Loading...

एंट्री टैक्स और विधवा-अनाथ सेस पर मुख्यमंत्री सुक्खू का पलटवार, बोले—हर मुद्दे पर राजनीति कर रही भाजपा

PRIYANKA THAKUR 25 Mar 2026 Edited 25 Mar 1 min read

Himachalnow / शिमला

फास्टैग से जुड़ी तकनीकी व्यवस्था को मुद्दा बनाकर भ्रम फैलाया जा रहा है और सरकार ने इसे पारदर्शिता के लिए लागू किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एंट्री टैक्स कोई नई व्यवस्था नहीं है और इसे राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। विधवा-अनाथ सेस को लेकर भी उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

शिमला

हिमाचल प्रदेश में एंट्री टैक्स और विधवा-अनाथ सेस को लेकर सियासत तेज हो गई है। बुधवार को विधानसभा के भीतर और बाहर इस मुद्दे पर घमासान देखने को मिला। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि विपक्ष हर बात पर राजनीति करने में लगा है और जनता के बीच अनावश्यक भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है।विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान एंट्री टैक्स का मुद्दा भाजपा विधायक राकेश जम्वाल, सुखराम चौधरी और कांग्रेस विधायक राकेश कालिया के सवालों के बीच जोर-शोर से उठा। इसके बाद सदन के बाहर मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री सुक्खू ने स्पष्ट किया कि एंट्री टैक्स को लेकर जितना शोर मचाया जा रहा है, वास्तविकता उससे बिल्कुल अलग है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने एंट्री टैक्स व्यवस्था को केवल फास्टैग प्रणाली के साथ जोड़ा है, ताकि वसूली की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित हो सके। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के चलते कुछ तकनीकी बदलाव जरूर हुए हैं, लेकिन इसे जनता पर किसी बड़े आर्थिक बोझ के रूप में पेश करना पूरी तरह भ्रामक है।मुख्यमंत्री सुक्खू ने भाजपा और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष हर मुद्दे को राजनीतिक रंग देने में लगा हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हित में लिए जा रहे निर्णयों को भी भाजपा बेवजह विवाद का रूप दे रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एंट्री टैक्स कोई नई व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह प्रदेश में पिछले करीब 40 वर्षों से लागू है। ऐसे में इसे अचानक बड़ा मुद्दा बनाना केवल राजनीतिक स्टंट है।

उन्होंने कहा कि कुछ कीमतों में सामान्य बढ़ोतरी को भी बढ़ा-चढ़ाकर जनता के सामने पेश किया जा रहा है, जबकि हकीकत में ऐसा कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है जिससे आम आदमी पर भारी असर पड़े। मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा का मकसद केवल राजनीतिक लाभ लेना है, न कि जनता के हितों की रक्षा करना।मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पर भी तंज कसते हुए कहा कि उन्हें प्रदेश के लिए जरूरी आर्थिक सहायता और अधिकारों की बात करनी चाहिए, लेकिन वे हर मुद्दे को राजनीतिक हथियार बनाने में लगे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं को जनता को गुमराह करने के बजाय तथ्यों के आधार पर बात करनी चाहिए।

विधवा-अनाथ सेस पर भी मुख्यमंत्री ने दिया बड़ा स्पष्टीकरण विधवा और अनाथों के लिए प्रस्तावित सेस के मुद्दे पर भी मुख्यमंत्री ने स्थिति साफ करते हुए कहा कि अभी केवल ऐसा विधेयक पारित हुआ है, जो सरकार को सेस लगाने का अधिकार देगा। उन्होंने कहा कि अभी यह अंतिम रूप से लागू नहीं हुआ है और इसके लिए राज्यपाल की स्वीकृति के बाद ही आगे की प्रक्रिया तय होगी।मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के पास यह अधिकार रहेगा कि वह सेस लगाए या न लगाए, और यदि लगाए भी तो उसकी अधिकतम सीमा 5 रुपये तक ही निर्धारित की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार चाहे तो बहुत ही न्यूनतम दर—जैसे कुछ पैसे तक—का सेस भी तय कर सकती है। ऐसे में विपक्ष द्वारा इसे लेकर डर और भ्रम फैलाना पूरी तरह अनुचित है।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि सरकार का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों, विशेषकर विधवाओं और अनाथ बच्चों के लिए संसाधन जुटाना है, न कि जनता पर अनावश्यक बोझ डालना। उन्होंने कहा कि सामाजिक सरोकारों से जुड़े ऐसे मुद्दों पर भी भाजपा की राजनीति दुर्भाग्यपूर्ण है।मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि प्रदेश सरकार आर्थिक सुधार, पारदर्शिता और सामाजिक सुरक्षा के एजेंडे पर काम कर रही है और विपक्ष के शोर से सरकार अपने कदम पीछे नहीं हटाएगी।