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एनएचएआई की लापरवाही पर भड़का गुस्साबार-बार धंस रही सर्विस लेन पर सांसद से गुहार

Shailesh Saini 28 Mar 2026 Edited 28 Mar 1 min read

मुकेश गुप्ता बोले— करोड़ों खर्च, फिर भी जनता सड़क पर

हिमाचल नाऊ न्यूज़सोलन :

सोलन बाईपास पर न्यू कथेड के पास एनएचएआई द्वारा निर्मित फोरलेन सर्विस लेन का हिस्सा बार-बार धंसने और गिरने का मामला अब सिर्फ तकनीकी खामी नहीं, बल्कि सरकारी लापरवाही और जवाबदेही पर बड़ा सवाल बन गया है।

इस मुद्दे को लेकर भाजपा कार्यकर्ता एवं पूर्व प्रधान व्यापार मंडल सोलन मुकेश गुप्ता ने शिमला संसदीय क्षेत्र के सांसद सुरेश कश्यप को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप और स्थायी समाधान की मांग की है।

मुकेश गुप्ता ने अपने पत्र में साफ कहा है कि पिछले करीब चार वर्षों से यह सर्विस लेन बार-बार धंस रही है, लेकिन इसके बावजूद न तो एनएचएआई और न ही संबंधित एजेंसियां कोई स्थायी समाधान दे पाई हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कितनी बार एक ही सड़क बनाई जाएगी और कितनी बार जनता को मलबा, गड्ढे और बंद रास्ते झेलने पड़ेंगे?उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला अब इंजीनियरिंग फेलियर से आगे बढ़कर सरकारी तंत्र की नाकामी का प्रतीक बन चुका है।

जब विभाग के पास डिग्रीधारी इंजीनियर, तकनीकी स्टाफ और भारी बजट उपलब्ध है, तो फिर एक सर्विस लेन को बार-बार बनने और फिर धंसने के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है?मुकेश गुप्ता ने कहा कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद अगर सड़क बार-बार बह जाए, टूट जाए या धंस जाए, तो यह सिर्फ निर्माण की विफलता नहीं, बल्कि जनता के टैक्स के पैसे की खुली बर्बादी है।

उन्होंने इस पूरे मामले की तुलना चक्की मोड़ जैसी चेतावनी से करते हुए कहा कि यदि समय रहते पुख्ता कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में बड़ा हादसा भी हो सकता है।उन्होंने यह भी कहा कि गिरते मलबे के कारण न्यू कथेड को जाने वाली सड़क कई बार बंद या उबड़-खाबड़ हो जाती है, जिससे स्थानीय निवासियों, व्यापारियों और रोजाना आवाजाही करने वाले लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

सबसे ज्यादा खतरा दोपहिया वाहन चालकों और छोटे वाहनों को बना हुआ है।मामले को और गंभीर बताते हुए मुकेश गुप्ता ने कहा कि इस धंसती सर्विस लेन के नीचे स्थित एक मंदिर भी लगातार खतरे की जद में है। उन्होंने कहा कि यदि मलबा इसी तरह गिरता रहा, तो धार्मिक आस्था से जुड़ा यह स्थल भी क्षतिग्रस्त हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर संबंधित एजेंसियों पर होगी।

मुकेश गुप्ता ने सांसद सुरेश कश्यप से आग्रह किया है कि वे मौके का व्यक्तिगत निरीक्षण करें और एनएचएआई व प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही तय कराएं। उन्होंने मांग की कि बरसात से पहले इस हिस्से का स्थायी, मजबूत और वैज्ञानिक निर्माण कराया जाए, ताकि हर साल की तरह जनता को फिर संकट न झेलना पड़े।

इस पूरे मामले ने अब जनता बनाम सिस्टम की बहस को भी हवा दे दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ऐसे निर्माण कार्य सिर्फ ठेके, खर्च और खानापूर्ति तक सीमित रहेंगे, जबकि परेशान होती रहेगी आम जनता।

अब बड़ा सवाल यही है—क्या इस बार भी बरसात आएगी, सड़क धंसेगी और फाइलें चलती रहेंगी… या फिर सच में कोई जिम्मेदार जवाब देगा?