कांग्रेस आई तो नाकामियों का हिसाब लेंगे’, नगर परिषद चुनाव से पहले बिंदल का बड़ा सियासी संदेश
सात-सात वोटों के गणित में फंसी सत्ता की कुर्सी, सोमवार को खुलेगा राजनीतिक रणनीति का राज
हिमाचल नाऊ न्यूज़ नाहन
नाहन नगर परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर बना सस्पेंस सोमवार को समाप्त हो जाएगा। 17 मई को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से करीब एक माह से अधिक समय तक चली राजनीतिक प्रतीक्षा के बाद आखिरकार चुनाव की तारीख तय हो चुकी है। अब पूरे शहर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नगर परिषद की सत्ता पर भाजपा का कब्जा होगा या कांग्रेस बाजी मार जाएगी।
नगर परिषद के 13 वार्डों में हुए चुनाव में भाजपा समर्थित सात और कांग्रेस समर्थित छह पार्षद जीतकर आए थे। हालांकि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में नाहन विधायक अजय सोलंकी के वोट के शामिल होने से पूरा राजनीतिक गणित बदल गया है।
अब दोनों पक्ष सात-सात वोटों के आंकड़े पर खड़े दिखाई दे रहे हैं।रविवार को नाहन में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल से जब पूछा गया कि क्या भाजपा इस चुनाव में कोई ट्रंप कार्ड खेलने जा रही है, तो उन्होंने संकेतों में बड़ा राजनीतिक संदेश दिया।
बिंदल ने कहा कि अब चुनाव में एक बड़ा वोट भी शामिल हो चुका है और भाजपा को अध्यक्ष-उपाध्यक्ष बनाने की कोई विशेष चिंता नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस नगर परिषद पर काबिज होती है तो भाजपा के पार्षद अगले एक वर्ष तक परिषद की कार्यप्रणाली, जनता के मुद्दों और संभावित नाकामियों को लेकर संघर्ष करेंगे।
राजनीतिक विश्लेषक बिंदल के इस बयान को सामान्य प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति के रूप में देख रहे हैं। भाजपा फिलहाल अपने पत्ते पूरी तरह खोलती नजर नहीं आ रही। पार्टी की ओर से अब तक किसी संभावित उम्मीदवार को लेकर खुला समर्थन सामने नहीं आया है।
इसके पीछे यह भी माना जा रहा है कि किसी एक नाम पर खुलकर दांव लगाने से पार्षदों के भीतर असंतोष की स्थिति पैदा हो सकती है।दूसरी ओर कांग्रेस भी पूरी सतर्कता के साथ कदम बढ़ा रही है। विधायक अजय सोलंकी ने अब तक चुनावी प्रक्रिया में सार्वजनिक रूप से सीधा हस्तक्षेप करने से दूरी बनाए रखी है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इसके पीछे केवल नगर परिषद का चुनाव नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनावों की दूरगामी रणनीति भी जुड़ी हुई है। कांग्रेस नहीं चाहती कि स्थानीय स्तर पर किसी प्रकार की गुटबाजी या असंतोष भविष्य में राजनीतिक नुकसान का कारण बने।
बराबरी के आंकड़ों ने चुनाव को बेहद रोचक बना दिया है। ऐसे में सबसे ज्यादा चर्चा क्रॉस वोटिंग की संभावना को लेकर हो रही है। यदि किसी भी पक्ष का एक पार्षद पाला बदलता है तो पूरा समीकरण बदल सकता है। वहीं राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि यदि दोनों पक्ष अपने-अपने वोट सुरक्षित रखने में सफल रहते हैं तो स्थिति और भी दिलचस्प हो सकती है।
फिलहाल नाहन नगर परिषद की सत्ता की कुर्सी सात-सात वोटों के गणित में उलझी हुई है। भाजपा और कांग्रेस दोनों खेमे अपने-अपने दावों के साथ मैदान में हैं, लेकिन अंतिम फैसला सोमवार को होने वाला मतदान ही करेगा। अब देखना यह होगा कि जीत किसी राजनीतिक रणनीति की होती है, किसी गुप्त क्रॉस वोटिंग की या फिर आखिरी क्षण तक चले सस्पेंस की।