अब फसलों को लग सकता है दीमक, करे दवा का छिड़काव…
HNN / सोलन
डा. वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के विज्ञानियों ने किसानों को सलाह दी है कि फसलों को पाले से बचाने के लिए शाम के समय हल्की सिंचाई करें। सब्जियों की नर्सरी पर पालीशीट या घास का प्रयोग करें। वर्तमान मौसम में दीमक फसलों को नुक्सान पहुंचा सकता है, इसलिए किसान क्लोरोपाइरीफास 20 ई.सी चार मिलीलीटर पानी में छिड़काव करें।
कीटों से बचाव के लिए लाइट ट्रैप का प्रयोग करें। बता दे कि दीमक पोलीफेगस कीट होता है ,यह सभी फसलो को बर्बाद करता है। भारत में फसलों को करीबन 45 % से ज्यादा नुक्सान दीमक से होता है। वैज्ञनिकों के अनुसार दीमक कई प्रकार की होती हैं। दीमक भूमि के अंदर अंकुरित पौधों को चट कर जाती हैं। कीट जमीन में सुरंग बनाकर पौधों की जड़ों को खाते हैं। प्रकोप अधिक होने पर ये तने को भी खाते हैं।
इस कीट की सूड़ियां मिट्टी की बनी दरारों अथवा गिरी हुई पत्तियों के नीचे छिपी रहती हैं। रात के समय निकलकर पौधो की पत्तियों या मुलायम तनों को काटकर गिरा देती है। आलू के अलावा टमाटर, मिर्च, बैंगन, फूल गोभी, पत्ता गोभी, सरसों, राई, मूली,गेहू आदि फसलो को सबसे ज्यादा नुक्सान होता है।
दीमक की रोकथाम
दीमक से बचाव के लिए खेत में कभी भी कच्ची गोबर नहीं डालनी चाहिए।
कच्ची गोबर दीमक का प्रिय भोजन होता है।
बीजों को बिवेरिया बेसियाना फफूंद नाशक से उपचारित किया जाना चाहिए।
एक किलो बीजों को 20 ग्राम बिवेरिया बेसियाना फफुद नाशक से उपचारित करके बोनी चाहिए।
दीमक नियंत्रण के लिए रासायनिक दवा
लिंडेन पाउडर 1 किग्रा /10 लीटर पानी में घोलकर 1 एकड़ खेत में बुआइ से पहले करना चाहिए
एक किलो बीजों को चार मिलीलीटर क्लोरोपाइरीफास दवा से उपचारित किए जा सकते हैं
दीमक को नियंत्रित करने के लिए दो लीटर क्लोरोपाइरीफास दवा को 4 किलो रेत में मिलाकर प्रति हैक्टैयर बुवाई के समय खेत में डालना होता है।