Monsoon / उत्तराखंड में मॉनसून सक्रिय, भूस्खलन से बद्रीनाथ हाईवे बंद, कई जिलों में बारिश का व्यापक असर
उत्तराखंड में मॉनसून सक्रिय होने के साथ कई जिलों में लगातार वर्षा दर्ज की गई है, जिससे सड़क संपर्क, बिजली आपूर्ति और चारधाम यात्रा प्रभावित हुई है। प्रशासन ने विभिन्न जिलों में एहतियाती कदम उठाते हुए सड़कें खुलवाने, राहत कार्य और मौसम संबंधी सलाह जारी की है।
देहरादून
मॉनसून की वर्षा से कई जिलों में जनजीवन प्रभावित
उत्तराखंड में मॉनसून के सक्रिय होने के बाद राज्य के अधिकांश जिलों में लगातार वर्षा दर्ज की जा रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, चमोली, हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर, बागेश्वर, देहरादून और चंपावत सहित कई क्षेत्रों में व्यापक बारिश हुई है। लगातार वर्षा के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ा है, जबकि विभिन्न स्थानों पर भूस्खलन और मलबा आने से सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने के साथ राहत एवं बहाली कार्य तेज कर दिए हैं। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक अधिकांश क्षेत्रों में मध्यम से भारी वर्षा की संभावना जताई है और लोगों से मौसम संबंधी एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है।
बागेश्वर में 14 सड़कें बंद, करीब 50 गांवों का संपर्क प्रभावित
बागेश्वर जिले में लगातार बारिश के कारण पहाड़ियों से भारी मात्रा में मलबा आने से 14 ग्रामीण सड़कें बंद हो गई हैं, जिससे करीब 50 गांवों की आवाजाही प्रभावित हुई है। कई क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति भी बाधित होने की सूचना है। मौसम विभाग द्वारा जारी ऑरेंज अलर्ट को देखते हुए जिला प्रशासन ने 2 जुलाई को कक्षा 1 से 12 तक के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों तथा आंगनवाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित किया है। सड़कों को बहाल करने के लिए जेसीबी मशीनों और अन्य संसाधनों की सहायता से लगातार मलबा हटाने का कार्य किया जा रहा है, जबकि प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
भूस्खलन से बद्रीनाथ और ऋषिकेश-बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग प्रभावित
चमोली जिले के गुलाबकोटी क्षेत्र में भारी मलबा और चट्टानें आने से बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग अस्थायी रूप से बंद हो गया, जिससे बद्रीनाथ धाम की ओर जाने वाले वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। वहीं रुद्रप्रयाग जिले के सिरोबगड़ क्षेत्र में ऋषिकेश-बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग भी भूस्खलन के कारण अवरुद्ध हो गया, जिसके चलते चारधाम यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं और अन्य यात्रियों को मार्ग खुलने का इंतजार करना पड़ा। संबंधित विभागों की टीमें मशीनों की सहायता से मलबा हटाने और यातायात बहाल करने में जुटी हैं। बद्रीनाथ धाम में दर्शन जारी हैं, हालांकि खराब मौसम के कारण श्रद्धालुओं की संख्या में कमी दर्ज की गई है।
केदारनाथ हेली सेवा और रिवर राफ्टिंग पर अस्थायी रोक
मौसम की स्थिति और यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केदारनाथ धाम के लिए संचालित सभी आठ हेली सेवाओं पर फिलहाल 5 जुलाई तक रोक लगा दी गई है। वहीं गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण ऋषिकेश में रिवर राफ्टिंग गतिविधियों को भी अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मौसम की समीक्षा के बाद ही इन सेवाओं को दोबारा शुरू करने पर निर्णय लिया जाएगा। यात्रियों और पर्यटकों से अनावश्यक यात्रा से बचने तथा केवल आधिकारिक मौसम और प्रशासनिक निर्देशों के आधार पर यात्रा करने की अपील की गई है।
टिहरी, सोनप्रयाग और यमुनोत्री मार्ग पर भी राहत कार्य जारी
टिहरी जिले में लगातार वर्षा के कारण भिलंगना क्षेत्र के नदी-नालों का जलस्तर बढ़ गया है। राज्य मार्ग-77 (नरेंद्रनगर-रानीपोखरी मार्ग) तथा राष्ट्रीय राजमार्ग-34 पर कई स्थानों पर भूस्खलन और मलबा आने से यातायात प्रभावित हुआ। पुलिस और प्रशासन ने प्रभावित मार्गों पर बैरिकेडिंग कर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की है तथा संबंधित विभागों के सहयोग से सड़कें खोलने का कार्य जारी है। वहीं सोनप्रयाग-मुनकटिया यात्रा मार्ग पर पहाड़ी से पत्थर गिरने के कारण मार्ग अवरुद्ध हो गया, जबकि विकासनगर क्षेत्र में यमुनोत्री-उत्तरकाशी राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक बड़े पत्थर के वाहन पर गिरने से वाहन क्षतिग्रस्त हो गया। राहत एवं बचाव दल ने यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालकर मार्ग को दोबारा यातायात योग्य बनाने का कार्य किया।
बारिश के आंकड़े और आपदा प्रबंधन की तैयारियां
आईएमडी के अनुसार बुधवार तक बागेश्वर में 98 मिमी, देहरादून में 62 मिमी, पिथौरागढ़ में 60 मिमी तथा चंपावत में 60 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में मध्यम वर्षा तथा कुछ स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना व्यक्त की है। संभावित आपदा स्थितियों से निपटने की तैयारियों के तहत 2 जुलाई को राज्य के विभिन्न स्थानों पर आपदा प्रबंधन विभाग, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के सहयोग से मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी, ताकि राहत एवं बचाव तंत्र की तैयारियों का आकलन किया जा सके।