दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन, अब सिर्फ ढाई घंटे में पूरा होगा सफर
पीएम मोदी बोले—इंफ्रास्ट्रक्चर से बदलेगी उत्तराखंड की तस्वीर, पर्यटन और व्यापार को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
हिमाचल नाऊ न्यूज़ | देहरादून/नई दिल्ली
देश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में मंगलवार को एक बड़ा अध्याय जुड़ गया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बहुप्रतीक्षित दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का भव्य उद्घाटन किया। करीब 12 हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह 213 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे अब दिल्ली और देहरादून के बीच सफर को न केवल आसान बनाएगा, बल्कि समय की बड़ी बचत भी करेगा।
इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने के साथ ही दिल्ली से देहरादून की दूरी 235 किलोमीटर से घटकर 213 किलोमीटर रह गई है। सबसे बड़ी राहत समय को लेकर मिली है—अब यह सफर महज ढाई घंटे में पूरा किया जा सकेगा, जबकि पहले यात्रियों को 6 से 7 घंटे तक का समय लगता था।
यह एक्सप्रेसवे आधुनिक इंजीनियरिंग का बेहतरीन उदाहरण है। इसमें एशिया का सबसे लंबा करीब 12 किलोमीटर का एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर बनाया गया है, जो राजाजी टाइगर रिजर्व के इको-सेंसिटिव जोन से होकर गुजरता है। वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष अंडरपास और हाथियों के लिए अलग मार्ग भी तैयार किए गए हैं।
इसके अलावा डाट काली मंदिर के पास 370 मीटर लंबी आधुनिक सुरंग भी बनाई गई है।
उद्घाटन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डाट काली मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने सहारनपुर और देहरादून में रोड शो भी किया, जहां बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ी।
जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड अपने 25 वर्ष पूरे कर चुका है और यह एक्सप्रेसवे राज्य के विकास को नई गति देगा। उन्होंने इसे डबल इंजन सरकार की विकासोन्मुख सोच का परिणाम बताया।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे अक्षरधाम से शुरू होकर बागपत, शामली और सहारनपुर होते हुए देहरादून तक जाएगा। इस पर 100 से अधिक अंडरपास, 12 वे-साइड सुविधाएं और अत्याधुनिक ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम विकसित किया गया है।
इस परियोजना के चालू होने से उत्तराखंड के पर्यटन, व्यापार और तीर्थाटन को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। खास तौर पर हरिद्वार और ऋषिकेश जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह एक्सप्रेसवे यात्रा को और सुगम बनाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक्सप्रेसवे आने वाले समय में उत्तर भारत के आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण आधार बनेगा और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।