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कांगड़ा में परिवार ने विधवा बहू का कराया पुनर्विवाह, सास-ससुर ने निभाई अभिभावक की जिम्मेदारी

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 58 Mins Ago • 1 Min Read

पति की सड़क दुर्घटना में मृत्यु के बाद परिवार ने विधवा बहू के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उसके पुनर्विवाह का निर्णय लिया। कांगड़ा जिले के शाहपुर क्षेत्र में सास-ससुर ने अभिभावक की भूमिका निभाते हुए विवाह की सभी आवश्यक तैयारियां और पारंपरिक रस्में पूरी कर पुनर्विवाह की प्रक्रिया सम्मानपूर्वक संपन्न कराई।

कांगड़ा

पति की सड़क दुर्घटना के बाद लिया पुनर्विवाह का निर्णय

कांगड़ा जिले के शाहपुर उपमंडल के चंमडेरा गांव में एक परिवार ने अपने दिवंगत बेटे की पत्नी के पुनर्विवाह की व्यवस्था कर सामाजिक सहयोग का उदाहरण प्रस्तुत किया। परिवार ने बहू के भविष्य और सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुनर्विवाह का निर्णय लिया। विवाह की तैयारियों से लेकर सभी आवश्यक पारिवारिक और पारंपरिक व्यवस्थाएं सास-ससुर ने स्वयं पूरी कीं। विवाह स्थानीय मंदिर में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न कराया गया।

डेढ़ वर्ष पहले सड़क दुर्घटना में हुई थी पति की मृत्यु

जानकारी के अनुसार, चंमडेरा निवासी राजिंद्र कुमार की करीब डेढ़ वर्ष पहले एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। घटना के बाद उनकी पत्नी रंजना अपने ससुराल में ही परिवार के साथ रह रही थीं। परिवार ने परिस्थितियों का आकलन करने के बाद रंजना के भविष्य को प्राथमिकता देते हुए पुनर्विवाह का निर्णय लिया। इसके लिए उपयुक्त वर की तलाश की गई और दोनों परिवारों की सहमति के बाद विवाह की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

स्थानीय मंदिर में संपन्न हुआ विवाह

दो दिन पहले एक स्थानीय मंदिर में विवाह समारोह आयोजित किया गया, जिसमें दोनों परिवारों के सदस्य, रिश्तेदार और ग्रामीण शामिल हुए। विवाह सभी पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुआ। समारोह के दौरान ससुर ने अभिभावक की भूमिका निभाते हुए कन्यादान की रस्म निभाई, जबकि सास ने विवाह की अन्य पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। विवाह के बाद नवदंपती को परिवार और उपस्थित लोगों ने शुभकामनाएं दीं।

परिवार के अन्य सदस्यों ने भी निभाई जिम्मेदारी

विवाह समारोह में रंजना के देवर इंद्र कुमार और सुरेंद्र पाल ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया। दोनों ने अपनी भाभी को परिवार के सदस्य के रूप में सम्मान देते हुए नए वैवाहिक जीवन के लिए घरेलू उपयोग का आवश्यक सामान और उपहार भेंट किए। विवाह की सभी रस्में पूर्ण होने के बाद निर्धारित परंपरा के अनुसार विदाई की प्रक्रिया संपन्न की गई। परिवार के इस निर्णय को स्थानीय स्तर पर पुनर्विवाह के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण से जोड़कर देखा जा रहा है।