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WhatsApp Username Feature / व्हाट्सऐप यूज़रनेम फीचर पर सरकार ने लगाई रोक, मेटा से तीन दिन के भीतर मांगा जवाब

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 5 Hours Ago • 1 Min Read

WhatsApp Username Feature : भारत सरकार ने व्हाट्सऐप के प्रस्तावित यूज़रनेम फीचर को लेकर मेटा को नोटिस जारी करते हुए सुरक्षा, गोपनीयता और संभावित साइबर जोखिमों से जुड़े पहलुओं पर विस्तृत जवाब मांगा है। सरकार ने कंपनी को तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने और परामर्श प्रक्रिया पूरी होने तक भारत में इस फीचर का रोलआउट नहीं करने के निर्देश दिए हैं।

नई दिल्ली

मेटा को जारी किया गया नोटिस

केंद्र सरकार ने व्हाट्सऐप की मूल कंपनी मेटा को प्रस्तावित यूज़रनेम फीचर के संबंध में नोटिस जारी किया है। सरकार ने कंपनी से इस फीचर के तकनीकी ढांचे, सुरक्षा मानकों, यूजर डेटा की सुरक्षा, संभावित साइबर जोखिमों और दुरुपयोग रोकने के लिए अपनाए गए उपायों पर विस्तृत जानकारी मांगी है। सूत्रों के अनुसार, मेटा को तीन दिनों के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक संबंधित मंत्रालयों और एजेंसियों के साथ परामर्श प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक भारत में व्हाट्सऐप यूज़रनेम फीचर को लॉन्च या रोलआउट नहीं किया जाएगा।

क्या है व्हाट्सऐप यूज़रनेम फीचर और कैसे करेगा काम

वर्तमान में व्हाट्सऐप पर किसी नए व्यक्ति से संपर्क करने के लिए उसका मोबाइल नंबर होना अनिवार्य होता है। प्रस्तावित यूज़रनेम फीचर लागू होने के बाद यूजर अपने अकाउंट के लिए एक यूनिक यूज़रनेम चुन सकेंगे, जिसके माध्यम से मोबाइल नंबर साझा किए बिना नई चैट शुरू की जा सकेगी। मेटा के अनुसार, प्रत्येक यूज़रनेम केवल एक ही अकाउंट के लिए उपलब्ध होगा और एक जैसा यूज़रनेम दो अलग-अलग यूजर नहीं रख सकेंगे। हालांकि जिन लोगों के पास पहले से किसी यूजर का मोबाइल नंबर सेव है या जो पहले से किसी साझा ग्रुप का हिस्सा हैं, उनके लिए मोबाइल नंबर की दृश्यता में कोई बदलाव नहीं होगा। कंपनी इस फीचर को चरणबद्ध तरीके से विभिन्न देशों में उपलब्ध कराएगी।

यूज़रनेम की के जरिए मिलेगी अतिरिक्त सुरक्षा

मेटा ने यूज़रनेम फीचर के साथ यूज़रनेम की नाम का एक अतिरिक्त सुरक्षा विकल्प भी तैयार किया है। यदि कोई यूजर इस सुविधा को सक्रिय करता है, तो केवल यूज़रनेम जानने से नई चैट शुरू नहीं की जा सकेगी। संपर्क स्थापित करने के लिए संबंधित यूज़रनेम की की भी आवश्यकता होगी। कंपनी का कहना है कि इस अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य अनधिकृत संपर्क को सीमित करना और यूजर्स की गोपनीयता को बेहतर बनाना है। फीचर उपलब्ध होने पर यूजर Settings > Account > Username में जाकर अपना यूज़रनेम रिजर्व कर सकेंगे और सिस्टम उपलब्धता के आधार पर इसकी पुष्टि करेगा।

सरकार ने सुरक्षा और साइबर जोखिमों पर मांगा स्पष्टीकरण

सरकार का कहना है कि किसी भी नए डिजिटल फीचर को लागू करने से पहले उसके सुरक्षा प्रभावों और संभावित दुरुपयोग का आकलन आवश्यक है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि यूज़रनेम आधारित पहचान का उपयोग फर्जी प्रोफाइल, ऑनलाइन धोखाधड़ी, प्रतिरूपण या अन्य साइबर अपराधों के लिए न किया जा सके। इसी उद्देश्य से मेटा से तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था, यूजर सत्यापन प्रणाली, शिकायत निवारण तंत्र और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग की प्रक्रिया पर विस्तृत जानकारी मांगी गई है। सरकार इन पहलुओं की समीक्षा के बाद ही भारत में फीचर के रोलआउट पर निर्णय लेगी।

प्राइवेसी और सुरक्षा के बीच संतुलन पर सरकार का फोकस

मेटा का कहना है कि यूज़रनेम फीचर का उद्देश्य यूजर्स को नए संपर्कों के साथ मोबाइल नंबर साझा किए बिना बातचीत शुरू करने का विकल्प देना है, जिससे व्यक्तिगत गोपनीयता को बेहतर बनाया जा सके। वहीं साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पहचान सत्यापन और सुरक्षा नियंत्रण पर्याप्त नहीं हुए तो फर्जी या मिलते-जुलते यूज़रनेम बनाकर लोगों को भ्रमित करने की कोशिश की जा सकती है। मेटा ने कहा है कि हाई-प्रोफाइल व्यक्तियों के यूज़रनेम सुरक्षित रखने, दुरुपयोग की पहचान करने और सुरक्षा उपायों को मजबूत बनाने के लिए कई तकनीकी व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं। सरकार फिलहाल इन्हीं सुरक्षा उपायों का मूल्यांकन कर रही है ताकि गोपनीयता और साइबर सुरक्षा के बीच संतुलन सुनिश्चित किया जा सके।tsApp Username Feature को लॉन्च या रोलआउट नहीं किया जाएगा।

क्या है WhatsApp Username Feature और कैसे करेगा काम

वर्तमान में WhatsApp पर किसी नए व्यक्ति से संपर्क करने के लिए उसका मोबाइल नंबर होना अनिवार्य होता है। प्रस्तावित Username Feature लागू होने के बाद यूजर अपने अकाउंट के लिए एक यूनिक यूजरनेम चुन सकेंगे, जिसके माध्यम से मोबाइल नंबर साझा किए बिना नई चैट शुरू की जा सकेगी। Meta के अनुसार, प्रत्येक यूजरनेम केवल एक ही अकाउंट के लिए उपलब्ध होगा और एक जैसा यूजरनेम दो अलग-अलग यूजर नहीं रख सकेंगे। हालांकि जिन लोगों के पास पहले से किसी यूजर का मोबाइल नंबर सेव है या जो पहले से किसी साझा ग्रुप का हिस्सा हैं, उनके लिए मोबाइल नंबर की दृश्यता में कोई बदलाव नहीं होगा। कंपनी इस फीचर को चरणबद्ध तरीके से विभिन्न देशों में उपलब्ध कराएगी।

Username Key के जरिए मिलेगी अतिरिक्त सुरक्षा

Meta ने Username Feature के साथ Username Key नाम का एक अतिरिक्त सुरक्षा विकल्प भी तैयार किया है। यदि कोई यूजर इस सुविधा को सक्रिय करता है, तो केवल यूजरनेम जानने से नई चैट शुरू नहीं की जा सकेगी। संपर्क स्थापित करने के लिए संबंधित Username Key की भी आवश्यकता होगी। कंपनी का कहना है कि इस अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य अनधिकृत संपर्क को सीमित करना और यूजर्स की गोपनीयता को बेहतर बनाना है। फीचर उपलब्ध होने पर यूजर Settings > Account > Username में जाकर अपना यूजरनेम रिजर्व कर सकेंगे और सिस्टम उपलब्धता के आधार पर इसकी पुष्टि करेगा।

सरकार ने सुरक्षा और साइबर जोखिमों पर मांगा स्पष्टीकरण

सरकार का कहना है कि किसी भी नए डिजिटल फीचर को लागू करने से पहले उसके सुरक्षा प्रभावों और संभावित दुरुपयोग का आकलन आवश्यक है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि यूजरनेम आधारित पहचान का उपयोग फर्जी प्रोफाइल, ऑनलाइन धोखाधड़ी, प्रतिरूपण (Impersonation) या अन्य साइबर अपराधों के लिए न किया जा सके। इसी उद्देश्य से Meta से तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था, यूजर सत्यापन प्रणाली, शिकायत निवारण तंत्र और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग की प्रक्रिया पर विस्तृत जानकारी मांगी गई है। सरकार इन पहलुओं की समीक्षा के बाद ही भारत में फीचर के रोलआउट पर निर्णय लेगी।

प्राइवेसी और सुरक्षा के बीच संतुलन पर सरकार का फोकस

Meta का कहना है कि Username Feature का उद्देश्य यूजर्स को नए संपर्कों के साथ मोबाइल नंबर साझा किए बिना बातचीत शुरू करने का विकल्प देना है, जिससे व्यक्तिगत गोपनीयता को बेहतर बनाया जा सके। वहीं साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पहचान सत्यापन और सुरक्षा नियंत्रण पर्याप्त नहीं हुए तो फर्जी या मिलते-जुलते यूजरनेम बनाकर लोगों को भ्रमित करने की कोशिश की जा सकती है। Meta ने कहा है कि हाई-प्रोफाइल व्यक्तियों के यूजरनेम सुरक्षित रखने, दुरुपयोग की पहचान करने और सुरक्षा उपायों को मजबूत बनाने के लिए कई तकनीकी व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं। सरकार फिलहाल इन्हीं सुरक्षा उपायों का मूल्यांकन कर रही है ताकि गोपनीयता और साइबर सुरक्षा के बीच संतुलन सुनिश्चित किया जा सके।