जीआर मुसाफिर को छोड़कर अभी नहीं है सिरमौर में किसी की भी लहर
HNN / सिरमौर
जैसे-जैसे चुनाव तिथि नजदीक आती जा रही है वैसे वैसे मतदाताओं की नब्ज भी धीमी पड़ गई है। दोनों प्रमुख दलों के अपने-अपने सोशल मीडिया पर चल रही हाईटेक वार में जनता की नजर अब वरिष्ठ पत्रकारों से जुड़े डिजिटल मीडिया प्रिंट मीडिया आदि पर जा रही है। जनता इस पशोपेश में है कि प्रदेश में हालात किसके पक्ष में जा रहे हैं। हालांकि भाजपा अपने प्रचार प्रसार में मिशन रिपीट का दावा कर रही है, मगर जनता यह अच्छी तरह जान रही है कि जब कर्मचारी से लेकर किसान और बागवान सहित आम जनमानस महंगाई से बुरी तरह त्रस्त है तो मिशन रिपीट कैसे होगा।
वही, सबसे ज्यादा बगावत अगर किसी दल में है तो वह भाजपा में है। मौजूदा समय भाजपा के 22 जबकि कांग्रेस के सिर्फ 7 बागी ही मैदान में है। ऐसे में जनता पूरी तरह से किस सोच में है कि आखिर कुछ खास प्रिंट मीडिया मिशन रिपीट कैसे साबित कर सकते हैं। जनता उन खास प्रिंट मीडिया में विज्ञापनों की भी भरमार अच्छी तरह से देख रही है। हमीरपुर, कांगड़ा, बिलासपुर सरकार का भविष्य निर्धारित करने में अहम भूमिका अदा करते हैं। मगर इन सभी विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा की हालत काफी बुरी होती नजर आ रही है।
सिरमौर की बात की जाए तो यहां समीकरण बड़ी तेजी से बदल रहे हैं। फिलहाल जिसे लहर कहा जाता है वह सिर्फ जीआर मुसाफिर को छोड़कर किसी के पक्ष में जाती नजर नहीं आ रही है। जिला सिरमौर में भाजपा की ओर से राजनीति के चाणक्य माने जाने वाले डॉ राजीव बिंदल अपने एक प्रयोग में सफल हो चुके हैं। हालांकि कांग्रेस के अजय सोलंकी इस बार कड़ी टक्कर देते हुए नजर आ रहे हैं। मगर कांग्रेस के कुछ ऐसे प्रमुख चेहरे हैं जो जातिगत आधार पर कुछ अपने व्यक्तिगत आधार पर भितरघात कर रहे हैं। वही, रमजान अली एक प्रोजेक्टेड चेहरा है।
हां अगर रमजान अली की जगह इकबाल चौधरी आजाद मैदान में उतरते तो कांग्रेस के लिए ज्यादा घातक साबित होते। बिंदल को विकास के मुद्दे पर घेरना कांग्रेस के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। विकास के नाम पर ही कई ऐसे कांग्रेसी गढ़ भी है जो बिंदल के गुणगान कर रहे हैं। बिंदल को अगर नुक्सान हो रहा है तो कुछ अपने लोगों के किए गए कार्यों की वजह से। जिनमें एक शराब माफिया जो कि खनन के व्यवसाय से भी जुड़ा हुआ है। उसकी वजह से यह ग्रामीण क्षेत्र विधायक से नाराजगी ना रखते हुए व्यक्ति विशेष को सबक सिखाने के चक्कर में विधायक के खिलाफ जाएगा।
भाजपा का बी गुट पूरी तरह बिंदल के खिलाफ है। सोलंकी सिंपैथी फैक्टर के साथ जातीय और निजी संबंधों के चलते धीरे धीरे मजबूती की ओर बढ़ रहे हैं। हालांकि सोलंकी बिंदल पर इतने आक्रमक नजर नहीं आ रहे हैं, आलोचना की जगह वह जनता से एक बार मौका दिए जाने की अपील जरूर कर रहे हैं। वही यदि हम पच्छाद विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो यहां जीआर मुसाफिर ने रीना कश्यप जो कि भाजपा की ओर से प्रत्याशी है उसकी राह आसान कर दी है। मगर जो अब मौजूदा समय समीकरण निकल कर आ रहे हैं वह कहीं ना कहीं जीआर मुसाफिर को लगातार लगे हार के दाग से धोते हुए नजर आ रहे हैं।
एक बात ओर भी यहां पर नजर आ रही है जिस पर गौर करना जरूरी है। वह है दयाल प्यारी के साथ बिरादरी वोट बैंक। यह वोट बैंक इस बार रीना के पक्ष में कम दयाल प्यारी के फेवर में ज्यादा नजर आ रहा है। कांग्रेस का कार्डर वोट अभी भी मजबूती के साथ कांग्रेस के प्रत्याशी की ओर है। इस विधानसभा क्षेत्र में राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी के सुशील भृगू तथा आम आदमी पार्टी के अजय सिंह, सीपीआईएम के आशीष कुमार अगर किसी वोट बैंक को नुक्सान पहुंचा रहे हैं तो वह है सत्ता पक्ष। ऐसे में चुनाव से 2 दिन पहले की क्या राजनीति और समीकरण होंगे यह पच्छाद का भविष्य निर्धारित करेगा।
श्री रेणुका जी विधानसभा सीट पर आम जनता भाजपा की ओर से रूप सिंह और पूर्व में प्रत्याशी रहे बलबीर सिंह को समर्थन दे रही थी। इस बार जनता ने इन दोनों चेहरों में से किसी एक को टिकट दिए जाने पर यहां कांग्रेस के किले को धराशाई करने का सोच रखा था। मगर एंड समय पर नारायण सिंह की एंट्री ने इस विधानसभा क्षेत्र में भाजपा को ना केवल इस विधानसभा चुनाव के लिए बल्कि आने वाले अगले विधानसभा चुनाव के लिए भी बैकफुट पर कर दिया है। इस विधानसभा क्षेत्र में जो सच्चा और पक्का हाटी है वह इसके राजनीतिकरण होने के बाद भाजपा से काफी नाराज है। ऐसे में विनय कुमार की राहें पूरी तरह से सुरक्षित नजर आ रही है।
पांवटा साहिब में सेब, कैंची, हेलीकॉप्टर जीत के उद्देश्य से नहीं बल्कि भाजपा के प्रत्याशी सुखराम को पॉलिटिकल सायनाइड चटाने के लिए मैदान में डटे हुए हैं। यहां सबसे बड़ी बात तो यह है और हैरानी की भी कि सब जगह जेपी नड्डा बागियों को मनाने के लिए नजर आए, मगर सुखराम चौधरी की सपोट करने के लिए महामहिम किसी भी तरह से नजर नहीं आए। मदन मोहन शर्मा जेपी नड्डा के खास माने जाते थे टिकट ना मिलने से वे भी नाराज हैं। ऐसे में इस विधानसभा क्षेत्र में हाटियों की ओर से मनीष तोमर और बिरादरी की तरफ से सुनील चौधरी, रोशन लाल चौधरी उर्फ शास्त्री बड़े बैरियर बन गए हैं। हालांकि अनिंदर सिंह नॉटी हमेशा की तरह इस बार भी मैदान से हट गए हैं।
वह कहीं ना कहीं सुखराम चौधरी को हल्का फुल्का सहारा भी देंगे। मैदान में आम आदमी की ओर से पत्रकार अश्वनी वर्मा मैदान में है। वही इस विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस का नाम लगभग लुप्तप्राय नजर आ रहा है। हरप्रीत सिंह और उनके समर्थक अपने पुराने दोस्त के साथ इस बार आम आदमी बनते नजर आ रहे हैं। हालांकि इस वोट बैंक में यानी सिख वोट बैंक में सुखराम काफी सेंधमारी कर चुके हैं। कुल मिलाकर कहां जाए तो यहां त्रिकोणीय मुकाबले में सुखराम चौधरी की राहें काफी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
शिलाई विधानसभा क्षेत्र की बात की जाए तो कांग्रेस के हर्षवर्धन चौहान लगातार लोकप्रियता के ग्राफ को बढ़ाते हुए जा रहे हैं। किए गए विकास कार्यों के बावजूद बलदेव तोमर की रणनीति में एक कुशल रणनीतिकार की काफी कमी नजर आ रही है। इस विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस की ओर से जिला परिषद के चेयरमैन रहे दिलीप सिंह पूरी तरह से भाजपा प्रत्याशी के फेवर में नजर आ रहे हैं। बावजूद इसके भाजपा प्रत्याशी के लिए हर्षवर्धन चौहान अभी भी चुनौती बने हुए हैं।
कुल मिलाकर कहा जाए तो जिला सिरमौर में अभी तक किसी की भी लहर चलती हुई नजर नहीं आ रही है। जीआर मुसाफिर ही एक ऐसा चेहरा है जो आजाद उम्मीदवार के रूप में मैदान में है, सिंपैथी वोट के आधार पर उनकी लहर चर्चा का विषय बन चुकी है। अब यदि इस जिला में भाजपा बैकफुट जाती है तो उसकी बड़ी वजह कांग्रेस नहीं बल्कि भाजपा के कमजोर संगठन को माना जाएगा।

