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आखिर पीएम नरेंद्र मोदी कर ही गए डैमेज कंट्रोल

Ankita • 2 Jun 2024 • 1 Min Read


74.65 फीसदी वोटिंग दर ने कश्यप की जीत और मार्जिन का पैमाना भी किया तय

HNN/ नाहन

17 विधानसभा के सात राउंड और अथक डोर टू डोर प्रचार की थकावट से चूर शिमला पार्लियामेंट्री के प्रत्याशी सुरेश कश्यप के लिए अब दिल्ली दूर नहीं रही है।
जिला से मिला 74.65 फ़ीसदी का मतदान कहीं ना कहीं एक अच्छी जीत के मार्जिन का संकेत भी दे रहा है।

प्रदेश भाजपा में राजनीति के चाणक्य माने जाने वाले डॉ. राजीव बिंदल ने पूर्व स्थिति को भांपते हुए स्टार प्रचारक की रणनीति में किया बदलाव कारगर साबित हो रहा है।
डैमेज को कंट्रोल करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा सोलन में न रखवा कर नाहन में आयोजित की गई थी।

भाजपा की यह रणनीति अपर शिमला में कांग्रेस की घेराबंदी का एक बड़ा तोड़ था। बड़ी बात तो यह थी कि कांग्रेस के पास सुरेश कश्यप के खिलाफ मिस्टर इंडिया वाला फार्मूला के सिवा कोई और मुद्दा था ही नहीं। वहीं भाजपा भी मीडिया मैनेजमेंट कर पाने में काफी ज्यादा ना कामयाब थी।

बावजूद इसके डिजिटल मीडिया के द्वारा कांग्रेस के अस्त्र को भी नाकामयाब कर दिया गया। डिजिटल और सोशल मीडिया पर सुरेश कश्यप के द्वारा सांसद निधि का शपथ प्रतिशत सभी विधानसभा क्षेत्र में खर्च किया जाना साबित भी हुआ। यही नहीं संसद के साथ-साथ प्रदेश भाजपा संगठन की जिम्मेवारी भी उनके ही कंधों पर थी।

बड़ी बात तो यह भी थी कि उन्होंने पूर्व में रहे भाजपा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल के द्वारा बनाई गई कार्यकारिणी को भी बिल्कुल नहीं बदला था। ऐसे में संगठन और कार्यकर्ता पूरी तत्परता के साथ सुरेश कश्यप के प्रचार में डटा रहा। वहीं कांग्रेस शिमला पार्लियामेंट्री सीट पर जीत के बहुत करीब थी। बावजूद इसके सुरेश कश्यप की घेराबंदी करने के लिए मुद्दों की बड़ी कमी थी।

यही नहीं कांग्रेस की रणनीति में आर्थिक बदहाली और केंद्रीय नेताओं की अनदेखी ही चुनावी मुद्दा बना हुआ था जिसमें कहीं भी कूटनीतिक प्रभाव नजर नहीं आ पाया।
भाजपा के द्वारा अपने प्रत्याशी के प्रचार में मोदी नाम को सबसे ज्यादा कैच किया गया। प्रचार में सुरेश कश्यप के लिए नहीं बल्कि केंद्र में मोदी के लिए वोट की मांग की गई।

बड़ी बात तो यह है कि सुरेश कश्यप की जीत को सुनिश्चित करने के लिए फील्ड मार्शल कहे जाने वाले पूर्व मंत्री सुखराम चौधरी, डॉ. राजीव बिंदल, बलदेव तोमर, विधायक रीना कश्यप सभी वर्चस्व की जंग के लिए मैदान में डटे हुए थे।

अब यदि बात की जाए डॉक्टर राजीव बिंदल की तो उनके हालात प्रचार में यह हो गए थे कि वह एक कार्यकर्ता के घर में दोपहर के समय वार्ड के राउंड के लिए पहुंचे। कार्यकर्ता के द्वारा बिंदल के लिए गर्मी से राहत हेतु कोल्ड कॉफी बनाई जा रही थी तो इस दौरान डॉ. राजीव बिंदल सोफे पर बैठे-बैठे ही सो गए।

करीब 20-25 मिनट की नींद लेने के बाद उन्होंने उठते ही कार्यकर्ता को साथ लिया और वार्ड के राउंड पर निकल गए। ऐसे बहुत से किस्से हैं जिसमें प्रचार केवल और केवल मोदी की जीत सुनिश्चित करने के लिए किया गया।
मजे की बात तो यह है कि इस पूरे चुनाव में सबसे ज्यादा नए मतदाता और युवा वर्ग ने अपने मत का प्रयोग किया।

युवा वर्ग ने केंद्र में एक बार फिर मोदी की डिमांड पर मोहर लगाई। हालांकि अभी परिणाम को 4 तारीख का इंतजार है। बावजूद इसके दोनों प्रत्याशियों की ना तो नींद आंखों में आ रही है और ना ही बेचैनी राहत की सांस ले पा रही है। वोट परसेंटेज के साथ-साथ मतदाताओं के मत का रुख एक अच्छे खासे जीत के मार्जिन को भी फोरकास्ट कर रहा है।