आपदा में टूटा मकान, नहीं टूटी शिरगुल देवता के प्रति श्रद्धा और आस्था
नाहन की पंजाहल पंचायत के युवक ने लिखा और खुद ही गाया “देवा मेरे शिरगुला”
HNN/ नाहन
नाहन विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत पंजाहल पंचायत के छोटे से गांव सूर्या ननाह गांव के राकेश ठाकुर ने सिरमौर शिमला क्षेत्र के आराध्य देव शिरगुल देवता पर पहली बार भजन लिखा और गया भी है। राकेश ठाकुर ने पंजाब यूनिवर्सिटी से संगीत में मास्टर की डिग्री हासिल की है।

बावजूद इसके उन्होंने पहली बार सिरमौरी भाषा में आराध्य देव को समर्पित पहले भजन गाकर गायकी की दुनिया में पहला कदम रखा है। राकेश ठाकुर का गया हुआ यह भजन लोगों के दिलों की गहराइयों को भी छू रहा है। बता दें कि शिरगुल देव भगवान शिव का रूप है।
जिनका निवास स्थान सिरमौर की सबसे ऊंची धार्मिक चोटी चूड़धार पर निवास है। यह वह स्थान है जहां हर वर्ष देश प्रदेश के हजारों श्रद्धालु भोले बाबा के दर्शन करने आते हैं। बता दे कि हाल ही में भारी बारिशों के चलते राकेश ठाकुर के घर और जमीन को भारी नुकसान पहुंचा था।
घर में इतनी लंबी-लंबी दरारें आ चुकी थी कि घर अब गिरा तब गिरा वाली नौबत आ गई थी। यही नहीं उनके गांव में कई लोगों के घरों को और जमीन को भारी नुकसान पहुंचा था। पूरा का पूरा परिवार भारी मानसिक तनाव से गुजर रहा था। बावजूद इसके इस परिवार की अगाध श्रद्धा अपने इष्ट देव भगवान शिरगुल के प्रति जरा भी टस से मस न हो सकी।
राकेश ठाकुर को भगवान शिरगुल का ऐसा आशीर्वाद मिला कि उनके कंठ में साक्षात सरस्वती ने स्थान लेते हुए उनके द्वारा पहली बार गाये भजन को लोगों के दिलों में उतार दिया। राकेश ठाकुर के इस गीत को शुभम शर्मा ने संगीत दिया है।
राकेश ठाकुर की दिल की तमन्ना है कि वह अपने हिमाचल के लोक को खासतौर से सिरमौर के उन परंपरागत गानों को जो लुफ्तहांसा हो चुके हैं उन्हें फिर से सुर और स्वर देकर देश प्रदेश में अपनी खोई हुई पहचान को फिर से बनाया जाए। उन्होंने कहा कि गाना तो पहाड़ी भाषा में कोई भी गा सकता है मगर उसे गाने में सुर और स्वर का ज्ञान होना भी बहुत जरूरी है।