जलस्रोतों के पुनर्जीवन से आत्मनिर्भर हिमाचल की राह तलाश रहा जल प्रबंधन बोर्ड
मुख्यमंत्री सुक्खू की दूरदर्शी सोच से जल संरक्षण को मिल रही नई दिशा, हिमाचल को जल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की ओर बढ़ रहे कदम : शशि शर्मा
हिमाचल नाऊ न्यूज नाहन
हिमाचल प्रदेश में जल संरक्षण, प्राकृतिक जलस्रोतों के पुनर्जीवन और भविष्य की जल जरूरतों को सुरक्षित करने की दिशा में प्रदेश सरकार की पहल के तहत हिमाचल प्रदेश जल प्रबंधन बोर्ड का दल उत्तराखंड के अध्ययन दौरे पर पहुंचा है।
दल ने लच्छीवाला रेंज और लच्छीवाला नेचर पार्क में जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, जलस्रोत एवं नदी पुनर्जीवन के लिए किए जा रहे कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया।अधीक्षण अभियंता जल शक्ति विभाग जिला सिरमौर राजीव महाजन और ग्राउंडवाटर ऑर्गेनाइजेशन हिमाचल प्रदेश के उपाध्यक्ष शशि शर्मा सहित प्रतिनिधिमंडल ने उत्तराखंड वन विभाग एवं सारा परियोजना के अधिकारियों से जल संरक्षण के लिए अपनाए जा रहे कन्वर्जेन्स मॉडल की जानकारी ली।
विभिन्न विभागों के संसाधनों और विशेषज्ञता को एकीकृत कर जलग्रहण क्षेत्रों, प्राकृतिक जलस्रोतों और जलधाराओं के संरक्षण के प्रयासों का भी अध्ययन किया गया।शशि शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की दूरदर्शी सोच हिमाचल को जल संरक्षण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि पहाड़ी प्रदेश में जलस्रोतों को बचाना आज की जरूरत ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने का संकल्प है। उत्तराखंड में किए जा रहे सफल प्रयोगों का अध्ययन कर हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप प्रभावी मॉडल तैयार किए जाएंगे।
प्रतिनिधिमंडल ने प्राकृतिक जलस्रोतों के पुनर्जीवन, जलग्रहण क्षेत्र उपचार तथा नदी-नालों में जल प्रवाह बनाए रखने के वैज्ञानिक एवं स्थानीय उपायों का भी अवलोकन किया।
हिमाचल और उत्तराखंड की पर्वतीय परिस्थितियों में समानता को देखते हुए इस अध्ययन भ्रमण को बेहद उपयोगी बताया गया। दोनों राज्यों के बीच तकनीकी ज्ञान और अनुभवों के आदान-प्रदान को भविष्य में और मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।