ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती, दूध उत्पादकों का मासिक भुगतान बढ़ा
Himachalnow / शिमला
दूध की खरीद में बढ़ोतरी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया संबल
प्रदेश सरकार के प्रयासों से दुग्ध उत्पादकों को बड़ा लाभ मिला है। अब दूध उत्पादकों का मासिक भुगतान 8.70 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 25.62 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसके साथ ही, राज्य में मिल्कफेड द्वारा प्रतिदिन दो लाख लीटर दूध की खरीद की जा रही है। यह जानकारी मुख्यमंत्री ने दी और कहा कि सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर कदम उठा रही है।
दूध के लाभकारी मूल्य और पारदर्शिता पर जोर:
प्रदेश में अब गाय के दूध का मूल्य 45 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध का मूल्य 55 रुपये प्रति लीटर तय किया गया है। दूध खरीद में पारदर्शिता लाने के लिए 455 स्वचालित दूध संग्रहण केंद्र स्थापित किए गए हैं। दुर्गम क्षेत्रों में भी मिल्कफेड द्वारा किसानों के घर-द्वार से दूध एकत्र किया जा रहा है। इसके साथ ही, किसानों को 5 लीटर क्षमता वाले दूध के डिब्बे भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
डेयरी विकास कार्यक्रम और हिम गंगा योजना:
राज्य सरकार ने डेयरी विकास कार्यक्रम के तहत 11 जिलों में 1148 ग्रामीण डेयरी सहकारी समितियां स्थापित की हैं। इनमें लगभग 47,905 सदस्य पंजीकृत हैं। इसके अलावा, सरकार ने 500 करोड़ रुपये की हिम गंगा योजना भी शुरू की है, जो डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होगी।
प्रसंस्करण संयंत्रों की स्थापना:
शिमला जिले के दत्तनगर में 50,000 लीटर प्रतिदिन क्षमता का नया दूध प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किया गया है, जिसकी लागत 25 करोड़ रुपये है। इसके अतिरिक्त, कांगड़ा जिले के ढगवार में 1.50 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला एक और प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। यह पहल दुग्ध उत्पादकों को उनके दूध का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने में मदद करेगी।
ग्रामीण विकास में नई ऊर्जा:
प्रदेश सरकार की इन पहलों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने जैसे कदम पशु पालकों और किसानों की आय में वृद्धि करेंगे। इन प्रयासों से न केवल राज्य की डेयरी अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी, बल्कि ग्रामीण समुदायों को आत्मनिर्भर बनाने का मार्ग भी प्रशस्त होगा।