Loading...

दवा गुणवत्ता पर केंद्र का शिकंजा, पांच मानकों पर फेल दवा बनाने वाली कंपनियों का रुक सकता है उत्पादन

Shailesh Saini • 17 Mins Ago • 1 Min Read

एनएसक्यू दवाओं पर तत्काल कार्रवाई का प्रस्ताव, मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस निलंबित करने की तैयारी; सुधारात्मक कार्रवाई और सरकारी सत्यापन के बाद ही मिलेगी राहत

हिमाचल नाऊ न्यूज नाहन/नई दिल्ली

देश में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर लगातार सामने आ रही शिकायतों और दवाओं के सैंपल फेल होने के मामलों के बीच केंद्र सरकार ने फार्मा उद्योगों पर शिकंजा कसने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने घटिया गुणवत्ता वाली दवाओं के निर्माण पर तत्काल रोक लगाने के उद्देश्य से ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत यदि किसी दवा का सरकारी प्रयोगशाला में परीक्षण पांच महत्वपूर्ण गुणवत्ता मानकों में से किसी एक पर भी फेल पाया जाता है तो संबंधित दवा के निर्माण लाइसेंस को तत्काल निलंबित किया जा सकेगा।

प्रस्ताव में पांच महत्वपूर्ण गुणवत्ता मानक निर्धारित किए गए हैं। इनमें अस्से (दवा में सक्रिय तत्व की निर्धारित मात्रा), डिसॉल्यूशन (दवा का निर्धारित तरीके से घुलना), रिलेटेड सब्सटेंस, इम्प्योरिटीज और स्टेरिलिटी शामिल हैं।

मौजूदा व्यवस्था में किसी दवा के मानक गुणवत्ता से नीचे पाए जाने के बाद संबंधित निर्माता के खिलाफ निर्धारित प्रक्रिया के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया जाता है। इस प्रक्रिया में समय लगने के कारण कई बार कार्यवाही में देरी की आशंका रहती है। नई प्रस्तावित व्यवस्था में सरकारी विश्लेषक की रिपोर्ट में दवा के एनएसक्यू (नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी) घोषित होते ही संबंधित लाइसेंसिंग प्राधिकरण को तत्काल मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस निलंबित करने का अधिकार देने की तैयारी है।

लाइसेंस निलंबित होने के बाद संबंधित कंपनी को गुणवत्ता में कमी के कारणों की जांच करनी होगी और करेक्टिव एंड प्रिवेंटिव एक्शन (सीएपीए) लागू करना होगा। कंपनी को यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में ऐसी खामी दोबारा न आए। इसके बाद लाइसेंसिंग अथॉरिटी सुधारात्मक कदमों का सत्यापन करेगी। संतुष्ट होने के बाद ही निलंबन हटाने पर विचार किया जा सकेगा।

प्रस्ताव के तहत सरकारी विश्लेषक की परीक्षण रिपोर्ट ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई), संबंधित राज्य औषधि लाइसेंसिंग प्राधिकरण, दवा निर्माता और मार्केटिंग कंपनी को भेजने की व्यवस्था भी की जाएगी। इससे केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय बढ़ने के साथ कार्रवाई में तेजी आने की उम्मीद है।

हिमाचल प्रदेश के बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, कालाअंब और पांवटा साहिब जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में संचालित फार्मा कंपनियों के लिए भी यह प्रस्ताव महत्वपूर्ण है। प्रदेश देश के प्रमुख दवा उत्पादन केंद्रों में शामिल है। ऐसे में नई व्यवस्था लागू होने पर गुणवत्ता मानकों की अनदेखी करने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से 4 नवंबर 2026 को जारी प्रस्ताव के तहत संबंधित पक्षों से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं। फिलहाल यह संशोधन प्रस्तावित है। अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद ही नई व्यवस्था प्रभावी होगी।