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इटरनल यूनिवर्सिटी बडू साहिब में बौद्धिक सम्पत्ति अधिकार विषय पर कार्यशाला आयोजित

Ankita • 14 Mar 2024 • 1 Min Read

HNN/ नाहन

इटरनल यूनिवर्सिटी बडू साहिब में एक दिवसीय बौद्धिक सम्पत्ति अधिकार विषय पर एचपीएपीआईसी द्वारा कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस चौथी एक दिवसीय कार्यशाला में बौद्धिक संपदा अधिकारों के महत्व पर चर्चा हुई और कुलपति एवं कलगीधर ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. दविंदर सिंह ने कहा कि आज के तेजी से विकसित हो रहे शैक्षणिक और तकनीकी परिदृश्य में बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) के महत्व पर प्रकाश डाला।

प्रो-वाइस चांसलर डॉ. एएस अहलूवालिया ने इस बात पर जोर दिया कि आईपीआर मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान करता है और नवाचार को बढ़ावा देने, बौद्धिक पूंजी की रक्षा करने और आईपीआर पर व्यापक वैश्विक चर्चा में योगदान देने के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता निश्चित की। मुख्य अतिथि सीएसआईआर के पूर्व निदेशक डॉ. गिरीश साहनी ने वैज्ञानिक जिज्ञासा से लेकर पेटेंट के माध्यम से प्रौद्योगिकी तक को अपने भाषण का केंद्रबिंदु रखा।

डॉ. रूना मेहता ठाकुर, प्रोफेसर कानून विभाग एचपीयू शिमला ने बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) के परिमाण और महत्व से जुड़ी जटिलताओं पर प्रकाश डाला। डॉ. ठाकुर ने बौद्धिक संपदा अधिकारों के बहुमुखी आयामों को उजागर किया। डॉ मेहता ने नवप्रवर्तकों के हितों की रक्षा करने में पेटेंट, ट्रेडमार्क, कॉपीराइट और व्यापार रहस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला।

डॉ. श्वेता सेन संस्थापक इंटीग्रम आईपी पेटेंट एजेंट (आईएन/पीए नंबर-3010) साहिबजादा अजीत सिंह नगर मोहाली पंजाब ने बौद्धिक संपदा अधिकार: क्या, कब, क्यों और कैसे पर अपने विचार व्यक्त किए। बौद्धिक संपदा पर चर्चा करते हुए, डॉ. सेन ने आईपी अधिकारों को सुरक्षित करने में समय के महत्वपूर्ण महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. श्वेता सेन ने बौद्धिक संपदा संरक्षण की मांग के पीछे की प्रेरणाओं को स्पष्ट रूप से समझाया।

इंटीग्रम आईपी के संस्थापक और एक अनुभवी पेटेंट एजेंट के रूप में, उनकी अंतर्दृष्टि ने आज के गतिशील और अभिनव परिदृश्य में बौद्धिक रचनाओं की सुरक्षा की जटिलताओं को समझने की व्यावहारिक और सुलभ समझ प्रदान की। एचपीपीआईसी (हिमाचल प्रदेश पेटेंट सूचना केंद्र) में बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) सेल के समन्वयक डॉ. शशि धर ने एक सम्मोहक सत्र की मेजबानी की।

जिसमें बौद्धिक संपदा अधिकारों और भौगोलिक संकेत (जीआई) के महत्व का व्यापक अवलोकन प्रदान किया गया। उपस्थित लोगों में अकादमिक मामलों के डीन डॉ. टीएस बनिपाल, डीन पीजीएस बीएस सोहल, अतिरिक्त रजिस्ट्रार डॉ. एसके चौहान और विभिन्न कॉलेजों के डीन, विभागों के प्रमुख और सभी संकाय सदस्य और छात्र शामिल थे। इस कार्यशाला के आयोजन में समन्वयक डॉ. इमरान और संयोजक डॉ. पूनम की बहुत अहम् भूमिका रही।