हिमाचल में मनरेगा की ग्रांट रोकी, मजदूरों और कर्मचारियों का जीवन संकट में
शिमला
चार महीने से अटका मजदूरों का भुगतान, मनरेगा कर्मियों को भी नहीं मिल रहा वेतन
केंद्र सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश की मनरेगा ग्रांट रोकने के चलते प्रदेश में मनरेगा का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है। बीते चार महीनों से मजदूरों की दिहाड़ी और मनरेगा कर्मचारियों के वेतन का भुगतान नहीं हो पाया है। नवंबर 2024 से मनरेगा के तहत प्रदेश की करीब 461.56 करोड़ रुपये की राशि लंबित पड़ी है। इसमें लेबर मद में 250 करोड़, निर्माण सामग्री मद में 200 करोड़ और एडमिन मद में 11 करोड़ रुपये शामिल हैं।
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मनरेगा में बेहतर प्रदर्शन के बावजूद बजट में कटौती, कार्य दिवस भी घटाए
हिमाचल प्रदेश ने वित्त वर्ष 2024-25 में 1534 करोड़ रुपये के कार्यों के साथ 395 लाख कार्य दिवस अर्जित किए, जो लक्ष्य से 136 प्रतिशत अधिक है। इसके बावजूद वित्त वर्ष 2025-26 के लिए प्रदेश के प्रस्तावित 417 लाख कार्य दिवसों को केंद्र ने घटाकर 250 लाख कर दिया है। प्रदेश सरकार ने हिमाचल की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए कार्य दिवसों में की गई इस कटौती का विरोध किया है।
तीन माह से मनरेगा कर्मी बिना वेतन, परिवार चलाना हुआ मुश्किल
ग्राम रोजगार सेवक संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिवराज ठाकुर और शिमला जिला अध्यक्ष राजेंद्र ठाकुर ने बताया कि प्रदेश में 1031 ग्राम रोजगार सहायक, 400 तकनीकी सहायक, 100 कंप्यूटर ऑपरेटर और 24 कनिष्ठ लेखपाल मनरेगा के तहत सेवाएं दे रहे हैं। एडमिन फंड से वेतन न मिल पाने के चलते इन कर्मचारियों का परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।
प्रदेश सरकार ने केंद्र से ग्रांट बहाल करने की अपील की
ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार लगातार केंद्र सरकार को ग्रांट बहाली के लिए पत्र भेज रही है, लेकिन अभी तक कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि मजदूरों की दिहाड़ी, निर्माण सामग्री की खरीद और कर्मचारियों के वेतन के लिए केंद्र से जल्द सहायता की दरकार है।
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