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डॉ. राजीव बिंदल ने झारखंड में ‘भागवंती देवी छात्रावास’ का किया लोकार्पण, 200 बच्चों को मिलेगी आवास सुविधा

By हिमांचलनाउ डेस्क नाहन Published: 10 Mar 2026, 2:35 PM | Updated: 10 Mar 2026, 2:36 PM 1 min read

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने झारखंड के रांची जिले में 200 विद्यार्थियों के लिए बने ‘भागवंती देवी छात्रावास’ का लोकार्पण किया। उन्होंने इसे अपने जीवन का भावुक और संतोषजनक क्षण बताया।

शिमला

200 विद्यार्थियों के लिए छात्रावास का लोकार्पण

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने झारखंड के रांची जिले के गोइलकेरा में 200 विद्यार्थियों के लिए निर्मित ‘भागवंती देवी छात्रावास’ का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि यह छात्रावास उनकी पूज्य माताजी स्वर्गीय भागवंती देवी के नाम पर समर्पित है, जो उनके लिए गर्व और सम्मान का विषय है।

चार दशक पुरानी यादों से जुड़ा अवसर

डॉ. बिंदल ने कहा कि यह अवसर उनके लिए चार दशक पुरानी स्मृतियों को पुनः जीवंत करने जैसा है। उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा की वीरभूमि को नमन करते हुए बताया कि लगभग 40 वर्ष पहले उन्हें इसी क्षेत्र में वनवासी समाज के बीच सेवा कार्य करने का अवसर मिला था।

वनवासी समाज के बीच सेवा कार्य की शुरुआत

उन्होंने कहा कि उस समय उन्होंने चिकित्सा सेवा और अन्य सामाजिक प्रकल्पों के माध्यम से वनवासी समाज के बीच कार्य प्रारंभ किया था। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद सेवा कार्य करने का अनुभव उनके जीवन की अमूल्य धरोहर रहा है।

शिक्षा के माध्यम से समाज निर्माण का प्रयास

डॉ. बिंदल ने कहा कि यह छात्रावास केवल एक भवन नहीं बल्कि सेवा, समर्पण और समाज के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक है। यहां रहने वाले वनवासी बच्चे शिक्षा प्राप्त कर अपने जीवन को संवारेंगे और राष्ट्र निर्माण में योगदान देंगे।

महान व्यक्तित्वों को किया नमन

उन्होंने वनवासी कल्याण आश्रम के संस्थापक बाबा साहेब देशपांडे को नमन करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में देशभर में वनवासी समाज के उत्थान के लिए कई सेवा प्रकल्प शुरू किए गए। साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक माधव सदाशिवराव गोलवलकर ‘गुरुजी’ को भी श्रद्धापूर्वक स्मरण किया।

माता-पिता के संस्कारों को बताया प्रेरणा

डॉ. बिंदल ने कहा कि इस अवसर पर उन्हें अपने माता-पिता की स्मृतियां विशेष रूप से याद आ रही हैं। उन्होंने कहा कि समाज सेवा की प्रेरणा उन्हें अपने माता-पिता के संस्कारों से मिली है और इसी भावना के साथ वे आगे भी राष्ट्र और समाज के लिए कार्य करते रहेंगे।