आपदा प्रबंधन के लिए पूर्व चेतावनी तंत्र को मिली मंजूरी, राहत कार्यों में हेलीकॉप्टर तैनाती का भी निर्णय

jagat sing

राज्य सरकार ने आपदा से निपटने के लिए उठाया बड़ा कदम, सुप्रीम कोर्ट में अपील की भी मिली स्वीकृति

शिमला

पूर्व चेतावनी तंत्र से आपदा के प्रभाव को कम किया जाएगा

राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिमंडलीय उप-समिति की बैठक में प्रदेश में आपदा प्रबंधन और पुनर्वास से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए। समिति ने प्रदेश में अर्ली वार्निंग सिस्टम यानी पूर्व चेतावनी तंत्र स्थापित करने को मंजूरी दी है। इस सिस्टम के माध्यम से मौसम की सटीक निगरानी, पूर्वानुमान और समय रहते चेतावनी जारी की जाएगी, जिससे जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकेगा।

राहत और बचाव कार्यों में हेलीकॉप्टर किराये पर लिए जाएंगे

बैठक में निर्णय लिया गया कि आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों को तेजी से अंजाम देने के लिए जरूरत पड़ने पर हेलीकॉप्टर किराए पर लिए जाएंगे। इसके अलावा प्रभावित क्षेत्रों में अवरुद्ध सड़कों की बहाली, क्षतिग्रस्त पुलों के पुनर्निर्माण और जलापूर्ति योजनाओं की मरम्मत जैसे बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने पर भी चर्चा की गई।

एफसीए में रियायत को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अपील

उप-समिति की एक अन्य बैठक में छोटे और सीमांत किसानों के भूमि नियमितीकरण से जुड़े मामलों पर भी विचार किया गया। साथ ही यह निर्णय लिया गया कि हिमाचल प्रदेश सरकार एफसीए (वन संरक्षण अधिनियम) में रियायत के लिए सर्वोच्च न्यायालय में अपील करेगी, जिससे विकास कार्यों और किसानों दोनों को लाभ मिल सके।

वरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों की उपस्थिति में हुई बैठक

इस अवसर पर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी, अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) कमलेश कुमार पंत, विशेष सचिव (राजस्व-आपदा) डी.सी. राणा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।