दवा असली है या नकली आसानी से हो सकेगी पहचान, अब कच्चे माल पर…
HNN / सोलन
हिमाचल प्रदेश में दवाइयों के बाद अब इसके कच्चे माल पर भी क्यूआर कोड लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। क्यूआर कोड लगाने से जहाँ असली और नकली दवाओं की पहचान में आसानी होगी, साथ ही इससे कच्चे माल के सप्लायर से लेकर दवा बनाने वाली कंपनी को ट्रैक करना आसान होगा।
बता दें कि क्यूआर कोड से जहां फार्मास्युटिकल फर्म का पता लगाना आसान होगा, वहीं यह जानकारी हासिल करना भी आसान हो जाएगा कि दवा के फार्मूले के साथ क्या कोई छेड़छाड़ की गई है या नही। इसके अलावा एपीआई उत्पाद कहां से आया और कहां जा रहा है, इसे भी ट्रैक किया जा सकेगा। गौरतलब है कि प्रदेश में बनी कुछ दवाओं के लगातार सैंपल फेल हो रहे है। कच्चे माल की कालाबाजारी और नकली दवाओं के निर्माण के चलते ऐसा किया गया है।
उधर, राज्य ड्रग नियंत्रक नवनीत मरवाह ने बताया कि हिमाचल में 550 फार्मा कंपनियां हैं। इनमें सिपला, डॉ. रेड्डी, सनफार्मा, मेडिपोल फार्मा, नूतन फार्मा, पार्क फार्मा, टोरेंट, डेगॉन, इंडोको, डिजिटल फार्मा आदि प्रमुख हैं। प्रदेश में प्रति वर्ष 25 से 30 हजार करोड़ का दवा उत्पादन होता है। उन्होंने कहा कि पहले दवाओं पर बारकोड था लेकिन अब इसे कच्चे माल पर भी लागू कर दिया गया है ताकि मिलावट होने की आशंका कम हो जाए। साथ ही नकली दवाओं के निर्माण में भी कमी आएगी।