कांगड़ा में सभी जल विद्युत परियोजनाओं में पूर्व चेतावनी यंत्र 10 जून तक लगाने के निर्देश

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धर्मशाला

डीसी हेमराज बैरवा ने आदेश जारी कर प्रबंधकों को चेताया, लापरवाही पर होगी कार्रवाई

जिला दंडाधिकारी एवं उपायुक्त हेमराज बैरवा ने कांगड़ा जिले की सभी जल विद्युत परियोजनाओं के प्रबंधकों को निर्देश जारी किए हैं कि वे 10 जून, 2025 तक पूर्व चेतावनी यंत्र (अर्ली वार्निंग सिस्टम) अनिवार्य रूप से स्थापित करें। यह कदम आपदा प्रबंधन अधिनियम के अंतर्गत उठाया गया है ताकि आपातकालीन स्थितियों में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

कम से कम पांच किलोमीटर क्षेत्र में सुनाई दे अलार्म
डीसी ने स्पष्ट किया है कि इन यंत्रों का अलार्म कम से कम पांच किलोमीटर के दायरे को कवर करना चाहिए ताकि नदी किनारे या नीचे बसे गांवों तक खतरे की जानकारी समय रहते पहुंचे। इसके अतिरिक्त, सभी परियोजनाओं को मासिक रिपोर्ट जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को भेजनी होगी।

एसडीएम करेंगे फील्ड निरीक्षण
प्रत्येक उपमंडलाधिकारी को निर्देशित किया गया है कि वे अपने क्षेत्र की जल विद्युत परियोजनाओं का फील्ड निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार करें और उसे समय पर जिला स्तर पर भेजें। रिपोर्ट के आधार पर समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।

लापरवाही पर होगी कड़ी कार्रवाई
डीसी बैरवा ने कहा कि आदेशों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम की धाराओं के अंतर्गत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जल विद्युत परियोजनाएं नदियों पर होने के कारण बाढ़, बादल फटने या बांध टूटने जैसी आपदाओं की संभावनाएं अधिक होती हैं, ऐसे में पूर्व चेतावनी तंत्र बेहद जरूरी है।

आपदा प्रबंधन की प्रभावी रणनीति भी जरूरी
डीसी ने यह भी कहा कि जल विद्युत परियोजनाओं के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली के साथ-साथ मजबूत आपदा प्रबंधन योजनाएं और बाढ़ पूर्वानुमान प्रणाली तैयार करना भी आवश्यक है। इससे संभावित खतरों को समय रहते नियंत्रित किया जा सकेगा और जानमाल की रक्षा की जा सकेगी।