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Census 2027 / क्यूआर कोड से सत्यापित करें जनगणना कर्मी की पहचान, आज से शुरू हुआ पहला चरण

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 16 Jun 2026 • 1 Min Read

Census 2027 : हिमाचल प्रदेश में जनगणना-2027 का पहला चरण 16 जून से शुरू हो गया है। इस चरण के तहत मकान सूचीकरण और मकानों की गणना का कार्य किया जाएगा, जिसके लिए प्रदेशभर में प्रशिक्षित प्रगणकों और पर्यवेक्षकों की तैनाती की गई है। जन सुरक्षा और पहचान सत्यापन सुनिश्चित करने के लिए जनगणना कर्मियों के पहचान पत्रों पर क्यूआर कोड की व्यवस्था लागू की गई है।

शिमला

आज से शुरू हुआ जनगणना का पहला चरण

हिमाचल प्रदेश में जनगणना-2027 के प्रथम चरण का औपचारिक शुभारंभ मंगलवार से किया गया है। इस चरण के तहत मकान सूचीकरण (हाउस लिस्टिंग) और मकानों की गणना का कार्य किया जाएगा। जनगणना निदेशालय के अनुसार यह प्रक्रिया 16 जून 2026 से 15 जुलाई 2026 तक चलेगी। इस दौरान प्रदेश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक आवासीय, व्यावसायिक तथा अन्य प्रकार की इमारतों का विवरण दर्ज किया जाएगा। प्रथम चरण में मकानों की संख्या, उनकी उपयोगिता, उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं तथा परिवारों से संबंधित प्रारंभिक जानकारी एकत्र की जाएगी। इस कार्य के लिए प्रदेश के सभी जिलों में नियुक्त प्रगणकों और पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण पहले ही पूरा किया जा चुका है तथा उन्हें डिजिटल उपकरणों और मोबाइल एप्लीकेशन के उपयोग संबंधी दिशा-निर्देश भी प्रदान किए गए हैं।

क्यूआर कोड से होगी पहचान की पुष्टि

जनगणना कार्य निदेशालय ने नागरिकों की सुविधा और पहचान सत्यापन सुनिश्चित करने के लिए क्यूआर कोड आधारित व्यवस्था लागू की है। जनगणना ड्यूटी पर तैनात प्रत्येक प्रगणक और पर्यवेक्षक को आधिकारिक पहचान पत्र जारी किया गया है, जिस पर एक विशिष्ट क्यूआर कोड अंकित है। नागरिक घर आने वाले जनगणना कर्मी के आईडी कार्ड पर मौजूद क्यूआर कोड को अपने मोबाइल फोन से स्कैन कर उसकी पहचान, नियुक्ति और संबंधित क्षेत्र की जानकारी सत्यापित कर सकते हैं। निदेशालय के अनुसार यह व्यवस्था जनगणना प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने, फर्जी पहचान की संभावनाओं को कम करने तथा नागरिकों का विश्वास मजबूत करने के उद्देश्य से लागू की गई है। अधिकारियों का कहना है कि सत्यापन की यह प्रणाली जनगणना कार्य को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने में सहायक होगी।

वित्तीय जानकारी साझा न करने की सलाह

निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि जनगणना प्रक्रिया के दौरान किसी भी नागरिक से बैंक खाता संख्या, ओटीपी, एटीएम कार्ड विवरण, पासवर्ड, यूपीआई जानकारी या अन्य किसी प्रकार की वित्तीय जानकारी नहीं मांगी जाती है। जनगणना का उद्देश्य केवल जनसंख्या, परिवार, आवास और सामाजिक-आर्थिक स्थिति से संबंधित निर्धारित आंकड़े एकत्र करना है। नागरिकों से आग्रह किया गया है कि वे केवल अधिकृत जनगणना कर्मियों को ही आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि या भ्रामक सूचना की स्थिति में तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें। निदेशालय ने यह भी कहा है कि किसी प्रकार की शंका या सहायता के लिए नागरिक हेल्पलाइन नंबर 1855 पर संपर्क कर सकते हैं, जहां जनगणना से संबंधित आधिकारिक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

घर-घर जाकर एकत्र की जाएगी जानकारी

जनगणना-2027 इस बार बड़े स्तर पर डिजिटल माध्यम से संचालित की जा रही है। इसके तहत प्रगणक मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से सीधे डेटा संग्रह करेंगे, जिससे आंकड़ों के संकलन और सत्यापन की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी। निदेशालय के अनुसार जिन नागरिकों ने 1 जून से 15 जून के बीच ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से स्व-गणना (सेल्फ एन्यूमरेशन) पूरी कर ली है, वे अपनी स्व-गणना आईडी प्रगणकों को उपलब्ध करा सकते हैं। इससे पहले से दर्ज जानकारी का सत्यापन किया जा सकेगा। वहीं जिन परिवारों ने ऑनलाइन स्व-गणना नहीं की है, उनके घर जाकर प्रगणक निर्धारित प्रपत्रों के अनुसार जानकारी एकत्र करेंगे। यह प्रक्रिया 15 जुलाई 2026 तक जारी रहेगी। अधिकारियों के अनुसार डिजिटल जनगणना से आंकड़ों की गुणवत्ता में सुधार, डेटा प्रोसेसिंग में तेजी और प्रशासनिक योजनाओं के लिए अधिक सटीक जानकारी उपलब्ध होने की उम्मीद है।

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