HNN/ सिरमौर
सिरमौर जनपद की सदियों पुरानी लोक संस्कृति व परंपराओं को संजोए रखने के लिए मशहूर करीब तीन लाख की आबादी वाले गिरिपार क्षेत्र के बाशिंदे साल के सबसे खर्चीले व शाही कहलाने वाले माघी त्यौहार की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।
बर्फ अथवा कड़ाके की ठंड से प्रभावित रहने वाली गिरिपार अथवा ग्रेटर सिरमौर की विभिन्न पंचायतों में हालांकि दिसंबर माह की शुरुआत से ही मांसाहारी लोग अन्य दिनों से ज्यादा मीट खाना शुरु कर देते हैं, मगर 10 जनवरी से शुरू होने वाले माघी त्यौहार के दौरान क्षेत्र की पंचायतों के मांसाहारी परिवारों द्वारा बकरे काटे जाने की परंपरा भी अब तक कायम है।
समूचे गिरिपार में इस त्यौहार में शाकाहारी लोगों के लिए कईं पारम्परिक व्यंजन परोसे जाते हैं, जिनमें मूड़ा, शाकुली, तेलपकी, सीड़ो व अस्कली आदि शामिल हैं। माघी त्यौहार को खड़ियांटी, डिमलांटी, उत्तरांटी व साजा अथवा संक्रांति के नाम से मनाया जाता है। पहले तीन दिन अलग-अलग निर्धारित तिथि पर विभिन्न गांवों में बकरे कटते हैं, जबकि संक्रांति के अवसर पर लोग अपने कुल देवता की पूजा करते हैं तथा इस दिन किसी भी घर में मीट नहीं पकता है।
सभी रिश्तेदारों, शादीशुदा लड़कियों को त्योहार का हिस्सा दिया जाता है। पूरा महीना मेहमाननवाजी होती है। गिरिपार में इस दिन हजारों बकरे, सूअर और खाड्डू (भेड़ू) काटे जाते हैं।
बता दें 11 जनवरी को और पौष अमावस्या होने से इस बार यह पर्व 10 जनवरी से शुरू हो रहा है। जिले के ट्रांसगिरि के साथ-साथ उत्तराखंड के जौनसार बाबर की 80 से 82 पंचायतों में इस पर्व को धूमधाम से मनाया जाता है।
जिले के गिरिपार इलाके की 154 में से 126 पंचायतों में इस पर्व पर बकरे काटे जाने की परंपरा है। करीब 30,000 से 35,000 परिवारों में बकरे काटे जाएंगे। 28 गते पौष यानी 12 जनवरी को भी गिरिपार इलाके में बकरे काटे जाएंगे।

