कांग्रेस ने फिर साधा मुसाफिर कार्ड, पच्छाद की राजनीति में बढ़ी हलचल
Himachalnow / सराहां
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस ने पच्छाद की राजनीति में एक बार फिर बड़ा संकेत दिया है। जी. आर. मुसाफिर को कार्यसमिति में शामिल किए जाने से राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। इस फैसले को संगठन और सत्ता के बीच संतुलन साधने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
राजगढ़
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस ने एक बार फिर पच्छाद की राजनीति में बड़ा संदेश देने की कोशिश की है
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस ने एक बार फिर पच्छाद की राजनीति में बड़ा संदेश देने की कोशिश की है। वरिष्ठ नेता जी. आर. मुसाफिर को प्रदेश कांग्रेस कार्यसमिति का सदस्य बनाए जाने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। यह नियुक्ति सिर्फ संगठनात्मक फेरबदल नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे कांग्रेस द्वारा पुराने और प्रभावशाली चेहरों को फिर से साधने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
जी. आर. मुसाफिर प्रदेश की राजनीति का बड़ा और अनुभवी नाम रहे हैं
जी. आर. मुसाफिर प्रदेश की राजनीति का बड़ा और अनुभवी नाम रहे हैं। वह पच्छाद विधानसभा क्षेत्र से सात बार विधायक रह चुके हैं और लंबे समय तक कांग्रेस की राजनीति के केंद्र में रहे। अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने कैबिनेट मंत्री के रूप में कई अहम विभाग संभाले, वहीं हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष जैसे संवैधानिक और प्रतिष्ठित पद पर भी जिम्मेदारी निभाई।
सबसे अहम बात यह मानी जा रही है कि मौजूदा समय में प्रदेश में कांग्रेस की ही सरकार है
सबसे अहम बात यह मानी जा रही है कि मौजूदा समय में प्रदेश में कांग्रेस की ही सरकार है और ऐसे समय में मुसाफिर जैसे वरिष्ठ चेहरे को फिर संगठन में अहम जिम्मेदारी देना कई राजनीतिक संकेत छोड़ रहा है। कांग्रेस के भीतर इसे अनुभव, जनाधार और संगठनात्मक संतुलन को साथ लेकर चलने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि मुसाफिर का राजनीतिक सफर पिछले कुछ वर्षों में आसान नहीं रहा
हालांकि मुसाफिर का राजनीतिक सफर पिछले कुछ वर्षों में आसान नहीं रहा। वर्ष 2012 के बाद उन्हें लगातार चुनावी झटके लगे। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में जब कांग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया, तो उन्होंने बागी रुख अपनाते हुए निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरकर सबको चौंका दिया था। उस समय उनका यह फैसला कांग्रेस के लिए असहज स्थिति पैदा करने वाला साबित हुआ था और पच्छाद की राजनीति में इसने अलग हलचल पैदा की थी।
अब वही मुसाफिर एक बार फिर कांग्रेस संगठन के भीतर महत्वपूर्ण भूमिका में नजर आ रहे हैं
अब वही मुसाफिर एक बार फिर कांग्रेस संगठन के भीतर महत्वपूर्ण भूमिका में नजर आ रहे हैं। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषक इसे कांग्रेस की व्यावहारिक राजनीति बता रहे हैं। उनका मानना है कि पच्छाद जैसे क्षेत्र में जहां स्थानीय प्रभाव और व्यक्तिगत जनाधार की अहम भूमिका रहती है, वहां मुसाफिर जैसे नेता को नजरअंदाज करना पार्टी के लिए आसान नहीं था।
मुसाफिर की छवि सिर्फ एक वरिष्ठ नेता की नहीं, बल्कि ऐसे जननेता की भी रही है
मुसाफिर की छवि सिर्फ एक वरिष्ठ नेता की नहीं, बल्कि ऐसे जननेता की भी रही है जो समय-समय पर क्षेत्रीय मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखते रहे हैं। कई बार उन्होंने पार्टी लाइन से अलग भी अपनी आवाज बुलंद की, लेकिन इसी शैली ने उन्हें क्षेत्र में अलग पहचान भी दी।
पच्छाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनकी नियुक्ति का स्वागत किया है
पच्छाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनकी नियुक्ति का स्वागत किया है। स्थानीय कार्यकर्ताओं और समर्थकों का कहना है कि संगठन को उनके अनुभव और मार्गदर्शन का लाभ मिलेगा। वहीं राजनीतिक हलकों में अब यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या यह नियुक्ति आने वाले समय में पच्छाद की राजनीति में कांग्रेस के नए समीकरण तैयार करेगी।
फिलहाल इतना तय है कि जी. आर. मुसाफिर की यह संगठनात्मक वापसी पच्छाद की राजनीति में नया संदेश छोड़ गई है
फिलहाल इतना तय है कि जी. आर. मुसाफिर की यह संगठनात्मक वापसी पच्छाद की राजनीति में नया संदेश छोड़ गई है और आने वाले दिनों में इसके दूरगामी राजनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं।