडी के छात्रों का अभिनव यंत्र

आईआईटी मंडी के छात्रों ओम माहेश्वरी, गर्वित, वर्णिका, अक्षय, कार्तिक और हारिका ने मिलकर एक “विजन बेस्ड फ्लड वार्निंग सेंसर” विकसित किया है। इस यंत्र का उद्देश्य बाढ़ के खतरे का अनुमान लगाना और समय रहते लोगों को चेतावनी देना है। यह यंत्र आम जनता के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है और भविष्य में बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद कर सकता है।

हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें: Join WhatsApp Group

कैसे काम करेगा यह सेंसर?

आईआईटी के छात्र ओम माहेश्वरी के अनुसार, इस यंत्र में एक खास सेंसर लगाया गया है जो नदी के जलस्तर का रियल टाइम डेटा एकत्र करेगा। यह सेंसर पुलों के नीचे लगाया जाएगा और जलस्तर की जानकारी सेटेलाइट के माध्यम से संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाएगा। पहले से ज्ञात सामान्य जलस्तर की तुलना में यदि जलस्तर बढ़ता है, तो यह सेंसर बाढ़ की संभावना का संकेत देगा। इससे संबंधित इलाकों में खतरे को भांपकर समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा सकता है और जानमाल के नुकसान को रोका जा सकता है।

पुराने सेंसरों से बेहतर

इस तकनीकी प्रणाली को विकसित करते समय आईआईटी छात्रों ने यह सुनिश्चित किया कि यह सेंसर नदी के मध्य में लगाए जाने वाले पुराने प्रकार के सेंसर से कहीं अधिक प्रभावी हो। पुराने सेंसर बाढ़ के दौरान बह जाते थे, जबकि यह नया सेंसर नदी के किनारे से भी बाढ़ के खतरे का सही-सही आकलन कर सकेगा। इन सेंसरों को नदी के किनारे 10 से 15 किमी के दायरे में जगह-जगह स्थापित किया जाएगा, जिससे विस्तृत क्षेत्र का सही डेटा प्राप्त हो सके।

हिमाचल प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण कदम

हिमाचल प्रदेश में नदी-नालों के पास बसे हुए लोगों के लिए यह प्रोटोटाइप बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है, क्योंकि मानसून के दौरान इन क्षेत्रों में जलस्तर अचानक बढ़ सकता है। छात्रों का यह प्रयास इस क्षेत्र के लिए एक उम्मीद की किरण बन सकता है, खासकर उन इलाकों के लिए जो बाढ़ के दौरान अधिक प्रभावित होते हैं। इस यंत्र के विकास के बाद, इसके वास्तविक उपयोग के लिए पूरी तरह से परीक्षण और निगरानी की जाएगी।

भविष्य में और विस्तार

आईआईटी मंडी के छात्रों द्वारा विकसित यह यंत्र हिमाचल प्रदेश के लिए एक बड़ा कदम हो सकता है। यदि यह प्रणाली सफल रहती है, तो भविष्य में इसे अन्य प्रभावित क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है। इससे बाढ़ की चेतावनी समय रहते दी जा सकेगी और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने का मौका मिलेगा।

निष्कर्ष

आईआईटी मंडी के छात्रों ने जो “विजन बेस्ड फ्लड वार्निंग सेंसर” विकसित किया है, वह हिमाचल प्रदेश जैसे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में एक क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। इस प्रोटोटाइप के सफल परीक्षण और प्रयोग के बाद, बाढ़ से होने वाली जानमाल की क्षति को कम किया जा सकेगा और लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सकेगा।

हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें

ताज़ा खबरों और अपडेट्स के लिए अभी हमारे WhatsApp ग्रुप का हिस्सा बनें!

Join WhatsApp Group

आपकी राय, हमारी शक्ति!
इस खबर पर आपकी प्रतिक्रिया साझा करें


[web_stories title="false" view="grid", circle_size="20", number_of_stories= "7"]